शाह के पटना दौरे से होगी बिहार में 'मिशन-2019' की शुरूआत, देंगे संगठन को धार
बिहार में 2015 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहली बार 12 जुलाई को पटना दौरे पर हैं। उनके इस दौरे पर राजनीतिक धुरंधरों की निगाह टिकी हुई हैं, क्योंकि इस दौरान सीट शेयरिंग को लेकर जद(यू) चीफ नीतीश कुमार से बातचीत होनी है। लेकिन इस सबके अलावा शाह अपनी इस यात्रा में संगठन को मजबूत धार तो देंगे ही, साथ ही शक्ति केन्द्रों के प्रमुखों से भी मिलेंगे।
शाह का पटना दौरा आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक परिदृश्य से काफी अहम है। इस दौरान वे 2019 के चुनावों को देखते हुए राज्यभर के निचले स्तर पर चुनाव प्रबंधकों से तो मुलाकात करेंगे ही, साथ ही 10 हजार शक्ति केन्द्रों के प्रमुखों के साथ भी बैठक करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक शाह ने कर्नाटक और गुजरात चुनावों से पहले शक्ति केंद्रों के साथ बैठकें संबोधित की थीं। इसे शाह की खास चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जाता है, जिसमें जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता मतदाताओं से जुड़ने का बीड़ा उठाते हैं।
वरिष्ठ भाजपा सूत्रों का कहना है कि पूरे बिहार में 63 हजार से ज्यादा बूथ हैं और पार्टी ने 51 हजार बूथों के आंकड़े एकत्र कर लिए हैं। गुरुवार को शाह की राज्य के नेताओं के साथ होने वाली बैठक में इन आंकड़ों का प्रेजेंटेशन दिया जाएगा।
इसके अलावा लगभग 45 आईटी और सोशल मीडिया टीमों का भी गठन किया गया है, जिनके साथ शाह आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी की रणनीति को 'आक्रामक तरीके' से जनता तक पहुंचाने पर चर्चा करेंगे।
बिहार में सोशल मीडिया देरी से पहुंचा
पार्टी के वरिष्ठ नेता का कहना है कि हालांकि बिहार में सोशल मीडिया देरी से पहुंचा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में व्हाट्सएप और फेसबुक पर बिहार के लोगों की पहुंच में बेहतहाशा बढ़ोतरी हुई है और सोशल मीडिया वॉलेंटियर्स उन्हीं के बीच पहुंच कर सरकार की उपलब्धियां पहुंचाएंगे।
साथ ही, शाह की इस यात्रा में उन बूथों के आंकड़े भी पेश किए जाएंगे, जहां 2015 के बाद पिछले 3 सालों में मुस्लिम और यादव मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।
सूत्रों ने बताया कि विधानसभा चुनावों में हार के बाद शाह ने भाजपा की बिहार इकाई को आंकड़े एकत्र करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, शाह ने राज्य में बूथ कमेटियों, शक्ति केंद्रों के गठन और मंडलों एवं पन्ना प्रमुखों की नियुक्त के लिए भी कहा था।
दौरे के दौरान शाह पार्टी के उन पदाधिकारियों और प्रमुखों के साथ भी अलग से बैठक करेंगे, जिन्हें उन्होंने फरवरी से राज्य की सभी विधानसभाओं में दौरे करना का निर्देश दिया था। इस दौरे के पश्चात पदाधिकारियों ने एक आंतरिक रिपोर्ट बनाई है, जिसमें प्रत्येक विधानसभा के जातिगत आंकड़ों के साथ वर्तमान विधायकों के कामकाज का लेखाजोखा भी रखा गया है।
सूत्रों का कहना है कि बिहार में मुस्लिम-यादव आबादी लगभग 30 फीसदी है और भाजपा की रणनीति है कि स्थानीय मुद्दों पर वोट देने वाले महादलितों, आर्थिक तौर से पिछड़ों और अन्य समुदायों का समर्थन हासिल करके इनसे मुकाबला किया जाए।