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देशमुख मामले में आला अफसरों को समन: सीबीआई का तर्क, पुलिस जमींदारी व्यवस्था का अंग नहीं
Tue, 23 Nov 2021 05:33 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 23 Nov 2021 05:33 AM IST
सार
पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख मामले में महाराष्ट्र सरकार के दो आला अधिकारियों को जारी समन रद्द करने की मांग का विरोध करते हुए सीबीआई ने बॉम्बे हाईकोर्ट में यह तर्क रखा।
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महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सीबीआई ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि राज्य का पुलिस बल स्वतंत्र संस्था है, न कि किसी जमींदारी व्यवस्था का अंग। पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख मामले में महाराष्ट्र सरकार के दो आला अधिकारियों को जारी समन रद्द करने की मांग का विरोध करते हुए एजेंसी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में यह तर्क रखा।
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जस्टिस नितिन जामदार व एसवी कोटवाल की पीठ के समक्ष सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कहा, उगाही मामले में राज्य के मुख्य सचिव सीताराम कुंटे और वर्तमान डीजीपी संजय पांडे को जारी समन रद्द करने की मांग का महाराष्ट्र सरकार को अधिकार नहीं है। कानून के मुताबिक पुलिस बल स्वतंत्र है। राज्य सरकार की याचिका गलत धारणा पर आधारित और देशमुख की जांच रुकवाने का प्रयास है। इससे पूर्व, महाराष्ट्र सरकार के अधिवक्ता डेरियस खंबाता ने कहा, सरकार ने कानूनी प्रावधान के तहत हाईकोर्ट में अपील की है।
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ऋषिकेश की जमानत का विरोध
ईडी ने अनिल देशमुख के बेटे ऋषिकेश देशमुख की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा, वह धनशोधन में सक्रिय रूप से लिप्त था। गलत तरीके से अर्जित धन को बेदाग दान के रूप में पेश करने में अपने पिता का मददगार था। ऋषिकेश ने विशेष अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। कोर्ट अगली सुनवाई चार दिसंबर को करेगी।
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हलफनामा दायर करें परमबीर
अनिल देशमुख पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित जस्टिस केयू चांदीवाल आयोग ने पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के हस्ताक्षर को लेकर हलफनामा दाखिल करने को कहा। देशमुख की वकील ने कहा था, दो दस्तावेज में सिंह के हस्ताक्षर अलग-अलग हैं।