फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   amar ujala samvad 2024 uttarakhand dehradun minister of state ajay tamta on country development highways

Samvad: उत्तराखंड में विकास की दिशा से लेकर नितिन गडकरी तक, केंद्रीय मंत्री ने हर सवाल का बेबाकी से दिया जवाब

Sun, 04 Aug 2024 11:35 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 04 Aug 2024 11:35 AM IST
सार

Amar Ujala Samvad 2024: अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने कहा कि उत्तराखंड में बहुत सी संभावनाएं हैं। यहां की भौगौलिक परिस्थितियां विशेष हैं। हम हॉर्टिकल्चर में बहुत अच्छा काम कर सकते हैं। अभी हम 10-12 फीसदी ही काम कर पा रहे हैं। यहां सब्जियों के उत्पादन, जड़ी-बूटियों के उत्पादन में बहुत संभावनाएं हैं। 

विज्ञापन
amar ujala samvad 2024 uttarakhand dehradun minister of state ajay tamta on country development highways
केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तराखंड और देश के विकास पर आज अमर उजाला संवाद में महामंथन हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री अजय टम्टा ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य से प्रतिभाओं का पलायन चिंताजनक है और इसे रोकने के लिए कदम उठाने जरूरी हैं। साथ ही उन्होंने राजनीति और देश के विकास पर भी बात की। तो आइए जानते हैं कि अजय टम्टा ने विकास, राजनीति और पर्यावरण के मुद्दे पर क्या कहा....
विज्ञापन


आपकी अब तक की राजनीतिक यात्रा कैसी रही?
अजय टम्टा:
सबसे पहले तो अमर उजाला परिवार को बधाई देता हूं कि वह लंबे समय से सूचनाओं का आदान-प्रदान करने का काम कर रहा है। ...मैं राजनीतिक परिवार से नहीं हूं। मेरे पिताजी अफसर रहे। हम उत्तराखंड को लेकर आंदोलित होते थे। तब सोचते थे कि यहां बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन यहां सुविधाएं नहीं हैं। विद्यार्थी परिषद में काम करने के बाद सबसे युवा जिला पंचायत अध्यक्ष बना। हमारे घर-गांव की व्यवस्थाएं स्वयं पर आधारित होती थीं। जंगल, पानी, खेत-खलिहान सब यहीं था। माता-पिता चाहते थे कि बच्चा फौज में जाए या डॉक्टर-इंजीनियर बने। 1936 में उत्तराखंड से पहली महिला स्नातक लक्ष्मी टम्टा थीं। मैं उनके परिवार से हूं। वे 'समता' नाम से अखबार भी निकालती थीं। ...मेरा अब तक का सफर सौभाग्यमय रहा है। मुझे मोदी जी ने महत्वपूर्ण कार्य दिया है। नितिन गडकरी जी ने देश में जो राजमार्ग बनवाए हैं, उस प्रयास का मैं भी हिस्सा रहा हूं। एक बार जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और विधायक का चुनाव लड़ा, तब विफलता मिली। फिर 2009 में लोकसभा का चुनाव लड़ा और 6900 वोट से हार गया। राजनीतिक जीवन में सफलता-विफलता मिलती रहती है, लेकिन जनता से जुड़े रहना चाहिए।
विज्ञापन

 


उत्तराखंड में विकास की दिशा क्या होनी चाहिए? ग्लेशियरों के पिघलने और सड़कें बनने में एक विरोधाभास है। इससे कैसे निपटेंगे?
अजय टम्टा:
यहां बहुत सी संभावनाएं हैं। यहां की भौगौलिक परिस्थितियां विशेष हैं। हम हॉर्टिकल्चर में बहुत अच्छा काम कर सकते हैं। अभी हम 10-12 फीसदी ही काम कर पा रहे हैं। यहां सब्जियों के उत्पादन, जड़ी-बूटियों के उत्पादन में बहुत संभावनाएं हैं। कोरोनाकाल में देशभर के लोग यहीं उत्तराखंड में रहकर काम कर रहे थे। यहां चारधाम के साथ-साथ पर्यटन के बाकी स्थल भी हैं। अब गर्मी देशभर में पड़ रही है, देहरादून में यातायात की समस्या है। एशिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर यहीं है। डेढ़ साल पहले यह ग्लेशियर पीछे चला गया। असल में बर्फ पीछे हो जाती है। अब सड़क वहां तक भी पहुंचेगी। उत्तराखंड में त्रासदियां भी आ रही हैं, लेकिन यह सिर्फ उत्तराखंड की वजह से है या दुनियाभर में यही दिक्कत है, यह देखना होगा।

उत्तराखंड का युवा यहां कैसे रुके? 
अजय टम्टा:
उत्तराखंड में पढ़ने-लिखने पर बहुत जोर है। डॉक्टर यहां काम आते हैं, लेकिन कोई इंजीनियर बन जाता है तो उसके लिए यहां नौकरियों के उतने अवसर नहीं हैं। ऐसे युवाओं के लिए यहां अवसर बनाने होंगे। यहां आईटी हब बनाना होगा। जहां रेल, सड़क और हवाई कनेक्टविटी है, वहां पर ये हब विकसित करने होंगे। हमारी कुछ प्रतिभाएं वापस भी आई हैं। लोगों ने अपनी पढ़ाई-करियर के साथ यहां भी रोजगार के मौके देखे। होम स्टे इसका एक उदाहरण है।


उत्तराखंड की जमीन कैसे बचाई जा सकती है?
अजय टम्टा:
उत्तराखंड के भूस्वामियों के पास बड़ी जमीनें नहीं हैं। 2007 में उत्तराखंड सरकार की पहली कैबिनेट में इस पर चर्चा की गई थी। तब हमने रोक लगाई थी कि ढाई सौ वर्ग मीटर से ज्यादा भूमि बाहर के लोग नहीं खरीद सकेंगे। भविष्य का समय चुनौतीपूर्ण है। यहां के लोग भूमिविहीन न हों, इसकी चिंता करनी होगी। हिमाचल में यह नियम है कि कृषि की जमीन बाहर का व्यक्ति नहीं खरीद पाता। किन्नौर में अगर किसी बेटी से कोई बाहरी शादी करे, तो भी वह वहां जमीन नहीं खरीद सकता। 
 
विज्ञापन

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के कामकाज को उत्तराखंड से कैसे जोड़ेंगे?
अजय टम्टा:
किसी भी क्षेत्र में सड़क पहुंचना बहुत जरूरी है। विकास के लिए कनेक्टिविटी जरूरी है। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू हुई थी। जब यहां एक इलाके में सड़क आई तो लोगों ने जश्न मनाया। अब यहां हर ग्राम पंचायत को हमने सड़क से जोड़ा है। 2017 में यहां चारधाम के लिए ऑलवेदर रोड योजना की शुरुआत हुई। तब मैंने कहा कि कैलाश मानसरोवर धाम भी यहां है। अब आदि कैलाश तक भी ऑलवेदर रोड जा रही है। 213 किलोमीटर की रोड दिल्ली-देहरादून की सड़क बन रही है। अब ढाई घंटे में दिल्ली से देहरादून जा सकेंगे। नदी मार्ग पर भी सड़क बन रही है, लेकिन यह तकनीकी तौर पर सर्वे करने के बाद बन रही है। ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर भी एलिवेटेड रोड बन रही है। देहरादून के बाहर 52 किलोमीटर का रिंग रोड बना रहे हैं। ऋषिकेश के जाम में लोग घंटों फंसते हैं। ऋषिकेश से नटराज चौक और ढालवाला पॉइंट तक 18 किलोमीटर का बायपास बना रहे हैं। काठगोदाम से लेकर नैनीताल तक सिंगल लेन है, उसे डबल लेन करने वाले हैं। जब केंद्र में दायित्व मिला, तब मैं लिपुलेख तक सड़क मार्ग से ही गया। बद्रीनाथ और माणा तक गया। अब हमने निर्देश दिया कि बिना विस्फोट के सड़कें बनाएं। 

नितिन गडकरी के बारे में क्या कहेंगे? 
अजय टम्टा:
जिस तरह प्रधानमंत्री बहुत मेहनत के साथ राष्ट्र निर्माण में लगे हैं, नितिन जी का भी वही योगदान है। 2047 तक भारत की सड़कें और बुनियादी संरचना कैसी हो, हम इस पर काम कर रहे हैं। नितिन जी विजनरी हैं। सड़क मंत्रालय अब रक्षा के बाद सबसे ज्यादा बजट वाला मंत्रालय है। सभी राज्यों को सड़कों का लाभ मिले, हम इस पर काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed