टूट गया 25 साल पुराना भाजपा-शिवसेना गठबंधन
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एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की भविष्यवाणी लगभग सच होने जा रही है। देश के राजनीतिक इतिहास में सबसे ज्यादा दिनों तक एक साथ रही भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूट गया है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने एलान किया है कि 25 साल यूं ही बर्बाद कर दिए, लेकिन अब कभी भी भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।
गौरतलब है कि मराठा क्षत्रप शरद पवार ने एक साल पहले ही कहा था कि बीएमसी चुनाव से पहले भाजपा-शिवसेना की दोस्ती टूट जाएगी और फडणवीस सरकार खतरे में पड़ जाएगी। उद्धव के गठबंधन तोड़ने के एलान से उनकी भविष्यवाणी सच होने जा रही है।
बीएमसी चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा से नाराज उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अब वह कभी किसी के दरवाजे पर कटोरा लेकर भीख मांगने नहीं जाएंगे और न ही भविष्य मे भाजपा के साथ गठबंधन करेंगे। इससे एनसीपी प्रसन्नचित्त मुद्रा में आ गई है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने फडणवीस सरकार को समर्थन देने का संकेत दिया है।
फडणवीस सरकार को कोई खतरा नहीं
शरद पवार ने हंसते हुए कहा कि इतने दिनों तक एक साथ रहने वाले अलग हो गए हैं। इसका हमें दु:ख है, लेकिन अगर राज्य में भाजपा सरकार को खतरा होता है और हमसे मदद मांगी जाएगी तो हम जरूर विचार करेंगे।
दूसरी ओर, भाजपा को राज्य सरकार पर कोई खतरा नजर नहीं आता। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रावसाहेब दानवे पाटिल ने कहा है कि फडणवीस सरकार को कोई खतरा नहीं है। पार्टी अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। दूसरी ओर, शिवसेना प्रवक्ता व सांसद संजय राउत ने भी कहा है कि फिलहाल शिवसेना फडणवीस सरकार से समर्थन वापस नहीं लेगी। कुछ दिनों बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।
इस बीच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को संसद के बजट सत्र को लेकर भाजपा-शिवसेना के सांसदों की बैठक बुलाई थी, लेकिन शिवसेना के सांसद नहीं आए। गठबंधन टूटने के बाद कई जगह शिवसेना-भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तनाव का माहौल भी दिखाई दिया।
फडणवीस ने स्वीकारी शिवसेना की चुनौती
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उद्धव ठाकरे की चेतावनी को चुनौती को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने अपने लहजे में ट्वीट किया है कि सत्ता साध्य नहीं, साधन है विकास का। जो आए उसके साथ, जो न आए उसके बिना, परिवर्तन तो होकर रहेगा। जिस मैदान से उद्धव ने गठबंधन नहीं करने की हुंकार भरी है उसी गोरेगांव के एनएसई कंपाउंड में शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी गरजेंगे और अपनी चुनावी रणनीति का एलान करेंगे।
क्या है विवाद
भाजपा-शिवसेना के बीच एशिया की वैभवशाली नगर निकाय मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हुआ था। शिवसेना बीएमसी में बीते 25 साल से सत्ता में है। बीएमसी की 227 सीट में से शिवसेना सिर्प 60 सीटें बीजेपी को देना चाहती थी, जबकि भाजपा ने 50-50 का फार्मूला दिया था। सूत्र बताते हैं कि उद्धव को उम्मीद थी कि भाजपा के बड़े नेता दिल्ली से उन्हें फोन कर मनाएंगे और फिर कुछ मांगे मनवाने के बाद समझौता कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
21 फरवरी को पड़ेंगे वोट
महाराष्ट्र में 21 फरवरी को बीएमसी सहित 10 महानगरपालिका और 25 जिला परिषद के लिए मतदान होगा। जिला परिषद के लिए दो चरणों में वोटिंग होगी, जबकि महानगरपालिका के लिए 21 फरवरी को एक ही दिन मतदान कराया जाएगा।