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Railways: देश में बढ़ती रेल दुर्घटनाओं के बीच रेलवे का दावा- 10 साल में 60% घटे हादसे; इन वजह से आई है कमी
Thu, 05 Dec 2024 02:51 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 05 Dec 2024 02:51 PM IST
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Amar Ujala
विस्तार
देश में बीते कुछ महीनों से रेल दुर्घटनाओं के कई मामले में सामने आए है। इनमें ज्यादातर घटनाएं ट्रेन के पटरी से उतरने की सामने आई है। जो ट्रैक के रखरखाव में कमी और बुनियादी ढांचे की गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर रहती हैं। इस बीच रेल मंत्रालय ने पिछले दस सालों की स्थिति को लेकर आंकड़े जारी किए है। रेलवे का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में रेलवे दुर्घटनाओं में 60 फीसदी की कमी आई है। मंत्रालय ने इसे सुरक्षा उपायों का परिणाम बताया है।रेलवे की तरफ से जारी किए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 सालों में रेल दुर्घटनाओं में कमी आई है। 2004 से 2014 के बीच औसतन हर साल 171 ट्रेन दुर्घटनाएं होती थीं। जो 2014 से 2024 के बीच घटकर 68 प्रतिवर्ष हो गई हैं। दुर्घटनाओं में यह कमी अलग-अलग सुरक्षा उपायों और तकनीकी सुधारों के कारण संभव हुई है।
रेलवे ने बताया कि, पटरी से उतरना, टकराव, उपकरणों की विफलता और मानवीय कमियां दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण रहे हैं। वर्ष 2014-15 में जहां 135 ट्रेन दुर्घटनाएं हुई, वहीं 2023-24 में ये आंकड़ा घटकर 40 रह गया। दुर्घटनाओं के प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर पर दुर्घटना दर भी 0.11 से घटकर 0.03 हो गई है जो सुरक्षा में बड़े सुधार का प्रतीक माना जा है।
वर्ष 2004 से 2014 के बीच रेल दुर्घटनाओं में 904 लोगों की मौत हुई थी। जबकि 3155 लोग घायल हुए थे। वहीं 2014-2024 के बीच यह संख्या घटकर 748 मौतों और 2087 घायलों तक सीमित रह गई है। रेलवे के यह आंकड़े दर्शाते हैं कि यात्री सुरक्षा में सुधार हुआ है और हताहतों की संख्या में 60 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
रेल मंत्रालय ने बताया कि, पिछले वर्षों में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें आधुनिक तकनीक का उपयोग, ट्रैक मरम्मत, ट्रेनों में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम और उपकरणों की उन्नति जैसे उपाय शामिल हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भविष्य में रेल यातायात को और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए नई योजनाएं बनाई जा रही हैं। इनमें ट्रैक निरीक्षण के लिए ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली जैसी योजनाएं शामिल है।