Amit Shah: शाह का राहुल पर तंज, बोले- एक नेता 13 बार लॉन्च हुए, कलावती के लिए आपने क्या किया? पढ़ें बड़ी बातें
शाह ने कहा कि अटलजी देश को दुनिया की 11वीं अर्थव्यवस्था बनाकर गए थे। छह साल में 15वें से 11वें तक लाए। फिर एक अर्थशास्त्री की सरकार आई, वे 11वें से 12वें तक ले गए। फिर मोदी जी आए, सब कहते थे कि वे अर्थव्यवस्था कैसे संभालेंगे। उन्होंने नौ साल में देश की अर्थव्यवस्था को 11वें से पांचवें नंबर पर पहुंचा दिया। मुझे भरोसा है कि फिर से एक बार मोदी जी प्रधानमंत्री बनेंगे और 2027 तक भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे।
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विस्तार
लोकसभा में अमित शाह ने विपक्ष को जमकर घेरा। अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए उन्होंने विपक्ष को जमकर खरीखोटी सुनाई। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस सदन में एक ऐसे नेता हैं, जिन्हें आज तक 13 बार राजनीति में लॉन्च किया गया है और 13 ही बार फेल हुए हैं। उनका एक लॉन्चिंग यहां सदन में हुआ था। एक गरीब मां बुलेंदखंड की थीं। कलावती नाम था। वे उनके घर खाने गए। गरीबी का वर्णन किया। वेदना को यहां बताया। सरकार छह साल चली। वो कलावती का क्या करा? उस कलावती को घर, बिजली, शौचालय, अनाज देने का काम मोदी सरकार ने किया।
अल्पमत का तो सवाल ही नहीं: अमित शाह
उन्होंने कहा कि चर्चा में सरकार के विरोध में कुछ मुद्दे तो रख देते। अल्पमत का तो सवाल ही नहीं है। देश के 60 करोड़ गरीबों को उनके जीवन में नई आशा का संचार अगर किसी ने दिया है तो वह मोदी सरकार ने दिया है। मैं भी देशभर में घूमता हूं, जनता के बीच जाता हूं। जनता के साथ कई जगह से संवाद किया है। कहीं पर भी अविश्वास की पतली झलक भी दिखाई नहीं देती है।
उन्होंने कहा, 'पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूं कि आजादी के बाद कोई एक सरकार पर किसी को जनता पर विश्वास है तो वह मोदी सरकार है। दो तिहाई बहुमत से दो-दो बार एनडीए को चुना गया। पूर्ण बहुमत से दो-दो बार भाजपा को चुना गया। 30 साल बाद पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार देने का काम हमने किया। ये प्रधानमंत्री ऐसे हैं जो आजादी के बाद देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं।
'छुट्टी लिए बगैर 24 घंटे में से 17 घंटे काम करते हैं प्रधानमंत्री मोदी'
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा एक भी छुट्टी लिए बगैर 24 घंटे में से 17 घंटे काम करने वाला कोई प्रधानमंत्री अगर है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। आजादी के बाद सबसे ज्यादा किलोमीटर और सबसे ज्यादा दिन प्रवास करने वाला कोई प्रधानमंत्री है तो वह नरेंद्र मोदी हैं। बरसों सरकार चलती है तो दो-चार निर्णय ही ऐसे होते हैं जो युगों तक याद किए जाते हैं। मोदी सरकार के नौ साल में कम से कम 50 फैसले ऐसे हैं, जो युगांतकारी हैं।
'मोदी जी ने आज तीनों को भारत छोड़ने का नारा दिया'
शाह ने कहा कि आज ही के दिन गांधी जी ने नारा दिया था कि अंग्रेजों भारत छोड़ो। साढ़े नौ साल में मोदी जी ने नए प्रकार के राजनीतिक युग की शुरुआत की। तीस साल से राजनीति भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टीकरण के नासूर से ग्रसित रही। मोदी जी ने पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस को तरजीह दी। मगर फिर भी कहीं दूर तक भ्रष्टाचार भी बैठा है, परिवारवाद दिखाई ही देता है और तुष्टीकरण की राजनीति दिखाई देती है। इसलिए मोदी जी ने आज तीनों को भारत छोड़ने का नारा दिया है।
'एक वोट से गिरी थी अटलजी की सरकार, हमारा वह चरित्र नहीं'
शाह ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव संवैधानिक प्रक्रिया है, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इससे राजनीतिक दलों और पार्टियों के चरित्र उजागर होते हैं। मैं तीन प्रस्तावों का जरूर जिक्र करना चाहूंगा। दो प्रस्ताव हम लेकर आए थे, एक एनडीए सरकार के खिलाफ आया। जुलाई 1993 में नरसिंह राव जी की सरकार थी, अविश्वास प्रस्ताव आया। कांग्रेस का मूल सिद्धांत है येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहना। नरसिंह राव जी की सरकार जीत गई, लेकिन बाद में कई लोगों को जेल की सजा हुई, क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा को घूस देकर यह जीत हासिल की गई।
उन्होंने कहा, '2018 में मनमोहन सिंह जी विश्वास प्रस्ताव लेकर आए, सांसदों को करोड़ों रुपये की घूस देने पड़ी। हमारे सांसद रुपया लेकर सामने आए। उन्होंने सरकार बचा ली। इसके सामने दूसरा उदाहरण है- 1999 का। अटलजी की सरकार के समय अविश्वास प्रस्ताव आया। जो कांग्रेस ने किया, वह हम कर सकते थे। नरसिंह राव जी साबित कर चुके थे कि करोड़ों रुपये देकर सरकार बचाई जा सकती है। अटलजी ने यहीं बैठकर कहा कि संसद के फैसले को सिर पर चढ़ाऊंगा। सिर्फ एक वोट से सरकार गई।'
उन्होंने कहा, 'हम यूपीए और कांग्रेस की तरह सरकार बचा सकते थे। कांग्रेस का चरित्र भ्रष्टाचार का है, हमारा चरित्र वैसा नहीं है। एक ही वोट का फर्क था। एनडीए सरकार ने स्पीकर के पद की गरिमा का भी पालन किया था। हमारी सरकार चली गई। जनता है जो सब देखती है, सब जानती है। एक वोट से हमारी सरकार गई, लेकिन अंत में क्या हुआ? बहुत बड़े बहुमत के साथ अटलजी फिर से देश के प्रधानमंत्री बने। अटलजी के नेतृत्व में तब और मोदी जी के नेतृत्व में हम सिद्धांतों की राजनीति बचाने के लिए यहां हैं।'
शाह ने कहा- हमने कोई रेवड़ी नहीं दी, सर्वे करके फायदा पहुंचाया
शाह ने कहा कि मोदी जी के जेहन में गरीबी का दंश था। वे स्वयं गरीब के घर से आकर देश की सबसे पंचायत में चुने गए थे। जब तक मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं बने, तब तक नौ करोड़ महिलाओं के घर में धुआं था। हमने सिलेंडर भेजा, तब उनका घर धुएं से मुक्त हुआ। कई देशों की आबादी 11 करोड़ से आधी भी नहीं है। 11 करोड़ परिवारों के साथ शौचालय नहीं था। इनका दर्द 55 साल तक यूपीए-कांग्रेस ने नहीं जाना। ये हमेशा बोलते हैं कि हम किसानों का कर्ज माफ करेंगे। मैं पूछना चाहता हूं कि 10 साल में कितना कर्ज माफ किया था? 70 हजार करोड़ ना? इनमें से भी 35 हजार करोड़ बाकी रह गया।
उन्होंने आगे कहा कि हम किसी का कर्ज माफ करने में विश्वास नहीं करते, उसे कर्ज ही न लेना पड़े ऐसी व्यवस्था करते हैं। दो लाख चालीस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा 14 करोड़ किसानों के खाते में जा रहा है। एक ओर 70 हजार करोड़ का कर्ज माफ करने की लॉलीपॉप है, दूसरी तरफ हमारी सम्मान राशि है। एक रेवड़ी नहीं है। हमने एक सर्वे किया। ढाई एकड़ से कम जिसकी जोत है, उसे कितना खर्च आता है खेती में। उसी हिसाब से छह हजार रुपये मोदी जी ने दिया। आपने एक बार किसान को कर्ज मुक्त किया। मोदी जी ने पूरे जीवन के लिए उसे कर्ज मुक्त करने का काम किया है। कोई बीमार पड़े तो पूरा परिवार कर्ज के बोझ के तले दब जाता था। मोदी जी ने 50 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये तक का सारा इलाज मुफ्त किया है।
पहले की यूपीए सरकार को घेरा, मोदी सरकार की सराहना की
शाह ने कहा कि अटलजी देश को दुनिया की 11वीं अर्थव्यवस्था बनाकर गए थे। छह साल में 15वें से 11वें तक लाए। फिर एक अर्थशास्त्री की सरकार आई, वे 11वें से 12वें तक ले गए। फिर मोदी जी आए, सब कहते थे कि वे अर्थव्यवस्था कैसे संभालेंगे। उन्होंने नौ साल में देश की अर्थव्यवस्था को 11वें से पांचवें नंबर पर पहुंचा दिया। मुझे भरोसा है कि फिर से एक बार मोदी जी प्रधानमंत्री बनेंगे और 2027 तक भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे।
पूर्वोत्तर के राज्यों पर कही यह बात
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए काफी अहम कदम उठाए हैं। कांग्रेस के साथी कहते हैं कि हम पूर्वोत्तर राज्यों के लिए कुछ नहीं कर रहे। वहां सिर्फ हिंसा ही हिंसा हो रही है। मैं बताना चाहूंगा कि UPA के समय पूर्वोत्तर राज्य जल रहे थे। हमनें उस पर लगाम लगाने का काम किया है। वहां उग्रवादी घटनाएं कम हुई हैं।
मणिपुर पर कही यह बात
उन्होंने कहा कि मणिपुर में हिंसा का तांडव हुआ। हिंसक घटनाएं हुईं। वहां जो कुछ भी हुआ, वह शर्मनाक है। उस पर राजनीति करना उससे भी ज्यादा शर्मनाक है। यह भ्रांति देश की जनता के सामने फैलाई गई है कि सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं है। मैं यह साफ करना चाहता हूं कि सत्र आहूत होने से पहले मैंने स्पीकर पत्र लिखकर मणिपुर पर चर्चा के लिए कहा था। पहले दिन से मैं यह बात कह रहा हूं। मेरी बात सुनते। अगर मेरी बात से संतुष्ट नहीं होते तो फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगते। आप देश के गृह मंत्री को मणिपुर मामले पर बोलने नहीं देते, यह किस तरह का लोकतंत्र है। मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह को बर्खास्त करने की मांगों पर अमित शाह ने कहा कि जब कोई राज्य का मुख्यमंत्री सहयोग नहीं कर रहा हो तो उसे बदलना पड़ता है। यह सीएम केंद्र के साथ सहयोग कर रहे हैं।
पहले की हिंसा पर किसी पीएम ने कभी जवाब नहीं दिया
शाह ने कहा कि हाईकोर्ट के एक फैसले के कारण मणिपुर घाटी और पहाड़ में बंट गया और वहां मैतई बनाम कुकी के रूप में जातीय हिंसा की शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि साल 1993 में राव सरकार के समय हिंसा में 750 लोग मारे गए। डेढ़ साल तक हिंसा चलती रही। इसके बावजूद इसका जवाब गृह राज्य मंत्री ने दिया। यूपीए सरकार के दौरान 2004 में हुई हिंसा में 1700 लोग मारे गए। सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया, एसआईटी बनी, मगर इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों पर दोनों सदनों में चर्चा तक नहीं हुई।
अब पीएम के बयान पर क्यों अड़ा विपक्ष
शाह ने कहा कि मणिपुर हिंसा मामले में विपक्ष राजनीति कर रहा है। सरकार पहले दिन से चर्चा के लिए तैयार थी। मैंने और राजनाथ सिंह ने बार-बार कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, मगर विपक्ष पीएम के बयान पर अड़ गया। मानसून सत्र की कार्यवाही नहीं चलने दी। जबकि इससे पहले भी बड़ी हिंसा पर कभी पीएम ने बयान नहीं दिया। गृह मंत्री ने भी दूरी बनाई। एक बार तो सदन में कोई चर्चा ही नहीं हुई। इसके बाद भी विपक्ष का पीएम के बयान के लिए अड़ना बताता है कि विपक्ष हिंसा की आग में घी डाल रहा है।
यूपीए के घोटालों की पूरी सूची गिनाई
उन्होंने कहा कि 'यूपीए' अच्छा नाम था। उन्हें गठबंधन का नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? यूपीए 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के घोटालों में शामिल थी। बोफोर्स घोटाला, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, सीडब्ल्यूजी घोटाला, कोयला घोटाला, आदर्श घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला, वाड्रा का डीएलएफ घोटाला, चारा घोटाला... इन सब में कौन शामिल था? उनके पास गठबंधन का नाम बदलने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। हमें अपना नाम बदलने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम किसी घोटाले में शामिल नहीं हैं। एनडीए सरकार ने देश को एक स्थिर सरकार दी है।
यह बाते भी कहीं
- लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी सरकार ने कुछ ऐतिहासिक फैसले लिए और वंशवाद एवं भ्रष्टाचार को खत्म किया। यूपीए का चरित्र सत्ता की रक्षा करना है लेकिन एनडीए सिद्धांत की रक्षा के लिए लड़ता है।
- उन्होंने कहा कि यह समझना होगा कि वे (UPA) जनधन योजना का विरोध क्यों कर रहे थे? पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि जब केंद्र से 1 रुपया भेजा जाता है, तो लाभार्थी तक केवल 15 पैसे ही पहुंचते हैं... लेकिन आज, आज पूरी राशि गरीबों तक पहुंचती है।
- मोदी सरकार द्वारा उठाए गए आंतरिक सुरक्षा उपायों पर केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमने देश में पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया और देश में 90 से अधिक स्थानों पर छापे मारे। लंदन, ओटावा और सैन फ्रांसिस्को में हमारे दूतावसों पर हमलों से संबंधित मामले एनआईए को सौंप दिए गए। 26/11 तहव्वुर हुसैन राणा को भी जल्द ही भारत में न्यायपालिका का सामना करना पड़ेगा।
- अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने कश्मीर को आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए लगातार काम किया है। हम हुर्रियत, जमीयत और पाकिस्तान से नहीं, बल्कि कश्मीर घाटी के युवाओं से बात करेंगे।
- आतंकवाद और नक्सलवाद पर अंकुश लगाने के लिए मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सली अब सिर्फ 3 जिलों तक ही सीमित रह गए हैं।