फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Amit Shah and Rahul Gandhi fought a battle in Parliament monsoon session

अमित शाह और राहुल गांधी ने संसद परिसर में लड़ी एक लड़ाई

Mon, 23 Jul 2018 10:18 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Mon, 23 Jul 2018 10:18 PM IST
विज्ञापन
Amit Shah and Rahul Gandhi fought a battle in Parliament monsoon session
अमित शाह-राहुल गांधी
संसद का मानसून सत्र पहले ही दिन से राजनीति के नए रंग में आ गया। पिछले चार दिन में विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के बहाने इसने राजनीति के कई रंग दिखाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जहां कांग्रेस पार्टी की हर रणनीति की हवा निकालने की तौयारी की, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी नए कलेवर के साथ सामने आए। फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष अपनी पार्टी के नेताओं के साथ राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को लेकर आक्रामक हैं, वहीं भाजपा इस मुद्दे पर खुलकर आने से बच रही है। 
विज्ञापन


अविश्वास प्रस्ताव 

लोकसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने अन्य सहयोगी दलों के साथ संसद के मानसून सत्र को चलाने में सहयोग देने का निर्णय ले लिया था। विपक्षी एकता को साबित करने और सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस इसे अच्छे अवसर के रूप में भुनाने की रणनीति पर थी। भीड़ द्वारा लोगों की हत्या, महिला आरक्षण, तीन तलाक जैसे तमाम जटिल मुद्दे भी थे। सूत्र बताते हैं इसमें सरकार को घेरने के लिए अविश्वास प्रस्ताव भी बड़ा हथियार था।
विज्ञापन


सूत्र बताते हैं कि बिलों को मंजूरी दिलाने, विपक्ष के एकता की धार भोथरी करने और सरकार का इकबाल बुलंद रखने को केन्द्र में रखकर सत्ता पक्ष भी संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही को चलाने के लिए विपक्ष के साथ सहयोग का रुख रखने के पक्ष में था। अविश्वास प्रस्ताव इसके लिए सत्ता पक्ष के पास भी बड़े हथियार की तरह था, क्योंकि सरकार के पास संख्याबल की कोई चिंता नहीं थी। लिहाजा संसद का मानसून सत्र आरंभ होते ही पहले दिन टीडीपी द्वारा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न देने के केन्द्र में रखकर लाया गया अविश्वास प्रस्ताव मंजूर हो गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


चले दांव प्रति दांव 

कांग्रेस पार्टी की उम्मीद पर तब पानी फिर गया जब उसे टीडीपी के अविश्वास प्रस्ताव के मंजूर होने की सूचना लोकसभा अध्यक्ष से मिली। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने टीडीपी के प्रस्ताव को मंजूर करते चर्चा के लिए सरकार के तैयार होने का पक्ष रखा। बताते हैं यह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का बड़ा दांव था। कांग्रेस पार्टी के सदन में नेता मल्लिकार्जुन खडग़े खड़े हुए, अपने अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस देने का हवाला भी दिया, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देकर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी।

कांग्रेस पार्टी चाहती थी कि अविश्वास प्रस्ताव उसकी नोटिस पर मंजूर हो। ताकि कांग्रेस पार्टी के नेता चर्चा की शुरूआत कर सकें। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दूसरा दांव भी चला। विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पर 10 दिन के भीतर चर्चा शुरू कराने की इच्छा जाहिर की। लेकिन बताते हैं कि भाजपा अध्यक्ष ने चर्चा को दो दिन बाद ही 20 जुलाई को शुरू कराने की रणनीति बनाई। संसदीय कार्यमंत्री ने इस प्रस्ताव से लोकसभा अध्यक्ष को सूचित किया और दो दिन बाद 20 जुलाई को चर्चा प्रस्तावित हो गई। 

मोदी बनाम राहुल

भाजपा की मंशा है कि 2019 का लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी बनाम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हो। इसके पीछे टीम अमित शाह का तर्क है कि प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व के आगे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का व्यक्तित्व कहीं नहीं ठहरता। यह राजनीति के तुरुप का इक्का था कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा टीडीपी शुरू करेगी, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव का स्वरुप मोदी सरकार बनाम कांग्रेस बने। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बनाम कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इसके केन्द्र में रहें। 

कांग्रेस पार्टी और भाजपा दोनों का यहां लक्ष्य एक था। कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार आगामी लोकसभा चुनाव को प्रधानमंत्री मोदी बनाम राहुल ही देखना चाहते हैं। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में लिए गए निर्णय से भी यह साफ हो चुका है। पार्टी के रणनीतिकार यह भी चाहते थे कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा भले ही टीडीपी शुरू करा रही है, लेकिन इसका स्वरुप प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनाम राहुल गांधी ही बने।

इसके लिए यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में रणनीति बनी। लोकसभा में सदन के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्यसभा में नेता गुलाम नबी आजाद, उपनेता आनंद शर्मा, कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मिलकर रणनीति बनानी शुरू कर दी। 

सबकुछ अप्रत्याशित रहा

अविश्वास प्रस्ताव के दिन फ्लोर प्रबंधन में माहिर संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार संख्याबल को लेकर निश्चिंत थे, वहीं अमित शाह पूरी सतर्कता के साथ संसद भवन परिसर में थे। शाह और प्रधानमंत्री ने खुद सहयोगी दलों से समर्थन के लिए पहल की थी। सोनिया गांधी ने भी इसके लिए काफी प्रयास किया था। म.प्र. भाजपा अध्यक्ष और सांसद ने अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में सरकार का पक्ष रखना शुरू किया। यह प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की राय से हुआ।

वित्त मंत्री अरुण जेटली की अनुपस्थिति में गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भी बड़ी जिम्मेदारी मिली। वाकपटु, कुशल वक्ता राजनाथ सिंह ने इसे बखूबी निभाया भी। हालांकि राकेश सिंह का संबोधन मध्य प्रदेश (म.प्र.) सरकार के गुणगान पर ज्यादा ही केन्द्रित हो गया। कुछ पार्टी के नेताओं का मानना है कि शुरूआत में विपक्ष पर ढंग से दबाव नहीं बन सका।

अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में बारी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की थी। राहुल गांधी ने इस अंदाज में पहला भाषण दिया। कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर भी पहली बार बोले। पहले से तय रणनीति के तहत वे बेहद आक्रामक रहे। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने आरोपों की जद में पहले रक्षा मंत्री को लिया, कुछ प्रमुख मुद्दों को छूते हुए वह सीधे प्रधानमंत्री पर हमलावर हो गए। भाजपा के रणनीतिकारों को इसका अंदाजा भी नहीं था।

यहां तक कि संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी कई अवसर पर असमंजस की स्थिति में आ गई। अंत में कांग्रेस अध्यक्ष ने परंपरा के विपरीत प्रधानमंत्री से गले लिपटकर प्रधानमंत्री सहित पूरे सदन को आश्चर्य में डाल दिया। 

राहुल बनाम सरकार

कांग्रेस अध्यक्ष के बोलने के बाद 20 जुलाई के दोपहर बाद की स्थिति राहुल बनाम सरकार में बदल गई। प्रधानमंत्री, संसदीय कार्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की रणनीति के मुताबिक संसद भवन परिसर में ही कई विभागों के मंत्री सफाई देने, राहुल गांधी को अपरिपक्व करार देने जैसे बयान पर आ गए। कांग्रेस पार्टी ने भी स्थिति की गंभीरता को समझा।

पार्टी के वरिष्ठ नेता पीएल पूनिया और मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला को राफेल विमान सौदे के जरिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रधानमंत्री के प्रति आक्रामक होने की जिम्मेदारी सौंपी। बसपा के राज्यसभा में वरिष्ठ सांसद के अनुसार यह अविश्वास प्रस्ताव राहुल गांधी बनाम नरेन्द्र मोदी हो गया। 21 जुलाई की मीडिया में न केवल दोनों की रिपोर्ट होगी, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के भाषण की स्क्रिप्ट बदलवा दी। 

प्रधानमंत्री मोदी बनाम राहुल गांधी  

देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने आए। उनके संबोधन में कांग्रेस अध्यक्ष के भाषण, आरोप का असर साफ दिखाई दिया। पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष के हर आरोप की प्रधानमंत्री ने हवा निकालने की कोशिश की। कांग्रेस अध्यक्ष के पास आने, गले लगने, सीट पर वापस जाने और अपने सहयोगी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को आंख मारने जैसे हालात को अपने अंदाज में बयां किया।

लेकिन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 126 के मुकाबले 325 सांसदों का समर्थन पाने के बाद भी राजनीतिक वातावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाम राहुल बना हुआ है। कांग्रेस पार्टी इस नये बदलाव को बड़ी सफलता के रूप में देख रही है। पार्टी के रणनीतिकारों को लग रहा है कि उसके नेता ने लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ खड़े होने का बिगुल बजा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed