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देश की बेटियां पैदल स्कूल जाने के मामले में भी लड़कों से आगे
Sat, 19 Sep 2020 08:13 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sat, 19 Sep 2020 08:13 AM IST
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59.7 फीसदी छात्र पैदल चलकर स्कूल जाते हैं
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षा के स्तर पर हाल ही में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि भारत में 59.7 फीसदी छात्र पैदल स्कूल जाते हैं, ये आंकड़ा ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले छात्रों से भी ज्यादा है। पैदल चलकर स्कूल जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत 62 फीसदी है, जो औसत से भी ज्यादा है। जबकि लड़कों के लिए ये 57.9 फीसदी है।
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रिपोर्ट में बताया गया कि जब ग्रामीण और शहरी इलाकों का डाटा अलग किया गया है तो यही ट्रेंड सामने आया। देश के ग्रामीण इलाकों के 61.4 फीसदी लड़के पैदल स्कूल जाते हैं, जबकि लड़िकयों की संख्या 66.5 फीसदी है। इसके अलावा शहरी इलाकों की बात करें तो यहां पैदल स्कूल जाने वाले लड़कों की संख्या 57.9 फीसदी और लड़कियों की संख्या 62 फीसदी है।
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देश में सफर करने के लिए दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला माध्यम सार्वजनिक परिवहन है, 12.4 फीसदी बच्चे इसी माध्यम की सहायता से स्कूल जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में 11.3 फीसदी बच्चे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं, जबकि शहरी इलाकों में ये संख्या 15.3 फीसदी है।
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रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर डाला गया है कि शैक्षणिक संस्थानों में भाग लेने के लिए छात्रों ने परिवहन में रियायती किराया सुविधा का किस तरह नियमित रूप से लाभ उठाया? इस संबंध में रिपोर्ट कहती है कि ग्रामीण इलाकों के बच्चों ने सार्वजनिक परिवहन में रियायती किराए की सुविधा का लाभ ज्यादा उठाया है। ग्रामीण इलाकों के 51.3 फीसदी और शहरी इलाकों के 42.7 फीसदी बच्चों ने इस व्यवस्था का लाभ उठाया है।
रिपोर्ट में इन आंकड़ों का संदर्भ देने के लिए छात्रों के घरों से स्कूल तक की दूरी को भी नापा गया। इसमें यह पाया गया कि ग्रामीण इलाकों में 92.7 फीसदी बच्चों के घरों से स्कूल तक की दूरी एक किलोमीटर के दायरे में है। जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 87.2 फीसदी बच्चों के घरों से स्कूल की दूरी एक किलोमीटर के दायरे में है।
लगभग 68 फीसदी ग्रामीण परिवारों और 80 फीसदी शहरी परिवारों ने घर से एक किलोमीटर के भीतर उच्च प्राथमिक स्कूलों की सूचना दी। जबकि 38 फीसदी ग्रामीण परिवारों की तुलना में 70 फीसदी शहरी परिवारों ने इतनी ही दूरी के भीतर माध्यमिक स्कूलों के होने की सूचना दी है।