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अमेरिका ने बताया राम सेतु का अस्तित्व : राजनीति में  मचा घमासान

Thu, 14 Dec 2017 01:32 AM IST
शशिधर पाठक / नई दिल्ली
शशिधर पाठक / नई दिल्ली Updated Thu, 14 Dec 2017 01:32 AM IST
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America told the existence of Ram Setu
ram setu - फोटो : Wikipedia
केन्द्र सरकार राम सेतु नहीं तोड़ेगी। केन्द्रीय भूतल परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी अपनी इस घोषणा के प्रति कटिबद्ध हैं। नितिन गडकरी की यह घोषणा अमेरिका के भूगर्भ वैज्ञानिकों द्वारा राम सेतु का अस्तित्व स्वीकारने के बाद आई है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में राम सेतु के दावे को सच बताया है। कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि वैज्ञानिकों ने इसके अस्तित्व की पुष्टि कर दी है। इसके अस्तित्व को चुनौती देने वाले गलत साबित हुए हैं। इसके बाद इस मुद्दे को लेकर राजनीति में घमासान तेज हो गया।
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गृहराज्य मंत्री किरण रिजजू ने भी रामसेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों को आईना दिखाया। अमेरिका के आर्कियोलॉजिस्टों ने अपनी रिपोर्ट में रामसेतु को सुपर ह्यूमन क्रियेशन माना है। वह इसकी आयु को करीब सात हजार साल के करीब मान रहे हैं। उनका कहना है कि रामसेतु के नीचे प्राकृतिक चट्टाने हैं और इसके ऊपर पत्थर लाकर रखे गए हैं।
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भाजपा दिल में बसे राम देख लेती तो.....

सरकार के मंत्रियों के वार पर कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने पलटवार किया है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सरकार के वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्री को राम पर बोलने के लिए अंग्रेजी का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्हें हिन्दी में शब्द नहीं मिल रहे हैं। सुरजेवाला ने कहा कि राम कण-कम में हैं। रोम-रोम में हैं। अखंड हैं। राम पूरे ब्रह्मांड में हैं। राम अनंत हैं। 

क्या था राम सेतु का मामल

America told the existence of Ram Setu
ram setu
सुरजेवाला ने कहा कि आप मूर्ति में राम को ढूंढ सकते हैं, क्योंकि आस्था का विषय है, लेकिन अच्छा होता कि भाजपा गुजरात के दिलों में छिपे राम, मारे गए 14 पाटीदार नौजवानों तथा झूठे मुकदमें में फंसाए गए 20 हजार पाटीदारों के दिल में छिपे राम, दलितों, गरीबों, किसानों के राम को भाजपा नेता देख लेते तो उन्हें हर रोज नये मुद्दे नहीं गढऩे पड़ते। सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा भटका रही है। वह मुद्दों पर नहीं आ रही है। वह विकास की बात नहीं कर रही है। वह केवल नये मुद्दे गढ़ने में लगी है।


रामसेतु को लेकर यूपीए सरकार के समय में बड़ी हलचल थी। एक समय ऐसा था जब यूपीए-1 सरकार में रामसेतु के मुद्दे पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इसे तोड़े जाने या न जोड़े जाने की नौबत आई। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में इस बैठक के दौरान तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री प्रणब मुखर्जी को हस्तक्षेप करना पड़ा था। तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री टीआर बालू (डीएमके कोटे से) इससे स्तब्ध रह गए थे। इसके बाद सरकार ने इस पूरे प्रकरण पर अपना स्टैंड बदल लिया था। तब से आज तक राम सेतु के नाम से पहचानी जाने वाली इस संरचना को लेकर केन्द्र सरकार हमेशा संवेद्रशील रही।

क्यों आया टूटने का प्रस्ताव?

मालवाहक जहाजों तथा नौसेना के जहाजों को रामसेतु के कारण काफी लंबा रूट तय करना पड़ता है। नौसेना से जुड़े सूत्र बताते हैं कि भारी जहाज इसके ऊपर से गुजराने के बाद उसकी पेंदी के रामसेतु की चट्टानों से टकराने या जहाज के फंसने का खतरा बना रहता है। नौसेना के तत्कालीन रीअर एडमिरल ने निजी बातचीत में बताया था कि इसके चलते भारी जहाजों या माल से लदे जहाजों को इस क्षेत्र से ले जाने में संकोच किया जाता है। समझा जा रहा है कि जहाजरानी मंत्रालय और नौसेना की रिपोर्ट आदि को देखते हुए तत्कालीन केन्द्र सरकार ने रामसेतु की थोरियम से बनी चट्टानों को हटाने पर विचार करना शुरू किया था। बताते हैं रामसेतु की चट्टानें काफी मजबूत स्थिति में हैं। इन्हें तोड़ना इतना आसान नहीं है। हालांकि इसके आस्था से जुड़े होने के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
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