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आंध्र प्रदेश: 'बन्नी' उत्सव में लाठी से होने वाली लड़ाई की रस्म में लगभग 50 लोग घायल
Wed, 09 Oct 2019 01:40 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुरनूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुरनूल
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 09 Oct 2019 01:40 PM IST
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बन्नी उत्सव मनाते लोग
- फोटो : ANI
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में मंगलवार को हर साल मनाए जाने वाले 'बन्नी' उत्सव में लाठी से होने वाली लड़ाई की रस्म में लगभग 50 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस रस्म में लोग दो देवताओं को अपने पाले में रखने के लिए लाठियों से एक दूसरे पर वार करते हैं। लोगों का मानना है कि देवताओं के गांव में होने से समृद्धि आती है।
यह उत्सव दशहरा की पूर्व संध्या पर देवरगट्टू गाँव में होता है, जहाँ हर साल हजारों लोग ज्वलंत मशालें और लंबे डंडे लिए समारोह में शामिल होते हैं। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में बेल्लारी जिले के आसपास के गांवों के लोग भी इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं।
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जिले के एसपी ने डॉ फकीरप्पा कागीनेल्ली ने बताया कि लगभग एक लाख लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें अधिकर लोग युवा थे। उन्होंने बताया कि लाठी से होने लड़ाई में घायल हुए लोगों का इलाज अदोनी के अस्पताल में चल रहा है।
इस कारण मनाया जाता है त्योहार
गौरतलब है कि गांव में माला मल्लेश्वरा स्वामी मंदिर के सम्मान में आयोजित होने वाले इस उत्सव में लाठियों से होने वाली एक लड़ाई भी शामिल होती है, जहां प्रतिभागी दो देवताओं को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करते हैं।
उनका यह मानना है कि यदि वे दोनों में से किसी देवता की मूर्ति को अपने यहां लाने में कामयाब होते हैं, तो यह उनके गांव में समृद्धि लाएगा। मंदिर का स्वामित्व और प्रबंधन नेरानिकी गांव के निवासियों द्वारा किया जाता है जो इन देवताओं की रक्षा करते हैं।
लोककथाओं के अनुसार, स्थानीय लोगों ने बताया कि मणि और मल्लासुरा नाम के दो राक्षक पास की पहाड़ियों में रहते थे, और कुछ संतों को बहुत परेशान करते थे। इससे परेशान होकर संतों ने भगवान परमेस्वर और पार्वती से उन्हें बचाने की प्रार्थना की, जिसके बाद परमेस्वर पहाड़ी के ऊपर एक पत्थर पर प्रकट हुए और दशहरे की रात राक्षसों को खत्म कर दिया।
हालांकि हर साल होने वाला यह अनुष्ठान बिना विवाद किसी भी वर्ष समाप्त नहीं होता है, हर वर्ष कई लोग इसमें भाग लेने के दौरान घायल हो जाते हैं। अनुष्ठान को लेकर अधिकारियों की सलाह के बाद भी गंभीर चोटों के चलते कई मौतें भी दर्ज की गई हैं।
इस साल भी, पुलिस ने सुरक्षा को बढ़ा दिया था और गाँव भर में सीसीटीवी कैमरे लगाए थे और यह सुनिश्चित करने के लिए 1,000 कर्मियों को तैनात किया था कि उत्सव बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हो।इससे पहले घटना की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया गया है।
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#WATCH Andhra Pradesh: People from five villages participated in age old Banni festival in Devaragattu village, Holagunda mandal of Kurnool district yesterday.They formed 2 groups to fight with wooden sticks as part of a traditional competition to claim the idol of a local deity pic.twitter.com/pdwL0xDc1i
— ANI (@ANI) October 9, 2019विज्ञापन
यह उत्सव दशहरा की पूर्व संध्या पर देवरगट्टू गाँव में होता है, जहाँ हर साल हजारों लोग ज्वलंत मशालें और लंबे डंडे लिए समारोह में शामिल होते हैं। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में बेल्लारी जिले के आसपास के गांवों के लोग भी इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं।
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जिले के एसपी ने डॉ फकीरप्पा कागीनेल्ली ने बताया कि लगभग एक लाख लोगों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें अधिकर लोग युवा थे। उन्होंने बताया कि लाठी से होने लड़ाई में घायल हुए लोगों का इलाज अदोनी के अस्पताल में चल रहा है।
इस कारण मनाया जाता है त्योहार
गौरतलब है कि गांव में माला मल्लेश्वरा स्वामी मंदिर के सम्मान में आयोजित होने वाले इस उत्सव में लाठियों से होने वाली एक लड़ाई भी शामिल होती है, जहां प्रतिभागी दो देवताओं को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करते हैं।
उनका यह मानना है कि यदि वे दोनों में से किसी देवता की मूर्ति को अपने यहां लाने में कामयाब होते हैं, तो यह उनके गांव में समृद्धि लाएगा। मंदिर का स्वामित्व और प्रबंधन नेरानिकी गांव के निवासियों द्वारा किया जाता है जो इन देवताओं की रक्षा करते हैं।
लोककथाओं के अनुसार, स्थानीय लोगों ने बताया कि मणि और मल्लासुरा नाम के दो राक्षक पास की पहाड़ियों में रहते थे, और कुछ संतों को बहुत परेशान करते थे। इससे परेशान होकर संतों ने भगवान परमेस्वर और पार्वती से उन्हें बचाने की प्रार्थना की, जिसके बाद परमेस्वर पहाड़ी के ऊपर एक पत्थर पर प्रकट हुए और दशहरे की रात राक्षसों को खत्म कर दिया।
हालांकि हर साल होने वाला यह अनुष्ठान बिना विवाद किसी भी वर्ष समाप्त नहीं होता है, हर वर्ष कई लोग इसमें भाग लेने के दौरान घायल हो जाते हैं। अनुष्ठान को लेकर अधिकारियों की सलाह के बाद भी गंभीर चोटों के चलते कई मौतें भी दर्ज की गई हैं।
इस साल भी, पुलिस ने सुरक्षा को बढ़ा दिया था और गाँव भर में सीसीटीवी कैमरे लगाए थे और यह सुनिश्चित करने के लिए 1,000 कर्मियों को तैनात किया था कि उत्सव बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हो।इससे पहले घटना की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया गया है।