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क्या शारदा चिटफंड जैसे बड़े घोटाले राजनीतिक सरपरस्ती के बिना संभव हैं?

Tue, 05 Feb 2019 07:48 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Tue, 05 Feb 2019 07:48 PM IST
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amar ujala poll:  Big scandals like Saradha chitfund are not possible without political patronage

पश्चिम बंगाल में चर्चित चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआई की एक बड़ी टीम रविवार को कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पहुंची। उनके घर पर पुलिसकर्मियों ने सीबीआई के अधिकारियों से वारंट या अथॉरिटी लेटर मांगा। नहीं दिखा पाने पर धक्का-मुक्की की स्थिति बन आई। इसके बाद स्थानीय पुलिस पहुंची और अधिकारियों को पुलिस स्टेशन ले गए। घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद सीएम ममता बनर्जी भी कमिश्नर राजीव कुमार के घर पहुंच गईं। 

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पश्चिम बंगाल का चर्चित चिटफंड घोटाला 2013 में सामने आया था। कथित तौर पर तीन हजार करोड के इस घोटाले का खुलासा अप्रैल 2013 में हुआ था। आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने गलत तरीके से निवेशकों के पैसे जुटाए और उन्हें वापस नहीं किया। इस घोटाले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल उठे थे। चिट फंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे। इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाए और तय वक्त पर उसकी नीलामी की जाए। 
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जो फायदा हो बाकी लोगों में बांट दिया जाए। इसमें बोली लगाने वाले शख्स को पैसे लौटाने भी होते हैं। नियम के मुताबिक ये स्कीम किसी संस्था या फिर व्यक्ति के जरिए आपसी संबंधियों या फिर दोस्तों के बीच चलाया जा सकता है लेकिन अब चिट फंड के स्थान पर सामूहिक सार्वजनिक जमा या सामूहिक निवेश योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनका ढांचा इस तरह का होता है कि चिट फंड को सार्वजनिक जमा योजनाओं की तरह चलाया जाता है और कानून का इस्तेमाल घोटाला करने के लिए किया जाता है।
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या शारदा चिट फंड जैसे बड़े घोटाले राजनीतिक सरपरस्ती के बिना संभव हैं?


पोल के जवाब में हमें कुल 4503 वोट मिले। इनमें 22.67 फीसदी (1021 वोट) पाठकों ने माना कि शारदा चिटफंड जैसे बड़े घोटाले राजनीतिक सरपरस्ती के बिना संभव हैं, जबकि 73.33 फीसदी (3482 वोट) पाठकों ने माना कि शारदा चिट फंड जैसे बड़े घोटाले राजनीतिक सरपरस्ती के बिना संभव नहीं हैं।

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