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MP Samwad 2025: 'ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ', अमर उजाला संवाद में बोले नौसेना के पूर्व अधिकारी एबी सिंह

Thu, 26 Jun 2025 01:24 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/भोपाल Published by: बशु जैन Updated Thu, 26 Jun 2025 01:24 PM IST
सार

Amar Ujala Samwad Madhya Pradesh: 'अमर उजाला संवाद' का कारवां इस बार मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंच गया है। आज इस संवाद में अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां शामिल हो रही हैं।

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Amar Ujala Samwad Madhya Pradesh: Vice Admiral retired Ajendra Bahadur Singh in event Know all about it
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'अमर उजाला संवाद' का मंच एक बार फिर तैयार है। पहली बार यह संवाद भारत के हृदय यानी मध्य प्रदेश में हो रहा है। राजधानी भोपाल के ताज लेकफ्रंट होटल में हो रहे 'संवाद' में अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां जुट रही हैं। इस दौरान वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने 'राष्ट्र रक्षा का संकल्प' विषय पर चर्चा की।
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वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि भोपाल से मेरा नौसेना का सफर शुरू हुआ था। मेरा प्रयास आपको नौसेना के बारे में बताने है। नौसेना विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। नौसेना 11 हजार किमी लंबे तट क्षेत्र को सुरक्षित करती है। यह विकसित भारत के लिए काम कर रही है। यह हिंद महासागर की सबसे बड़ी नौसेना है। समुद्री क्षेत्र में जागरूकता रखती है। नौसेना पर सैटेलाइट है जो अंतरिक्ष से समुद्र तट पर नजर रखती है। नौसेना के पास कई सारे हवाई जहाज है। इस पर 275 एयरक्राफ्ट हैं। इसमें से 30 मानव रहित हैं। ये सभी जहाजों से उड़ते हैं। समुद्री सतह पर नौसेना के पास कई जहाज है। 
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उन्होंने कहा कि नौसेना के पास पनडुब्बियां हैं। इसमें मिसाइल होती हैं। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण पनडुब्बी परमाणु ऊर्जा से लैस है। यह सब भारत में बनाई जाती हैं। नौसेना के पास 140 जहाज हैं। नौसेना आज के आयाम पर काम करती है। दुनिया में हर जगह संघर्ष है। इस्राइल-ईरान संघर्ष से हम दो प्रभाव पड़े हैं। हमारे तेल स्रोत बंद होंगे और व्यापार प्रभावित होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध से भारत की आपूर्ति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जरूरी था। चीन को हमने करारा जवाब दिया। यह भारत के विकास को दर्शाती है। सभी देश चाहते हैं कि भारत का विकास न हो। इसलिए हमारा मजबूत होना जरूरी है। 

उन्होंने कहा कि एक हजार पहले यह साफ था कि आपके पास नौसेना है तो आपका प्रभाव बढ़ेगा। भारत के पास जमीनी क्षेत्र ज्यादा है। मगर हम नौसेना के जरिये आत्मनिर्भर बने हैं। मेक इन इंडिया को भारत की नौसेना ने 1960 के दशक में शुरू किया था। सबसे पहले नौसेना ने आईएनएस अजय बनाया। भारत अभी भी काफी जहाज बना रहा है। आज हमारे रक्षा उद्योग ने काफी काम किया।

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सवाल:
पाकिस्तान ने दोबारा पहलगाम जैसी हरकत की तो क्या हमारी नौसेना तैयार है?

वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: ऑपरेशन सिंदूर बिल्कुल अलग था। हमारा नेतृत्व बहुत अलग था। राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य नेतृत्व का रुख साफ था। अच्छी बात यह है कि भारत पहले ही कई सारे हमले झेल चुका था। तो भारत ने इन सबको सोचते हुए पाकिस्तान को जवाब दिया।

सवाल: ऑपरेशन सिंदूर हुआ तो पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को भारत ने कैसे निशाना बनाया?

वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: परमाणु मुद्दों पर ज्यादा चर्चा नहीं की जानी चाहिए। इस पर अंदरूनी तौर पर काफी चर्चा होती है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारी सेना तैयार थी। नौसेना भी अलर्ट थी। मार्च में ही नौसेना अभ्यास कर चुकी थी। इसलिए पहलगाम के बाद हमने तेजी और मुस्तैदी से जवाब दिया। 

सवाल: इस्राइल-ईरान जंग में अमेरिका ने अपनी नौसेना का इस्तेमाल किया था, तो आगे कभी युद्ध हुआ तो भारत भी क्या ऐसा करेगा?

वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: ऑपरेशन सिंदूर में भारत के जहाजों पर 600 मिसाइल तैनात थीं। भारत की नौसेना आगे भी तैयार है। जब संघर्ष होता है सभी सेनाएं एक समय पर अपना काम करती हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भले ही नौसेना को जवाब देने का मौका नहीं मिला लेकिन नौसेना तैयार थी। शायद इसलिए सीजफायर हुआ। 

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सवाल:
 पाकिस्तान के साथ सीजफायर क्यों किया गया?

वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: पाकिस्तान के पास कुछ खोने को नहीं है। पाकिस्तान ने जब गुहार लगाई तो भारत ने सीजफायर किया। यह संघर्ष ज्यादा दिन चलता तो हमारे नागरिक भी प्रभावित होते। 

सवाल: राष्ट्र रक्षा का संकल्प केवल सैनिकों का है या देश नागरिकों को भी लेना चाहिए?

वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: राष्ट्र रक्षा का संकल्प सभी का है। बच्चे फौज में जाते हैं तो यह अच्छा है। विकसित भारत के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। ब्रह्मोस उत्तर प्रदेश में बन रही है। मध्यप्रदेश में टैंक बन रहे हैं। राष्ट्र रक्षा में सबका सहयोग जरूरी है। विकास तभी होगा जब सुरक्षा होगी। आने वाले पीढ़ियां विकसित होंगीं। 

सवाल: सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे पाकिस्तानी प्रोपैगैंडा से देश के लोग कैसे बचें?

वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह:  तकनीक अच्छाई भी लाती है और बुराई भी लाती है। लोग व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर देश विरोधी कोई पोस्ट साझा न करें। लोग ऐसा न करके देश का सहयोग कर सकते हैं। लोग साइबर सिक्योरिटी के तहत राष्ट्र की रक्षा और देशहित में काम कर सकते हैं। 

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सवाल:
युद्ध डर पैदा करते हैं या उत्साह?

वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह:  अमेरिका युद्ध के जरिये अपना व्यापार बढ़ाता है। इसलिए वे संघर्ष से उत्साहित होते हैं। मगर युद्ध भारत की प्रगति में रोड़ा बनता है। हाल के युद्धों को देखें तो भारत काफी प्रभावित हुआ है। इसलिए युद्ध नहीं होने चाहिए। 

सवाल: दुश्मन हमला करें तो क्या हमें युद्ध करना चाहिए?

वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह: ऑपरेशन सिंदूर स्थगित हुआ है। सरकार बेहद साफ है कि अब अगर कोई हमला होगा तो जवाब दिया जाएगा। इसमें कोई संशय नहीं है कि अब अगर आतंकवाद फैलाया जाएगा तो भारत आत्मरक्षा करेगा। पहले भी सारी स्ट्राइक ऐसी हुई हैं। न्यायोचित अधिकार के लिए युद्ध में जाना पाप नहीं है। इसमें सबको अपनी भागीदारी करनी होगी।

भारतीय नौसेना के पूर्व फ्लैग ऑफिसर
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह भारतीय नौसेना के पूर्व फ्लैग ऑफिसर हैं। 2023 में सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने 2021 से पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एफओसी-इन-सी) के रूप में कार्य किया। इससे पहले उन्होंने भारतीय नौसेना के पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (एफओसी-इन-सी) के रूप में कार्य किया। इस नियुक्ति से पहले उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया। वे एकीकृत रक्षा स्टाफ (सिद्धांत संगठन प्रशिक्षण) के उप-प्रमुख भी थे।

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राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल  (सेवानिवृत्त) एबी सिंह को 01 जुलाई 1983 को भारतीय नौसेना में नियुक्त किया गया था। वे नेविगेशन और एयरक्राफ्ट डायरेक्शन के विशेषज्ञ हैं। उनकी महत्वपूर्ण विशेषज्ञ नियुक्तियों में ऑपरेशन पवन के दौरान INS कामोर्टा और विध्वंसक INS रंजीत के के नेविगेटिंग ऑफिसर के अलावा ऑपरेशन पराक्रम के दौरान पश्चिमी बेड़े के फ्लीट नेविगेटिंग ऑफिसर शामिल हैं।

कई नौसैन्य जहाजों की कमान संभाली
वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) अजेंद्र बहादुर सिंह ने नौसैन्य जहाजों वीर (मिसाइल पोत), विंध्यगिरी (फ्रिगेट), त्रिशूल (गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट) और विराट (एयरक्राफ्ट कैरियर) की कमान संभाली है। वह एनडीए, खड़कवासला, नेविगेशन एंड डायरेक्शन स्कूल, कोच्चि में प्रशिक्षक और डीएसएससी वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ भी रहे हैं। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में नौसेना योजना निदेशालय में उप निदेशक और प्रधान निदेशक के रूप में काम किया है। उन्होंने प्रधान निदेशक के रूप में रणनीति, अवधारणा और परिवर्तन निदेशालय की भी स्थापना की थी। 

VSM, AVSM, PVSM से सम्मानित
2012 में फ्लैग रैंक में पदोन्नत होने के बाद से उन्होंने नौसेना मुख्यालय में फ्लैग ऑफिसर एओबी प्रोजेक्ट, असिस्टेंट चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (नीति और योजना) और फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट के पदों पर कार्य किया। राष्ट्र के प्रति उनकी अनुकरणीय सेवा के लिए फ्लैग ऑफिसर को 2011 में विशिष्ट सेवा पदक, 2016 में अति विशिष्ट सेवा पदक और 2022 में परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया था।
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