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यूएई की राजकुमारी के बदले हुआ मिशेल का प्रत्यर्पण? यूएन में जा सकता है मामला

Wed, 16 Jan 2019 01:05 PM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अजय सिंह Updated Wed, 16 Jan 2019 01:05 PM IST
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राजकुमारी शेख लतीफा- क्रिश्चयन मिशेल - फोटो : self

आरोपों की माने तो अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे में आरोपी क्रिश्चयन मिशेल को दुबई से इसी शर्त पर प्रत्यर्पित किया गया कि राजकुमारी लतीफा को दुबई वापस भेज दिया जाएगा। दिसंबर, 2018 में दुबई की राजकुमारी शेख लतीफा का संबंध भारत और भारत लाए गए अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी डील के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल से जुड़ गया है। मिशेल के परिवार के वकील ने लंदन में जानकारी दी है कि वह मिशेल के केस को संयुक्त राष्ट्र में जाने की तैयारी रहे हैं। 

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नई दिल्ली में एशियन और यूरोपियन कूटनीतिक सूत्रों ने ब्रिटिश अखबार को इस प्रत्यर्पण के बारे में बताया है। लंदन में अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार वकील टॉबी कैडमैन ने लतीफा का केस यूएन में भेजा है। अब वह मिशेल के परिवार को भी यही सलाह दे रहे हैं। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मिशेल के प्रत्यपर्ण के बदले में एक बार से ज्यादा बार कथित अदला बदली हुई है। 
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कैडमैन ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है जिसे कड़ी जांच की जरुरत है। इस मसले को संयुक्त राष्ट्र ले जाया जाएगा। मैं अभी सबूतों का खुलासा नहीं कर सकता मगर मैं कह सकता हूं कि यह प्रत्यर्पण का मामला गंभीर है। भारतीय न्यायिक व्यवस्था भी जल्द ही जान जाएंगी की मिशेल को रखने का कोई कानूनी आधार नहीं और और उसे तुरंत छोड़ देना चाहिए। 
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गौरतलब है कि 57 वर्षीय मिशेल एक करोड़पति ब्रिटिश हथियार डीलर है जिसका दुबई में बिजनेस है।

कौन है राजकुमारी शेख लतीफा?

बता दें कि दुबई के राजकुमारी को भेजे जाने के आठ महीने मिशेल को लाया गया। राजकुमारी शेख लतीफा दुबई के शासक और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की बेटी हैं। लतीफा की नाव को भारतीय कोस्ट गार्ड ने गोवा के तट पर उस वक्त पकड़ लिया था जब वह यूएई से भागकर भारत आ रही थीं। मार्च 2018 की घटना के समय राजकुमारी लतीफा की योजना फ्लोरिडा की फ्लाइट पकड़ने की थी। उन्हें भारत-अमीरात के संयुक्त ऑपरेशन के तहत दुबई वापस भेज दिया गया था। 

दुबई में डीटेन्ड की सीईओ राधा स्टर्लिंग का कहना है कि इस संयुक्त ऑपरेशन की स्वीकृति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शेख मोहम्मद के साथ एक निजी फोन कॉल के बाद दी थी। इस गैरकानूनी कार्रवाई में भारत की हिस्सेदारी के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर आलोचना भी झेलनी पड़ी थी, जिसमें संयुक्त राष्ट्र की बिठाई गई एक आधिकारिक जांच भी शामिल है। 

संक्षेप में कहें तो यूएई ने भारत की मदद की। ऐसा लगता है कि भारत द्वारा राजकुमारी लतीफा को वापस दुबई भेजे जाने में भारत की भूमिका के बाद यूएई ने आपसी व्यवहार के चलते मिशेल का प्रत्यपर्ण किया है। आपराधिक जांच और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का कभी राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। संयुक्त अरब अमीरात में भारत के नागरिकों के साथ मानवाधिकार उल्लघन के कई मामलें सामने आते हैं, ऐसे प्रत्यर्पण के बजाए भारत को अपने नागरिकों के मामलों में हस्तक्षेप कर उनकी मदद करनी चाहिए। 

मिशेल की कानूनी टीम के एक सदस्य ने कहा कि मेरी समझ में भी यह मामला एक अदला-बदली की डील का है।

बता दें कि अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे से जुड़े सीबीआई के मामले में मिशेल 27 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में है। मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था। उसे 22 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और तब से अदालती आदेश पर एजेंसी की हिरासत में है। 

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