G20: 'डायनामाइट से मेटावर्स' और 'हवाला से क्रिप्टो करेंसी' तक सुरक्षा चुनौतियां, केंद्रीय मंत्री ने सुझाए उपाय
अमित शाह गुरुग्राम में ‘एनएफटी, एआई और मेटावर्स के युग में अपराध और सुरक्षा पर जी20 सम्मेलन’ के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि फिशिंग, ऑफलाइन बाल यौन-शोषण और हैकिंग जैसे साइबर क्राइम विश्वभर में खतरे पैदा कर रहे हैं।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दुनिया भर के देशों के लिए डायनामाइट-से-मेटावर्स और हवाला से क्रिप्टो-करेंसी तक की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए इससे निपटने के लिए एक रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
साइबर अपराध और बढ़ने की उम्मीद
शाह गुरुग्राम में ‘एनएफटी, एआई और मेटावर्स के युग में अपराध और सुरक्षा पर जी20 सम्मेलन’ के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि इंटरपोल की साल 2022 की ग्लोबल ट्रेंड समरी रिपोर्ट के मुताबिक रेनसमवेयर, फिशिंग, ऑफलाइन टेलीकॉम, ऑफलाइन बाल यौन-शोषण और हैकिंग जैसे साइबर क्राइम विश्वभर में गंभीर खतरे की स्थिति पैदा कर रहे हैं। ऐसी संभावना है कि भविष्य में ये साइबर अपराध कई गुना बढ़ जाएंगे।
भ्रामक सूचना करती हैं अपराधियों की मदद
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि साइबर अपराधी मेटावर्स, डार्कनेट, टूलकिट आधारित भ्रामक सूचना अभियान की मदद लेते हैं। ऐसी गतिविधियां राष्ट्रीय चिंता का विषय हैं क्योंकि इनका सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे अपराधों और अपराधियों को रोकना है तो हमें पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से ऊपर उठकर सोचना और कार्य करना होगा।
सम्मेलन में कई देशों ने लिया भाग
इसके अलावा उन्होंने कहा कि जी20 ने आर्थिक दृष्टिकोण के लिए डिजिटल बदलाव पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन अब अपराध तथा सुरक्षा पहलुओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में जी20 सदस्यों के अलावा नौ अतिथि देश और दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन इंटरपोल और यूएनओडीसी के साथ-साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय वक्ता भी भाग ले रहे हैं।
गृह मंत्री ने सुझाए उपाय
गृह मंत्री ने सीमाओं पार सक्रिय साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कई उपायों का सुझाव दिया, जो यह हैं-
- सभी देशों के कानूनों में एकरूपता लाया जाए
- देशों के विभिन्न कानूनों के तहत एक प्रतिक्रिया तंत्र विकसित की जाए
- सख्त कानून-नियम हो
- सभी देशों की साइबर एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो