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अमर उजाला पोल: 83 फीसदी ने माना सहारनपुर जैसी घटनाएं राज्य के विकास में रुकावट
amarujala.com- Presented by: अकरम
Updated Thu, 25 May 2017 07:39 PM IST
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सहारनपुर में करीब डेढ़ माह से रुक-रुक कर जातीय संघर्ष की घटनाएं हो रही हैं। जिन दलितों के घर जलाए गए उनका कहना है कि ऐसा लग रहा है जैसे 'दलित' नाम से कुछ लोगों को नफरत हो गई हो।
इन घटनाओं पर नजर डालें तो लग रहा है कि जैसे यूपी में दलितों के दुश्मन फिर पनपने लगे हैं। वहीं, सहारनपुर में दलितों से लगातार हिंसा और निर्दोष दलित युवाओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने के विरोध में दलित समाज की महिलाओं ने डीएम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि झूठे मुकदमों में जेल भेजकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
इसी मुद्दे पर अमर उजाला ने पाठकों की राय जानने के लिए पोल किया। पोल में सवाल किया गया कि क्या आप मानते हैं कि यूपी के सहारनपुर में हो रहे जातिवाद संघर्ष जैसी घटनाएं राज्य के विकास में रुकावट बनती हैं? इस सवाल पर लोगों ने अपनी राय का खुलकर इजहार किया।
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पोल में कुल 14065 पाठकों ने हिस्सा लिया। सबसे ज्यादा 82.85 फीसदी (11615) पाठक मानतें हैं कि यूपी के सहारनपुर में हो रहे जातिवाद संघर्ष जैसी घटनाएं राज्य के विकास में रुकावट बनती हैं? वहीं, 15.49 फीसदी (2179) पाठक इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। इसके अलावा 1.93 फीसदी (271) पाठकों ने इस सवाल का जवाब देने में असमर्थता जताई।
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इन घटनाओं पर नजर डालें तो लग रहा है कि जैसे यूपी में दलितों के दुश्मन फिर पनपने लगे हैं। वहीं, सहारनपुर में दलितों से लगातार हिंसा और निर्दोष दलित युवाओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने के विरोध में दलित समाज की महिलाओं ने डीएम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि झूठे मुकदमों में जेल भेजकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
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इसी मुद्दे पर अमर उजाला ने पाठकों की राय जानने के लिए पोल किया। पोल में सवाल किया गया कि क्या आप मानते हैं कि यूपी के सहारनपुर में हो रहे जातिवाद संघर्ष जैसी घटनाएं राज्य के विकास में रुकावट बनती हैं? इस सवाल पर लोगों ने अपनी राय का खुलकर इजहार किया।
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पोल में कुल 14065 पाठकों ने हिस्सा लिया। सबसे ज्यादा 82.85 फीसदी (11615) पाठक मानतें हैं कि यूपी के सहारनपुर में हो रहे जातिवाद संघर्ष जैसी घटनाएं राज्य के विकास में रुकावट बनती हैं? वहीं, 15.49 फीसदी (2179) पाठक इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। इसके अलावा 1.93 फीसदी (271) पाठकों ने इस सवाल का जवाब देने में असमर्थता जताई।