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Trademark Infringement: अमेरिकी कंपनी पर भारी पड़ा पुणे का 'बर्गर किंग', 13 साल से चली आ रही नाम की लड़ाई जीती

Mon, 19 Aug 2024 01:23 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 19 Aug 2024 01:23 AM IST
सार

पुणे के जिला न्यायाधीश सुनील वेदपाठक ने 16 अगस्त को दिए आदेश में कहा है कि पुणे का 'बर्गर किंग' अमेरिकी बर्गर कंपनी के भारत में दुकान खोलने से पहले से ही काम कर रहा था। अमेरिकी कंपनी यह साबित करने में विफल रही है कि पुणे के बर्गर किंग ने उसके ट्रेडमार्क का उल्लंघन किया है। 

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American multinational company loses legal battle over name of Pune Burger King restaurant
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी बर्गर किंग पर महाराष्ट्र के पुणे में इसी नाम से चल रहा रेस्टोरेंट भारी पड़ गया। 2011 से चली आ रही दोनों के बीच 'नाम की लड़ाई' में पुणे बर्गर किंग रेस्टोरेंट ने 13 साल पुरानी कानूनी लड़ाई जीत ली है और मल्टीनेशनल कंपनी को हार का सामना करना पड़ा, क्योंकि यहां की एक जिला अदालत ने अमेरिकी कंपनी द्वारा ट्रेडमार्क उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दायर किए गए मुकदमे को खारिज कर दिया है। पुणे के बर्गर किंग फूड ज्वाइंट के मालिक अनाहिता ईरानी और शापूर ईरानी के खिलाफ दायर मुकदमे में 20 लाख रुपये के मुआवजे की भी मांग की गई है।

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पुणे के जिला न्यायाधीश सुनील वेदपाठक ने 16 अगस्त को दिए आदेश में कहा है कि पुणे का 'बर्गर किंग' अमेरिकी बर्गर कंपनी के भारत में दुकान खोलने से पहले से ही काम कर रहा था। अमेरिकी कंपनी यह साबित करने में विफल रही है कि पुणे के बर्गर किंग ने उसके ट्रेडमार्क का उल्लंघन किया है। इसके साथ ही अदालत ने अमेरिकी कंपनी बर्गर किंग कॉर्पोरेशन द्वारा दायर 2011 के मुकदमे को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रेडमार्क के उल्लंघन, ट्रेडमार्क को उनके स्वामित्व में देने, साथ ही मौद्रिक क्षति पर रोक लगाने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई थी।
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अदालत ने कहा कि बर्गर किंग कॉर्पोरेशन ने वर्ष 2014 से भारत में अपने ट्रेडमार्क बर्गर किंग के तहत रेस्तरां के माध्यम से सेवाएं शुरू की थीं और भारत में कंपनी ने पहला रेस्तरां 9 नवंबर 2014 को नई दिल्ली में खोला था। जबकि, पुणे का रेस्टोरेंट बर्गर किंग 1991-92 से सेवाएं दे रहा है। वादी द्वारा दी गई दलीलें इस बारे में पूरी तरह बेबुनियाद हैं कि प्रतिवादियों द्वारा अपने रेस्टोरेंट में ट्रेडमार्क बर्गर किंग के उपयोग के कारण ग्राहक भ्रमित हुए हैं। 

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बर्गर किंग कॉर्पोरेशन यह साबित करने में बुरी तरह विफल रही है कि पुणे में रेस्टोरेंट चलाते समय यहां के भोजनालय ने उसके ट्रेडमार्क बर्गर किंग का उल्लंघन किया था। चूंकि वादी कंपनी के ट्रेडमार्क के उल्लंघन और उससे हुई वास्तविक क्षति के बारे में कोई सबूत नहीं था, इसलिए अमेरिकी कंपनी किसी भी नुकसान की हकदार नहीं है।

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