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गरबा पर घमासान: अमृता फडणवीस बोलीं- मुस्लिम आए तो गलत नहीं; राणे के बयान से क्यों बढ़ा विवाद?

Wed, 09 Sep 2026 10:50 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई,मुंबई।
पीटीआई,मुंबई। Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 09 Sep 2026 10:50 AM IST
सार

महाराष्ट्र में नवरात्रि से पहले गरबा और दांडिया में मुस्लिमों की एंट्री का मुद्दा चर्चा में है। वीएचपी ने मुस्लिमों को प्रवेश नहीं देने और प्रतिभागियों की पहचान जांचने की अपील की है। नितेश राणे ने इस रुख का समर्थन किया है और ‘लव जिहाद’ का हवाला दिया है। वहीं अमृता फडणवीस ने कहा है कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति उत्सव का सही तरीके से आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कुछ गलत नहीं लगता।
 

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गरबा विवाद - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र में नवरात्रि से पहले गरबा और दांडिया को लेकर विवाद बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद ने मुस्लिमों को इन आयोजनों में प्रवेश नहीं देने की अपील की है। भाजपा नेता और मंत्री नितेश राणे ने भी इसका समर्थन किया है। अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने इस मुद्दे पर अलग राय रखी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति गरबा में आता है और उत्सव का आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कुछ गलत नहीं लगता।
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नितेश राणे ने क्या कहा था?
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने सोमवार को वीएचपी की अपील का समर्थन किया था। उन्होंने दावा किया कि ऐसे त्योहारों के दौरान ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़ते हैं। उन्होंने कहा था कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें हिंदू धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं होना चाहिए। राणे ने आयोजनों में आने वाले लोगों की पहचान जांचने और प्रवेश से पहले हनुमान चालीसा का पाठ कराने की बात भी कही थी।
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वीएचपी ने गरबा को लेकर क्या दिशा-निर्देश दिए?
विश्व हिंदू परिषद ने पिछले सप्ताह महाराष्ट्र में होने वाले गरबा और दांडिया आयोजनों को लेकर अपनी ‘गाइडलाइन’ जारी की थी। वीएचपी ने कहा कि नवरात्रि के दौरान होने वाले इन कार्यक्रमों में मुस्लिमों को प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। संगठन ने आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान जांचने को कहा है। इसके लिए आधार कार्ड देखने और माथे पर तिलक लगाने जैसे कदमों की बात कही गई है। महाराष्ट्र में इस साल नवरात्रि उत्सव 11 अक्टूबर से शुरू होगा।
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अमृता फडणवीस और राणे की राय में अंतर क्या?
पूरे विवाद में सबसे अहम बात दोनों नेताओं की अलग-अलग राय है। नितेश राणे जहां धार्मिक आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं, वहीं अमृता फडणवीस ने त्योहारों को समावेशी बताया है। अमृता फडणवीस ने साफ कहा कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति वहां आता है और उत्सव का सही तरीके से आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कोई समस्या नजर नहीं आती। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब गरबा और दांडिया में प्रवेश को लेकर वीएचपी की अपील चर्चा में है।

‘लव जिहाद’ से क्या मतलब और विवाद क्यों?
‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी कार्यकर्ता एक कथित साजिश के आरोप के लिए करते हैं। उनके अनुसार मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को रिश्तों में फंसाकर धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश करते हैं। नितेश राणे ने गरबा और दांडिया जैसे आयोजनों में पहचान जांच की जरूरत बताई है।


संजय राउत ने अमृता का किया समर्थन
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने त्योहारों में सभी समुदायों की भागीदारी की वकालत की थी।

राउत ने अमृता फडणवीस को सलाह देते हुए तंज कसा कि उन्हें मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में शामिल 'नव-हिंदुत्ववादी' नेताओं और खुद देवेंद्र फडणवीस को इस विषय पर समझाना चाहिए। इसके साथ ही राउत ने 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न विवाद पर भी शिंदे गुट पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बालासाहेब ठाकरे की मूल शिवसेना का यह चिह्न चुनाव आयोग के माध्यम से साजिश के तहत चुराया गया था। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे की यह मांग बिल्कुल सही है कि चुनाव आयोग को इस प्रतीक चिह्न पर जल्द से जल्द अंतिम फैसला लेना चाहिए।
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