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बच्चों को हॉर्मोन्स-केमिकल देना व पोर्नोग्राफी अब जघन्य अपराध

Thu, 11 Jul 2019 11:59 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Thu, 11 Jul 2019 11:59 PM IST
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an amendment pocso act : Child Sexual will be on offenses and strict punishment
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने पॉक्सो कानून में संशोधन कर चाइल्ड पोर्नोग्राफी की परिभाषा का विस्तार किया है। मंत्रालय ने इसमें तस्वीरों, डिजिटल और कंप्यूटर से तैयार पोर्नोग्राफिक सामग्री को भी शामिल किया है। बिल के पास होने जाने पर ये चीजें पॉक्सो कानून के तहत दंडनीय होंगे। साथ ही बाल यौन अपराधों के लिए सजा को अधिक कठोर किया गया है। अब बच्चों से दुष्कर्म या उसकी कोशिश जैसे जघन्य अपराध में मौत की सजा का भी प्रावधान होगा। 
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मंत्रालय ने अश्लील कार्टून और अश्लील एनीमेटेड तस्वीरों को भी बच्चों के खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) कानून में दंडनीय अपराधों की श्रेणी में लाने की बात कही है। नए कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अश्लील वीडियो या तस्वीर में बच्चों की नकल करते कोई अश्लील कृत्य कर रहा होगा तो दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।
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मंत्रालय नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो को बच्चों के प्रति यौन अपराध के मामलों के डाटा को नए सुधारों के हिसाब से तय करने को कहा है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को यौन अपराध संरक्षण कानून-2012 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
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बालिग बनाने की दवा देने पर सात साल सजा

पहली बार बच्चों को हार्मोन के इंजेक्शन और अन्य केमिकल के जरिए शारीरिक बदलाव को परिभाषित कर जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मामले में भी कड़ी सजा का प्रावधान है। बच्चों को बालिग बनाने के लिए दवा या हार्मोन आदि का इंजेक्शन देने का दोषी मिलने पर कम से कम 5 साल और अधिकतम 7 साल की सजा होगी। साथ ही जुर्माना भी देना होगा। यही सजा किसी ऐसे अपराध को करने के लिए किसी को प्रेरित करने, किसी को इसका लालच देने या किसी को ऐसा करने के लिए मजबूर करने पर भी लागू होगी।

लड़का-लड़की के भेद खत्म किया

संशोधन में लड़का-लड़की के भेद को खत्म कर दिया गया है। बच्चों से दुष्कर्म या उसका प्रयास के दोषी को मौत की सजा या उम्रकैद, मृत्यु तक जेल में रहने की सजा, 20 साल सश्रम कारावास जैसी सजा भुगतनी पड़ेगी। बच्चों से जुड़ी पोर्नोग्राफिक सामग्री रखने, उसके प्रसार पर तीन साल सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला

नए कानून से दिल्ली से 40 देशों मेें चलने वाले पोर्नोग्राफी रैकेट के आरोपियों और केरल में सोशल मीडिया पर चल रहे पोर्नोग्राफी चैनल के दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। अब तक कमजोर कानून के चलते आरोपी बच रहे थे। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि महिला एवं बच्चों के यौन उत्पीड़न मामलों का निपटारा एक साल में होगा। इनके निपटारे के लिए 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला भी हुआ है।
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