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Hindi News ›   India News ›   Amar Ujala Investigation: Work from home tilted spine up to 120 degrees, difficult to stand upright

अमर उजाला पड़ताल : वर्क फ्रॉम होम ने 120 डिग्री तक झुकाई रीढ़, सीधा खड़ा होना मुश्किल

Thu, 18 Nov 2021 06:02 AM IST
योगेश साहू परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 18 Nov 2021 06:02 AM IST
सार

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने पिछले एक साल में वर्क फ्रॉम होम की वजह से आ रहे बदलाव पर गंभीर खुलासा किया है। डॉक्टरों का कहना है कि मार्च 2020 से जून 2021 के बीच ऐसे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है।

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Amar Ujala Investigation: Work from home tilted spine up to 120 degrees, difficult to stand upright
वर्क फ्रॉम होम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

विस्तार

कोरोना महामारी और वायु प्रदूषण से बचाव के लिए वर्क फ्रॉम होम की नसीहतों के बीच एम्स की एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक वर्क फ्रॉम होम की वजह से लोगों का पोश्चर (बैठने का तरीका) बदल गया है। इसका असर हड्डियों पर पड़ा है। 

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लंबे वक्त तक लैपटॉप और मोबाइल फोन पर घर में काम करने से लोगों के सीधे खड़े होने में दिक्कत आने लगी है। कई मामलों में रीढ़ 120 डिग्री तक झुकने लगी है। वहीं, नसों में जकड़न, शरीर में कमजोरी, गर्दन में दर्द जैसे लक्षण भी आम हो गए हैं।
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नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने पिछले एक साल में वर्क फ्रॉम होम की वजह से आ रहे बदलाव पर गंभीर खुलासा किया है। डॉक्टरों का कहना है कि मार्च 2020 से जून 2021 के बीच ऐसे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। जिन्हें कमर में दर्द, नसों में जकड़न, शरीर में कमजोरी, गर्दन में दर्द के साथ पूरे शरीर में अकड़न महसूस होती है। 
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ओपीडी में पहुंचे 500 से अधिक में से कुछ मरीजों से जब डॉक्टरों ने बातचीत की तो पता चला कि ऑफिस से ज्यादा उन्हें घर से काम करना पड़ता है। सुबह से लेकर रात तक कुर्सी पर बैठे-बैठे काम करने की वजह से उनका पोश्चर बदल गया है। कुर्सी पर उठते ही इनकी रीढ़ आगे की ओर झुकी होती है। 

सोते समय पैर सीधे नहीं हो पाते हैं। कभी कूल्हा, कभी कमर, कभी गर्दन का निचला सिरे में तीव्र दर्द महसूस होता है। डॉक्टरों का मानना है कि 180 डिग्री पर रहने वाली रीढ़ की हड्डी अब 120 डिग्री के एंगल पर आने लगी है। इससे बचना बहुत जरूरी है।

ब्रिटिश शोध में भी सामने आई थी बात  
इसी जुलाई में आए ब्रिटिश शोध कंपनी इंस्टीट्यूट ऑफ एंप्लॉयमेंट स्टडीज के अध्ययन में बताया गया था कि पूरी दुनिया में वर्क फ्रॉम होम बढ़ने की वजह से पीठ की बीमारियों में 55 फीसदी में बढ़ोतरी हुई है। वहीं गर्दन की बीमारियों में 58 फीसदी और मस्कुलोस्केलेटल से जुड़ी बीमारी भी 55 फीसदी तक बढ़ गई हैं। इसके अलावा काम के तनाव और बैठने के तौर-तरीके गलत होने की वजह से कंधे में दर्द की शिकायत वाले मरीजों की संख्या में करीब 56 फीसदी का इजाफा हुआ है। 

वहीं 2020 में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायरमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार गतिहीनता और खराब मुद्रा में वृद्धि से मस्कुलोस्केलेटल विकारों विशेष रूप से पीठ के निचले हिस्से में दर्द और गर्दन में दर्द के मामलों में 20 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

वर्क फ्रॉम होम वालों में मिलीं बीमारियां

  • पीठ दर्द
  • स्पांडिलाइसिस
  • पोस्टीरियर इंटरवर्टेब्रल डिस्क
  • रीढ़ की बीमारी
  • सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस
  • फाइब्रोमायल्जिया (मांसपेशियों में दर्द) 
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस
     

 

वर्क फ्रॉम होम की वजह से लोगों में ऐसी गंभीर बीमारियां देखने को मिल रही हैं। हमारे यहां इनकी संख्या दोगुना से अधिक हो चुकी है। यह एक संकेत है, अगर समय रहते लोगों ने काम के साथ दिनचर्या पर ध्यान नहीं दिया तो हालात और खराब हो सकते हैं। -डॉ. विवेक शंकर, एसोसिएट प्रोफेसर, हड्डी रोग विभाग, एम्स

 

हमारे यहां भी ऐसे मामले दर्ज किए जा रहे हैं। लोगों से अपील है कि काम करते वक्त बीच-बीच में थोड़ा ब्रेक लें। रात को समय पर सोने का प्रयास करें। लेटते हुए टीवी नहीं देखें, बिस्तर पर जाने के बाद फोन नहीं चलाएं। सुबह उठते ही टहलना या व्यायाम जरूरी। -डॉ. सुमेध, फैकल्टी, हड्डी रोग विभाग, आरएमएल

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