Amarnath yatra: 'छोटी मिसाइल' व 'ड्रोन' अटैक रोकने का फुलप्रूफ प्लान, हिफाजत करेंगे CAPF के 50000 जवान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर यात्रा रूट की सुरक्षा का फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है। वे खुद जम्मू में सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद अमरनाथ यात्रा के रूट पर 'छोटी मिसाइल' और 'ड्रोन' से बम गिराना, ये दो बड़े संभावित खतरे बताए जा रहे हैं। इस तरह के हमलों को रोकने और यात्रा रूट की हिफाजत के लिए सीएपीएफ के 50000 जवानों को तैनात किया जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में तीन जुलाई से अमरनाथ यात्रा प्रारंभ हो रही है। इस बार भी अमरनाथ यात्रा पर पाकिस्तान के दशहतगर्दों की बुरी नजर है। खुफिया इकाई को जो अलर्ट मिल रहे हैं, उनके मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में लगभग '50' पाकिस्तानी दहशतगर्द छिपे हैं। साथ ही पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों के जम्मू-कश्मीर में मौजूद 'मुखौटे' समूहों के करीब दो दर्जन लोकल आतंकी भी सक्रिय हैं। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर यात्रा रूट की सुरक्षा का फुलप्रूफ प्लान तैयार किया है। वे खुद जम्मू में सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद अमरनाथ यात्रा के रूट पर 'छोटी मिसाइल' और 'ड्रोन' से बम गिराना, ये दो बड़े संभावित खतरे बताए जा रहे हैं। इस तरह के हमलों को रोकने और यात्रा रूट की हिफाजत के लिए सीएपीएफ के 50000 जवानों को तैनात किया जा रहा है। फिदायीन अटैक को कैसे रोका जाए, इसे लेकर भी सुरक्षा बलों को जरुरी दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
बता दें कि इससे पहले अमरनाथ यात्रा को लेकर नई दिल्ली स्थित नॉर्थ ब्लॉक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बैठक लेते थे। इस बार वे खुद जम्मू कश्मीर पहुंचे हैं। उन्होंने 29 मई को जम्मू के राजभवन में एक अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की है। इसमें जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्य सचिव, डीजीपी, सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ और खुफिया एजेंसियों के बड़े अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान बताया गया कि इस बार अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए लगभग 50 हजार सीएपीएफ जवान तैनात होंगे। इनके अलावा भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान भी रहेंगे। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की सर्वाधिक कंपनियां, अमरनाथ यात्रा के रूट पर तैनात रहेंगी। लगभग 220 कंपनियों को वहां तैनात किया जाएगा। हालांकि 100 से अधिक कंपनियां, पहले से ही जेएंडके में तैनात हैं।
डीजी सीआरपीएफ जीपी सिंह ने सीआरपीएफ की 47 बटालियनों के रेंज डीआईजी और कमांडिंग अधिकारियों के साथ बैठक की है। उन्होंने यात्रा रूट का जायजा लिया। बीएसएफ डीजी दलजीत चौधरी भी जम्मू कश्मीर में पहुंचे हैं। वे भी यात्रा मार्ग को फुलप्रूफ सिक्योर बनाने में जुटे हैं। बीएसएफ की करीब 143 कंपनियों को उक्त कार्य में लगाया जाएगा। एसएसबी की 97 कंपनियां और आईटीबीपी की 62 कंपनियां, यात्रा रूट के विभिन्न हिस्सों पर तैनात होंगी। सीआईएसएफ की लगभग 60 कंपनियों को लगाया जाएगा। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अलावा सेना की राष्ट्रीय राइफल 'आरआर' के जवान भी यात्रा के दौरान मुस्तैद रहेंगे।
सभी केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के खुफिया तंत्र का आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर 'मैक' के साथ त्वरित तालमेल सुनिश्चित किया गया है। पहलगाम हमले के बाद जब भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह किया तो पाकिस्तान ने ड्रोन के जरिए जम्मू के विभिन्न इलाकों में बम गिराए थे। हालांकि ये बम ज्यादा क्षमता वाले नहीं थे। जो खुफिया अलर्ट मिल रहे हैं, उनमें यह आशंका जताई गई है कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए बम गिराने की हरकत हो सकती है। इसके अलावा छोटी मिसाइल यानी हैंड ग्रेनेड से हमला भी संभावित है। फिदायीन अटैक, आईईडी और चिपकने वाला बम, ये भी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती हैं।
जम्मू कश्मीर पुलिस की इंटेलिजेंस विंग और सुरक्षाबलों की मदद से ओवर ग्राउंड वर्कर की सक्रियता का पता लगाने के लिए एक विशेष दस्ते का गठन किया गया है। ये ओवर ग्राउंड वर्कर, आतंकियों को जरुरी सूचनाएं एवं ट्रांसपोर्ट की सुविधा मुहैया कराते हैं। सूत्रों ने बताया, पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के जम्मू कश्मीर में मौजूद मुखौटे आतंकी संगठन जैसे 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) और पीएएफएफ की गतिविधियों पर खास नजर रखी जा रही है। ये आतंकी संगठन, ओवर ग्राउंड वर्कर की मदद से हमले को अंजाम देते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी सूरत में आतंकियों की बुरी नजर 'अमरनाथ यात्रा' पर न पड़े। यात्रा के लिए वाहन, ठहराव शिविर, रास्ते में लैंड स्लाइडिंग से मार्ग बाधित होना और आतंकियों से यात्रा की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यात्रियों को कैंप तक सुरक्षित ले जाने के लिए टनल और ओवरहेड ब्रिज सुविधाएं, आदि मुहैया कराई जाएंगी। वाहनों पर चिपकने वाले बम का इस्तेमाल तीन चार वर्ष पहले ही शुरु हुआ है। इस बार केंद्रीय सुरक्षा बलों एवं जेकेपी ने आतंकियों और उनके 'अंडर ग्राउंड वर्कर' को उनके ठिकानों पर ही दबोचने की रणनीति बनाई है
।
सुरक्षा बलों ने चिपकने वाले बम से रसद वाहनों को बचाने का प्लान बनाया है। अमरनाथ यात्रा के दौरान टारगेट किलिंग को रोकना सुरक्षा बलों की प्राथमिकता रहेगी। रसद सामग्री वाले स्थानों पर ड्रोन के जरिए नजर रखी जाएगी। यात्रियों के शिविरों पर हमला न हो, इसके लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा रहेगा। यात्रा में शामिल वाहनों को ऐसे स्केनर से गुजारा जाए, जहां पर किसी भी संदिग्ध वस्तु की पहचान की जा सकती है। आईईडी का पता लगाने के लिए सुरक्षा बलों की कई टीमों का गठन किया गया है। उपकरणों के अलावा खोजी कुत्ते भी इस काम में सुरक्षा बलों की मदद करेंगे। ड्रोन को मार गिराने के लिए सुरक्षा बलों के शूटर तैनात होंगे। आईईडी का पता लगाने के लिए अनेक जगहों पर तकनीकी उपकरण लगाए जा रहे हैं।