UP Election 2022: यूपी मिशन पर अमित शाह, भाजपा के इस ‘चाणक्य’ ने पिछले चुनाव में कैसे दिलाई थी भाजपा को जीत
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विस्तार
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज यूपी पहुंचे और अपनी पहली ही रैली में उन्होंने यह साफ कर दिया कि 2022 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ ही सीएम चेहरा होंगे। उन्होंने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के चुनावी अभियान का आगाज किया। प्रदेश में भाजपा के चार करोड़ सदस्य बनाने के लक्ष्य के साथ सदस्यता अभियान की भी शुरुआत की। उन्होंने लोगों से अपील की है कि भाजपा को 2022 में जिताएं तो हम इस प्रदेश को नंबर एक प्रदेश बना देंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया और एक बार फिर भाजपा की सरकार बनाने के लिए जीत का मंत्र दिया।
बताया जा रहा है 2017 विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी को जीत दिलाने के लिए जो रणनीति तैयार की है उसके पीछे अमित शाह की भी बड़ी भूमिका है और वे मुख्य रणनीतिकर्ता के तौर पर नजर आने वाले हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के समय शाह पार्टी अध्यक्ष थे और उनके नेतृत्व में भाजपा को उत्तर प्रदेश में शानदार जीत मिली थी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि इस बार उनकी चुनौती ज्यादा बड़ी है क्योंकि इस बार सपा ज्यादा मजबूती से उभर रही है। कई चुनावी सर्वे में भी भाजपा और सपा के बीच ही मुख्य मुकाबला बताया गया है।
वरिष्ठ पत्रकार आर राजगोपालन बताते हैं कि 2017 से अब तक वक्त काफी बदल चुका है। इस बार पार्टी को ‘साइकिल’ से ज्यादा खतरा महसूस हो रहा है। इसलिए पीएम हर बात में साइकिल की बात करते हैं। पार्टी की दूसरी चिंता जुलाई में 2022 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी है। इसलिए शाह यूपी में पार्टी की सीटें बढाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। पार्टी राज्यसभा में भी संख्या बढ़ाना चाहती है, इसलिए जितना जोर अमित शाह ने 2017 में लगाया था उससे भी ज्यादा जोर इस बार लगाते दिखेंगे।
यूपी में शाह की कहानी कहां से शुरु हुई?
मई 2013 में अमित शाह पहली बार भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में आए। उन्हें महासचिव का पद मिला साथ ही उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया। बताया जाता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया उसके बाद मोदी ने तत्कालीन पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह को इस बात के लिए राजी किया था कि अमित शाह को उत्तर प्रदेश का प्रभारी महामंत्री नियुक्त किया जाए।
शाह ने 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए मोदी को ‘विकास पुरुष’ के तौर पर स्थापित किया और पार्टी में यह साफ संदेश दिया कि वोट सिर्फ मोदी के नाम पर मांगे जाएंगे। उन्होंने मोदी के भरोसे को सही साबित किया उत्तर प्रदेश में भाजपा को 80 में से 71 लोकसभा सीटों पर जीत दिलाई।
प्रदेश में पार्टी को मजबूत किया
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली कुल सीटों में 26 फीसदी उत्तर प्रदेश से मिली थी। भाजपा के इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा सीटें थीं। इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय जितना नरेंद्र मोदी को दिया गया उतना ही अमित शाह के सिर भी यह सेहरा बंधा। शाह ने पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद अपने सम्मान समारोहों में वक्त बर्बाद नहीं किया बल्कि वे पार्टी को मजबूत करने में जुटे रहे।
वरिष्ठ पत्रकार आर राजगोपालन बताते हैं कि शाह ने यूपी में पार्टी को मजबूत करने में बहुत अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने पार्टी को बूथ स्तर तक बढ़ाने की रणनीति पर काम किया। राष्ट्रीय स्तर से लेकर बूथ स्तर तक पार्टी कार्यकर्ता तैयार किए। एक के बाद एक विधानसभा चुनाव जीतने में शाह की ‘पन्ना प्रमुख’ बनाने की रणनीति काफी कारगार रही।
सोशल इंजीनियिरंग पर काम किया
भाजपा में सोशल इंजीनियरिंग पर शाह ने काफी काम किया है और पार्टी को इससे फायदा भी हुआ। एक जमाने तक जनसंघ और भाजपा को ब्राह्मण और बनियों की पार्टी माना जाता था। जानकार बताते हैं कि शाह यह जानते हैं कि जाति के आधार पर जोर देने वाली पार्टियों का मुकाबला इसी तरह किया जा सकता है। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों में अपने सफल प्रयोग से जाना कि जिन जाति समूहों की सपा और बसपा ने उपेक्षा की उन्हें पार्टी में उचित प्रतिनिधित्व देने का जाति समीकरण भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है।
शाह ने सपा के यादव वोट बैंक और बसपा के जाटव वोट बैंक के खिलाफ गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों का एक नया मतदाता आधार बनाया। उन्होंने बसपा के कई असंतुष्ट नेताओं जैसे बाबू सिंह कुशवाहा, बादशाह सिंह, दद्दन मिश्रा और अवधेश कुमार वर्मा को भाजपा में शामिल किया। ये नेता न केवल अपने समर्थकों को भाजपा में लाए बल्कि समुदाय का समर्थन भी पार्टी के पक्ष में किया।
पीएम मोदी की कई रैलियां आयोजित की
शाह की एक और रणनीति ने भाजपा को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वह थी, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की कई रैलियों को संबोधित करने की रणनीति। एक वरिष्ठ पार्टी नेता ने बताया यह उनकी ही रणनीति थी कि पीएम कई रैलियों को संबोधित कर रहे थे, एक दर्जन से ज्यादा केंद्रीय मंत्री भी यूपी में प्रचार कर रहे थे। शाह ने सपा-कांग्रेस के साथ समानांतर रोड शो और रैलियों की योजना बनाई ताकि वे मतदाताओं के मूड को प्रभावित न कर सकें।
शाह ने इलाहाबाद में ठीक उसी समय तीन घंटे का रोड शो किया, जब अखिलेश और राहुल गांधी एक रोड शो कर रहे थे। उन्होंने वाराणसी में पीएम मोदी के लिए इसी तरह के रोड शो की योजना बनाई जो काफी सफल रही। शाह जानते थे कि पूरे राज्य के लिए एक चुनावी मुद्दा नहीं हो सकता है, इसलिए उन्होंने चुनाव के प्रत्येक चरण के लिए अलग-अलग योजनाओं की योजना बनाई, उन मुद्दों को उठाया जो चुनाव क्षेत्र के लिए विशेष थे।
मिस्ड कॉल देकर भाजपा सदस्य बनाया
नवबंर 2014 की शाम भाजपा मुख्यालय पर काफी गहमागहमी थी। अमित शाह आए और उन्होंने एलान किया कि अब कोई भी भी एक मिस्ड कॉल देकर भाजपा का सदस्य बन सकता है। प्रशंसक और आलोचक सब हैरान थे कि भला एक मिस्ड कॉल से कैसे इस पार्टी का सदस्य बना जा सकता है, लेकिन उस फैसले ने भाजपा की सूरत और ताकत दोनों बदल दी। बाद में भाजपा ने दावा किया कि इस अभियान की बदौलात पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।
उस समय शाह ने विस्तार से सदस्यता अभियान को समझाया और कहा-जिस तरह से 1947 से 1966 तक कांग्रेस का एक ऐसा समय आया था कि कांग्रेस जिसको भी चुनाव में खड़ा करती थी वो जीत जाता था। आने वाले दिनों में भाजपा को भी इतना ही विराट समर्थन मिलने वाला है।
जीत के बाद बैठते नहीं है
भाजपा और आरएसएस को लंबे समय तक कवर कर चुके एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया अमित शाह इस बात को बखूबी जानते हैं कि भाजपा को मजबूत करना है तो उसके कार्यकर्ताओं और उसके सदस्यों की तादाद बढ़ानी होगी। इसके लिए उन्होंने पूरे देश में सदस्यता अभियान की शुरुआत की। वे बताते हैं कि अमित शाह जब भाजपा अध्यक्ष रहे तबसे उनकी पार्टी लगातार चुनावों में जीतती रही। वे चुनाव में भाजपा की भारी जीत के बाद आराम से नहीं बैठते हैं न ही अपने नेताओं को आराम करने का मौका देते हैं। वे 24 घंटे काम करने वाले नेता है। उनके कार्यकाल में भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई, कई राज्यों में उनकी सरकारें बन गईं।
पीएम मोदी को वाराणसी से लोकसभा चुनाव में उतारने का विचार भी शाह का था। उन्हें लगता था कि इससे न केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार के ज्यादातर हिस्सों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि उस वक्त मुरली मनोहर जोशी से वाराणसी से सांसद थे। भाजपा नेताओं की बैठक में अमित शाह ने उन्हें कानपुर से चुनाव लड़ने को कहा। इस पर जोशी हैरान हुए और पूछा तो वाराणसी से कौन लड़ेगा? जोशी को जवाब मिला-नरेंद्र मोदी।