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Amar Ujala Batras: 1947 से 2025 तक कितना बदल गया आजादी का मतलब; तब की स्वतंत्रता, अब की कहानी में कितना अंतर?

Sat, 16 Aug 2025 08:02 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 16 Aug 2025 08:02 PM IST
सार

एंकर नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय और वरिष्ठ पत्रकार-लेखक राजकिशोर शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। 

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Amar Ujala Batras Podcast with Nandita Kudesia Independence Day Special with Special Guests news and updates
अमर उजाला बतरस। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई भारत की स्वतंत्रता और इसके महत्व के मुद्दे पर। दरअसल, इस हफ्ते भारत में 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इस मौके पर पूरे देश में जश्न का माहौल रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी लाल किले की प्राचीर से इस स्वतंत्रता दिवस का महत्व देशवासियों को बताया। एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में देश को 78 साल पहले मिली आजादी को लेकर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना कि आखिर तब से लेकर अब तक भारत की आजादी का मतलब किस तरह से बदल गया है और आने वाले समय में भारत का भविष्य क्या होगा।
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इस पूरे पॉडकास्ट को आप शनिवार रात आठ बजे अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सुन सकते हैं।  

नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय और वरिष्ठ पत्रकार-लेखक राजकिशोर शामिल रहे। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- 1947 से 2025 तक आजादी का सच क्या है। इसके मायने क्या हैं और नई पीढ़ी स्वतंत्रता को किस तरह समझ सकती है? पहले और अब स्वतंत्रता के मायने किस तरह बदले हैं? पुरानी आजादी के साथ नई सोच का मेल कैसे हो? 

बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि तब की स्वतंत्रता और अब के हालात का तुलनात्मक विश्लेषण भी सामने रखा। साथ ही 1947 से आज तक देश की स्वतंत्रता की यात्रा का भी जिक्र किया। इसके अलावा यह बताया कि अब हालात कितने बदले हैं और आजादी की असली बात क्या है। 

बातचीत के दौरान विशेषज्ञों ने दो अहम सवालों के जवाब भी दिए। पहला यह कि स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग क्यों हो जाता है? हमारा संविधान हमें कितनी आजादी देता है? और नई पीढ़ी के लिए आजादी का असली मतलब क्या है?
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