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आंध्र प्रदेश: 321 करोड़ रुपये के फाइबरनेट घोटाले में आईआरटीएस के वरिष्ठ अधिकारी को किया गिरफ्तार

Sun, 19 Sep 2021 03:41 AM IST
Kuldeep Singh पीटीआई, अमरावती
पीटीआई, अमरावती Published by: Kuldeep Singh Updated Sun, 19 Sep 2021 03:41 AM IST
सार

अपराध जांच विभाग ने शनिवार को आईआरटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी के संबाशिव राव को फाइबरनेट घोटाले करने पर एफआईआर दर्ज कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वर्तमान में संबाशिव राव सिकंदराबाद में दक्षिण मध्य रेलवे मुख्यालय में मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं।

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Andhra Pradesh: Crime Investigation Department arrested a senior officer of IRTS in fibernet scam of 321 crore rupees
Arrest - सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

आंध्र प्रदेश के अपराध जांच विभाग ने शनिवार को आईआरटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी के संबाशिव राव को 321 करोड़ रुपये के फाइबरनेट घोटाले करने के मामले में गिरफ्तार किया।

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अधिकारी के संबाशिव राव वर्तमान में सिकंदराबाद में दक्षिण मध्य रेलवे मुख्यालय में मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं और उन्होंने पहले आंध्र प्रदेश स्टेट फाइबरनेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य किया था।
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सीआईडी ने हाल ही में आंध्र प्रदेश स्टेट फाइबरनेट लिमिटेड में कथित अनियमितताओं पर एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें 321 करोड़ रुपये राशि शामिल थी। आईआरटीएस अधिकारी संबाशिव राव ने पिछली चंद्रबाबू नायडू सरकार के दौरान आंध्र प्रदेश सरकार में प्रतिनियुक्ति पर काम किया था।
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सीआईडी ने उसे मामले में एक आरोपी के रूप में नामित किया और उसे गिरफ्तार करने से पहले पिछले पांच दिनों में उससे व्यापक पूछताछ की। उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

फाइबरनेट परियोजना भारत सरकार की भारत नेट परियोजना के हिस्से के रूप में राज्य के सभी घरों में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं प्रदान करने के लिए थी। सीआईडी ने नौ सितंबर को एफआईआर दर्ज की है। जिसमें 16 लोगों और दो कंपनियों को आरोपी बनाया है।


एपीएसएफएल के अध्यक्ष पी गौतम रेड्डी द्वारा दायर एक शिकायत का हवाला देते हुए सीआईडी ने कहा कि ई-गवर्नेंस अथॉरिटी गवर्निंग काउंसिल के तत्कालीन सदस्य वेमुरी हरिकृष्ण प्रसाद ने टेरा सॉफ्टवेयर लिमिटेड के साथ मिलीभगत की। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कंपनी को अवैध रूप से 321 करोड़ रुपये का टेंडर दिया गया था। सीआईडी सूत्रों ने बताया कि इस मामले में तेरा सॉफ्टवेयर के अधिकारियों के साथ प्रसाद से भी पूछताछ की जा रही है।

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