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कोरोना में मरीजों को दोहरी मार, 3,000 रुपये प्रति किलोमीटर चार्ज कर रही एंबुलेंस

Mon, 20 Jul 2020 01:35 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 20 Jul 2020 01:35 PM IST
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Ambulance operators are looting in the name of coronavirus charging 10000 rs for 10 kilometer distance
एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला

कोरोना काल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से आपदा को अवसर बनाने की अपील की, लोगों से कहा गया है कि वो निराश ना हो और इस आपदा में नए अवसर तलाश सकते हैं। लेकिन कुछ लोग प्रधानमंत्री मोदी की इस बात का गलत मतलब निकाल रहे हैं। 

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कोरोना के दौरान कई ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जिसमें मरीजों से 10-15 किलोमीटर के लिए एंबुलेंस का 10,000-30,000 रुपये तक का चार्ज लिया जा रहा है। हालांकि कुछ राज्यों ने एंबुलेंस का खर्चा तय कर दिया है लेकिन इसके बाद भी कुछ ऑपरेटर्स इस आपदा के समय में कमाई के अवसर ढूंढ रहे हैं।

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मुंबई में 10-15 किलोमीटर के लिए चार्ज किए 30,000 रुपये

मुंबई में जब कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे थे तब एंबुलेंस ऑपरेटर की ओर से कोरोना मरीजों से हजारों में भरपाई की गई। उस वक्त कोरोना मरीजों से 10-15 किलोमीटर के लिए 30,000 रुपये वसूलने जैसी शिकायतें सामने आईं, यानि कि कोरोना मरीज से एक किलोमीटर के लिए तीन हजार रुपये वसूले जा रहे थे।

इन शिकायतों के बाद महाराष्ट्र की सरकार ने इस मुद्दे में दखल दिया लेकिन उसके बाद भी जून महीने के आखिर में पुणे में एक कोविड-19 मरीज से सात किलोमीटर के लिए आठ हजार रुपये वसूले गए। 

बंगलुरू में छह किलोमीटर के लिए 15,000 रुपये
कई राज्यों और जिलों से इस तरह की शिकायतें सुनने को मिलीं। बंगलुरू में एक शख्स ने अपनी 54 वर्षीय मां को निजी अस्पताल में भर्ती करने के लिए एंबुलेंस का 15,000 रुपये का भुगतान किया, हालांकि ये दूरी छह किलोमीटर से भी कम थी। इसके अलावा कोलकाता में भी मरीजों से पांच किलोमीटर तक ले जाने के लिए छह से आठ हजार रुपये तक वसूले गए।

एंबुलेंस की कमी का फायदा उठा रहे ऑपरेटर्स

ऐसी कई खबरें सामने आईं कि एंबुलेंस की कमी की वजह से कई कोरोना मरीजों की मौत हो गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि प्रति एक लाख की आबादी पर कम से कम एक एबुलेंस होनी चाहिए। लेकिन बंगलुरू में 1.4 लाख की आबादी पर एक एंबुलेंस है और इसका नकारात्मक असर कोरोना काल के दौरान देखने को मिला। 

ज्यादातर राज्यों में निजी संचालकों ने एंबुलेंस की किराया बढ़ा दिया है। कोरोना से पहले झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य प्रति किलोमीटर का दस रुपये वसूलते थे लेकिन अब एक किलोमीटर का 13 रुपये वसूल रहे हैं। झारखंड में मारुति वैन एंबुलेंस दस किलोमीटर का पांच सौ रुपये लेती थी लेकिन अब 900 रुपये लेती है।

इसके अलावा बिहार में भी एंबुलेंस के किराए का पांच से दस गुना ज्यादा वसूला जा रहा है। यही नहीं पुणे में किराया तय करने के बाद भी ज्यादा वसूली की जा रही है। पश्चिम बंगाल में तीन सौ किलोमीटर की दूरी के लिए 1.4 लाख रुपये वसूलने का मामला सामने आया था।

हालांकि आरटीओ से शिकायत करने के बाद पी़ड़ित को एक लाख रुपया लौटा दिया गया था लेकिन उस एंबुलेंस का ऑपरेटर फरार है।

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किस राज्य में मुफ्त एंबुलेंस की सुविधा

देश में कुछ राज्य ऐसे भी हैं जो कोरोना मरीजों को मुफ्त एंबुलेंस सेवा मुहैया करा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, केरल और गोवा जैसे राज्यों में सरकारी एंबुलेंस की मदद से मुफ्त में मरीजों को अस्पताल ले जाया जा रहा है। इधर उड़ीसा में सरकार ने निजी अस्पतालों के साथ समझौता किया ताकि मरीजों को मुफ्त में एंबुलेंस की सुविधा दी जा सके।

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