फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Anantnag Encounter: 18 terrorist camps in Pakistan Occupied Kashmir, from where terrorists are getting orders

Anantnag Encounter: 53 किमी दूर पाक अधिकृत कश्मीर के ये हैं 18 आतंकी कैंप, जहां से मिल रहे आतंकियों को निर्देश

Fri, 15 Sep 2023 08:22 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 15 Sep 2023 08:22 PM IST
विज्ञापन
सार
Anantnag Encounter: बॉर्डर के उस पार एलओसी से करीब 53 किलोमीटर दूर पाकिस्तान ने 18 आतंक के केंद्र बनाए हैं। मुजफ्फराबाद के पास के इलाके नीलम, खानिन, मकरी और नियाजपुरा के पास ये 18 प्रमुख आतंकी कैंप बीते कुछ महीनों में ही शुरू हुए हैं...
loader
Anantnag Encounter: 18 terrorist camps in Pakistan Occupied Kashmir, from where terrorists are getting orders
Anantnag Encounter - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार

बॉर्डर के उस पार एलओसी से करीब 53 किलोमीटर दूर पाकिस्तान ने 18 ऐसे आतंक के केंद्र बनाए हैं, जो घाटी में माहौल खराब करने की आतंकी ट्रेनिंग दे रहे हैं। इन आतंकी कैंपों की संख्या बीते कुछ समय से न सिर्फ बढ़ी है, बल्कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने अपने कमांडरों से बाकायदा इन केंद्रों में आतंकी प्रशिक्षण कैंप भी आयोजित किए हैं। सूत्रों के मुताबिक पीओके से आदेश दिए जा रहे हैं वे घाटी में सक्रिय चार प्रमुख आतंकी संगठनों के हैंडलर टेरर संगठनों को मिल रहे हैं। अनंतनाग में हुए आतंकी हमले में पीओके से मिले आदेश की बात भी सामने आ रही है।

खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद से घाटी में आतंकवाद को पनाह देने वाला कोई भी व्यक्ति नहीं बचा। इसलिए ज्यादातर आतंकी कैंप धीरे-धीरे घाटी से पीओके में शिफ्ट हो गए। शुरुआती दौर में पीओके में इन आतंकी कैंपों की संख्या निर्धारित थी, लेकिन बाद में इसको बढ़ाया जाने लगा। तकरीबन डेढ़ सालों में पीओके में चल रहे कैंप को पाकिस्तानी समर्थित आतंकी संगठनों समेत पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने इनकी संख्या डेढ़ दर्जन तक पहुंचा दी है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक पहले ये आतंकी कैंप घाटी में चलते थे। लेकिन सेना और सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के चलते ये सब पीओके शिफ्ट हो गए।

खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मुजफ्फराबाद और आस पास में इलाके में ये सभी प्रमुख आतंकी कैंप चलाए जा रहे हैं। मुजफ्फराबाद के पास के इलाके नीलम, खानिन, मकरी और नियाजपुरा के आए पास ये 18 प्रमुख आतंकी कैंप बीते कुछ महीनों में शुरू हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक इन आतंकी कैंप में निर्देश पीओके के मुजफ्फराबाद में बैठे आईएसआई के प्रमुख हैंडलर की ओर से दिए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीते कुछ समय में पीओके के ऐसे इलाके में पाकिस्तानी सेना और इसी के कमांडर्स की ओर से एक ट्रेनिंग कैंप भी आयोजित किया गया था। अनंतनाग में हुई बड़ी आतंकी घटना में पाकिस्तान की सेना के कंमांडोज और आईएसआई की बड़ी साजिश ही है।

घाटी में लंबे समय तक काम कर चुके खुफिया विभाग से जुड़े एक अधिकारी बताते हैं कि अब कश्मीर घाटी में पाकिस्तान की आईएसआई की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई भी बड़ा आतंकियों का रहनुमा मौजूद नहीं है। तकरीबन दो साल पहले सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद तो पूरी तरीके से घाटी में आतंकवाद को पनाह देने वाला कोई भी व्यक्ति नहीं बचा। यही वजह है कि आईएसआई ने अब अपने आतंकवाद फैलाने वाले केंद्र बिंदु को घाटी से शिफ्ट कर पीओके के मुजफ्फराबाद में शिफ्ट कर दिया है। मुजफ्फराबाद में इस वक्त आईएसआई ने घाटी में आतंक को फैलाने की कमान ऐसे शख्स को दी है, जिसका नेटवर्क भारत में पहले से बना हुआ है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस व्यक्ति का नाता संसद हमले में शामिल एक व्यक्ति से भी रहा है। संसद हमले में शामिल रहे आतंकी से करीबी रिश्तेदारी के चलते ही आईएसआई ने इस शख्स पर घाटी में आतंकवाद फैलाने का दांव लगाया था। लेकिन सैयद अली शाह गिलानी की मौत के बाद श्रीनगर के बाहरी इलाकों से निकलकर पीओके के मुजफ्फराबाद में पहुंचा। सूत्र बताते हैं कि पीओके के मुजफ्फराबाद में बैठे इसी मास्टरमाइंड का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना और आईएसआई आतंक को बढ़ावा देने के लिए कर रही है।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठनों ने पीओके के मुजफ्फराबाद से कश्मीर में आतंकी संगठन जरूर तैयार किए। जिसमें द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), द पीपल एंटी फासिस्ट फोर्स (पीएएएफ), कश्मीर टाइगर्स (केटी) और कश्मीर जांबाज़ फोर्स (केजेबी) जैसे कुछ और स्थानीय लड़कों के आतंकी संगठन तैयार किए गए हैं। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह सभी संगठन पाकिस्तान के आईएसआई के इशारे पर ही काम कर रहे हैं। ये सभी संगठन पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद के अलावा हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों का ही एक अलग आतंकी संगठन है। केंद्रीय खुफिया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि फिलहाल अभी घाटी में ऑपरेशन चल रहा है। इसलिए वह कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन इतना तय है कि आतंकियों और उनके आकाओं की इसली कीमत तो चुकानी ही होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed