Amar Ujala Samvad: केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उत्तराखंड के विकास का रोडमैप बताया, पढ़िए क्या-क्या बोलीं
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विस्तार
राज्य के गठन के बाद से उत्तराखंड ने हर क्षेत्र में तेजी से विकास किया है। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से विकास का ये रथ और भी तेज हो चला है। ये बातें सोमवार को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहीं। वह देहरादून में आयोजित 'अमर उजाला संवाद' में बोल रहीं थीं। अनुप्रिया ने इस दौरान उत्तराखंड के विकास के रोडमैप के बारे में भी बताया। ये भी जानकारी दी कि कैसे केंद्र सरकार इसके लिए मदद कर रही है। आइए पढ़ते हैं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से खास बातचीत...
सवाल : उत्तराखंड अपने बल पर काफी समय से आगे चल रहा है। आप केंद्रीय मंत्री के तौर पर इस राज्य की प्रगति को कैसे देखती हैं? औद्योगिक और व्यवसाय के रूप में ये और कैसे बेहतर होगा?
जवाब : इस राज्य के विकास के लिए हर तरह से भारत सरकार प्रयास कर रही है। हमारा मंत्रालय उत्तराखंड से एक्सपोर्ट प्रमोशन के लिए काफी प्रयास कर रहा है। साल 2022-23 में हमने देश से 6776 बिलियन का एक्सपोर्ट किया, इसमें उत्तराखंड से केवल 1.78 बिलियन डॉलर का हुआ, यानी केवल 0.3 प्रतिशत। उत्तराखंड के पास एक्सपोर्ट बढ़ाने की आपार संभावनाएं हैं। अभी फिलहाल जितने प्रोडक्ट यहां से एक्सपोर्ट हो रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा प्रोडक्ट्स को एक्सपोर्ट करने की क्षमता है। उत्तराखंड बहुत बड़ा निर्यातक हो सकता है। हिमालयन स्टेट में ये नंबर एक पर है और देश में 17वें नंबर पर है। इस दिशा में भारत सरकार यहां की राज्य सरकार के साथ मिलकर बहुत कोशिश कर रही है। मुझे लगता है कि जो अभी एक्सपोर्ट 0.3 प्रतिशत है वो आने वाले दिनों में और बढ़ेगी।
सवाल : यहां का राजमा, मक्का, पट्टू कपड़ा काफी लोकप्रिय है। ये वैश्विक पटल पर आगे बढ़े, इसके लिए सरकार की क्या नीतियां हैं?
जवाब : प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण काफी अच्छा है। वह सोचते हैं कि कैसे हमारे देश के हर जिले के लोकल उत्पादों को थोड़ा वैल्यू एडिशन करके आगे बढ़ाया जाए। इस लिहाज से हम तेजी से काम कर रहे हैं। हर जिले में एक्सपोर्ट प्लान बनाया गया है। अभी उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, उधम सिंह नगर में अच्छा काम हो रहा है। बाकी जिलों में भी अच्छा हो सकता है। यहां के गर्म कपड़े, एग्रीकल्चर, फल, जड़ी-बूटी, सेंटेड परफ्यूम, हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम जैसी चीजों को खूब एक्सपोर्ट किया जा सकता है। इससे यहां के लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी और राज्य सरकार को भी फायदा मिलेगा।
सवाल : यहां के कई प्रोडक्ट्स हैं, जो बहुत अच्छे हैं, लेकिन वह कुछ जगहों तक ही सीमित होकर रह गए। इसे आगे बढ़ाने के लिए यहां उद्योग विकसित करना होगा। इसके लिए सरकार क्या कर रही है?
जवाब : उत्तराखंड ऐसा राज्य है, जो अपने गठन के बाद से बहुत तेजी से इंडस्ट्रलाइजेशन की तरफ बढ़ा है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कोशिश कर रहे हैं कि यहां इंडस्ट्री विकसित हों। 2003 से अब तक साढ़े तीन सौ करोड़ इस राज्य को मिल चुके हैं। पिछले नौ साल में 187 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2017 में इंडस्ट्रीयल प्रमोशन स्कीम लेकर आए हैं, जिसके जरिए यहां के इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की कोशिश की। नए लोग भी जो इंडस्ट्री सेट करने के लिए आ रहे हैं, उन्हें सरकार की तरफ से 10 लाख रुपये प्रति एकड़ का इनसेंटिव दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है।
सवाल : टूरिज्म भी सर्विस सेक्टर के तहत आता है। इस पर भी आप लोगों का फोकस है? वो कैसे और कारगर हो सकता है?
जवाब : टूरिज्म एक्सपोर्ट के लिहाज से एक महत्वपूर्ण सर्विस सेक्टर है। इसका शेयर चार प्रतिशत है। 12 चैंपियन सर्विस सेक्टर हमने निकाले हैं। इनमें से एक टूरिज्म है। भारत के कोने-कोने में इतनी विविधताएं हैं कि इसके जरिए टूरिज्म को काफी बढ़ावा दिया जा सकता है। उत्तराखंड को भी हमने टूरिज्म के लिहाज से प्रमोट किया है। इसको लेकर सरकार ने तेजी से काम किया है। इसका नतीजा है कि आज टूरिज्म को लेकर लोग उत्साही हैं।
जवाब : देखिए, अभी तक हम लोग लेनदेन नकदी ही करते थे, लेकिन अब ज्यादातर ट्रांजेक्शन डिजिटलाइज्ड हो रही है। लोग इसे पसंद कर रहे हैं। हां, ये जरूर हो सकता है कि पहाड़ी एरिया में कुछ दिक्कतें आती होंगी। ये बहुत छोटी समस्याएं हैं। इसे हम राज्य सरकार के साथ मिलकर ठीक कर लेंगे।
सवाल : होम स्टे को लेकर आप लोग काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। क्या है इसकी रणनीति? इनको और कैसे सहूलियत दी जा सकती है?
जवाब : होम स्टे का कॉन्सेप्ट काफी यूनिक है। ये नॉवेल आइडिया प्रधानमंत्री जी का ही था। खासतौर पर पर्यटन के क्षेत्र में इससे काफी मदद मिलती है। इससे जुड़ी समस्याएं बहुत बड़ी नहीं होती हैं। इसे जिले स्तर पर ही दूर किया जा सकता है।
सवाल : यहां प्राकृतिक आपदाएं भी आती हैं। ऐसे में आप लोगों ने क्या रणनीति तैयार की है जिससे यहां उद्योग का भी विस्तार हो और पर्यावरण का नुकसान भी न हो?
जवाब : हमारी सोच बहुत साफ है। हमें संतुलन बनाकर रखना है। आने वाली पीढ़ी के लिए प्रकृति का संरक्षण करना है। उद्योगों का विकास भी इसे ध्यान में रखकर किया जाएगा। सोलर एनर्जी, हाईड्रो प्रोजेक्ट, इको टूरिज्म, आईटी सेक्टर से जुड़े उद्योगों को यहां लाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इसका असर पर्यावरण पर न पड़े।
सवाल : उत्तराखंड में केवल पांच लोकसभा की सीटें हैं। बहुत छोटा सा राज्य है। ऐसे में केंद्र सरकार की नीतियों में उत्तराखंड कितना मायने रखता है?
जवाब : लोकसभा में किस राज्य से कितनी सीटें आ रहीं हैं, इसके हिसाब से हम विकास का दायरा तय नहीं करते हैं। नॉर्थ ईस्ट उदाहरण है। हम कभी भी इस तरह का भेदभाव नहीं करते हैं। उत्तराखंड छोटा राज्य है, फिर भी हम इसे उतना ही महत्व देते हैं, जितना किसी अन्य राज्य को दिया जाता है। हम उत्तराखंड में तेजी से काम कर रहे हैं।