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पोर्ट ब्लेयर: गृहमंत्री शाह बोले- हम सत्ता के लिए राजनीति में नहीं आए, भाजपा की स्थापना भारत को महान बनाने के लिए हुई

Sat, 16 Oct 2021 06:00 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट ब्लेयर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पोर्ट ब्लेयर Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 16 Oct 2021 06:00 PM IST
सार

शाह ने कहा कि मोदी जी ने एक नई कार्यसंस्कृति बनाई है, मोदी जी ही भूमिभूजन करते हैं और मोदी जी ही उसका उद्घाटन करते हैं।

 

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Amit Shah in Andaman: No leader had patriotism like Savarkar, did not change opinion even in adverse situations
पोर्ट ब्लेयर में संबोधित करते गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : ANI

विस्तार

गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को पोर्ट ब्लेयर में भाजपा कार्यकर्ताओं व प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए कहा कि हम सत्ता के लिए राजनीति में नहीं आए हैं। हम विचारधारा से बंधे हुए लोग हैं और हमारी पार्टी की स्थापना ही महान भारत की स्थापना के लिए हुई है। उन्होंने क्रांतिकारी वीर सावरकर को महान देशभक्त बताया।

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शाह ने कहा कि यदि देश के 130 करोड़ लोग आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में छोटे-छोटे संकल्प लें तो बहुत बड़ा परिवर्तन देश में आ सकता है। भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए यह संकल्प लेने का वर्ष है,क्योंकि हमारी पार्टी की स्थापना ही महान भारत की स्थापना के लिए हुई है। शाह ने भाजपा कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि यह साल संकल्प लेने का है। हमारी पार्टी की स्थापना भारत को महान बनाने के लिए हुई है। हम उन लोगों में से नहीं हैं, जो सत्ता पाने के लिए राजनीति में आए हैं। हम विचारधारा से जुड़े हैं। हमारी विचारधारा 'महान भारत' का निर्माण है। अगर हम हमारा जीवन देश के लिए जिए, हमारे जीवन की समस्त गतिविधियों को देश के साथ जोड़ के देखें और देश की छोटी-छोटी समस्याओं को दूर करने के लिए हम गिलहरी की तरह योगदान कर लें तो देश को महान बनने से कोई नहीं रोक सकता।
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गृह मंत्री ने कहा, 'मैंने छोटी उम्र से वीर सावरकर जी को पढ़ा है। मेरे हृदय में हमेशा उनके लिए खास स्थान। उनके लिए अनन्य भक्ति भाव रहा है। मैं मन से मानता हूं कि इतनी उत्कृष्ट राष्ट्रभक्ति ईश्वर ने शायद ही किसी व्यक्ति के दिलों-दिमाग में दी होगी जितनी वीर सावरकर जी में थी। मुश्किल परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी राय नहीं बदली और समाज के विरोध का सामना करते हुए भी उसे खुले तौर पर पेश किया। उनका जैसा साहस था, वह बहुत कम लोगों में होता है।'
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गृह मंत्री शाह ने कहा कि कांग्रेस के समय एक सरकार सोचती थी, दूसरी सरकार योजना बनाती थी, तीसरी सरकार टेंडर निकालती थी, चौथी सरकार काम शुरू करती थी और पांचवीं सरकार उसका उद्घाटन करती थी। मोदी जी ने एक नई कार्यसंस्कृति बनाई है, मोदी जी ही भूमिभूजन करते हैं और मोदी जी ही उसका उद्घाटन करते हैं।

सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस को भी किया याद
केद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल को उतना सम्मान नहीं मिला, जितना उन्हें मिलना चाहिए था। अगर रियासतों को जोड़ने का काम सरदार पटेल जल्दी नहीं करते, तो क्या भारत का असित्व होता। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के नायकों के साथ कभी भी इंसान नहीं किया गया। शाह ने कहा कि अंडमान-निकोबार की आबोहवा में वीर सावरकर और सुभाष चंद्र बोस की आत्मा बसती हैं। इनके बलिदान की वजह से ही आज यह देश है। इनके बिना हम भारत की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।


राजनाथ सिंह के दावे से शुरू हुआ सावरकर विवाद
बीते दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्रांतिकारी वीर सावरकर को लेकर दावा किया था कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कहने पर सावरकर ने दया याचिका दायर की थी। उनके इस दावे के बाद देशभर में बहस छिड़ गई है। कांग्रेस समेत कई दलों के नेता राजनाथ सिंह के बयान को गलत बता रहे। इस बीच सावरकर की जीवनी लिखने वाले इतिहासकार डॉ. विक्रम संपत ने अपनी पुस्तक का हवाला देते हुए कई दावे पेश किए हैं। डॉ. संपत ने अपनी किताब 'सावरकर' में लिखा है, '1920 में जब सावरकर जेल में बंद थे, तब गांधी जी ने उन्हें दया याचिका दायर करने की सलाह दी थी। यही नहीं, दया याचिका के लिए केस भी खुद गांधी जी ने तैयार किया था।'

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