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Amar Ujala Batras: इन्फ्लुएंसर्स के लिए कितना मुश्किल ट्रोलर्स को झेलना, क्या सेंसरशिप जरूरी? देखें पॉडकास्ट
Sat, 17 Jan 2026 08:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 17 Jan 2026 08:06 PM IST
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अमर उजाला बतरस।
- फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई आधुनिक दुनिया में संपर्क और मनोरंजन का एक अहम साधन बन चुके सोशल मीडिया और इसकी सामग्री तैयार करने वाले लोगों की जिंदगी पर, जिन्हें आम भाषा में इन्फ्लुएंसर कहा जाता है। लोकप्रिय एंकर और पत्रकार नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते इसी मुद्दे पर बात की और जाना कि आखिर इन्फ्लुएंसर्स के लिए आज का समय कैसा है और उन्हें लोकप्रियता को जिम्मेदारी के साथ संभालने के अलावा और किन चीजों पर ध्यान देना पड़ता है।
इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
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इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।
नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीति पांडे और रेखा मल्होत्रा शामिल रहीं। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- आमतौर पर लोग किस तरह की रील देखना पसंद करते हैं और खुद इन्फ्लुएंसर्स क्या देखना पसंद करते हैं? क्या सोच कर इन्फ्लुएंसर बनने का सोचा और क्यों? इसके अलावा सोशल मीडिया की दुनिया में कंटेंट को भरोसे से देखने वालों के लिए इन्फ्लुएंसर्स क्या गलत कर रहे हैं? और क्या सोशल मीडिया के कंटेंट पर सेंसर होना चाहिए?
बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि मौजूदा समय में सोशल मीडिया पर एल्गोरिदम का खेल कैसे देखने वालों को प्रभावित करता है। इसके अलावा खुद इन्फ्लुएंसर्स की जिंदगी कैसी होती है। वे किस तरह व्यूज की दौड़ में मानसिक दबाव का सामना करते हैं। इन्फ्लुएंसर्स ट्रोल्स और हेट कमेंट्स को कैसे संभालते हैं और गाली गलौच से जल्दी लोकप्रियता बटोरने की मानसिकता क्या बताती है। इतना ही नहीं दोनों ने इस बात पर भी चर्चा की कि सोशल मीडिया संस्कृति किस ओर जा रही है।