यहां छुट्टियां मनाते हैं देश के राष्ट्रपति, इतना भव्य है आवास और इतनी मिलती है सैलरी
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भारत के नए राष्ट्रपति के चुनाव का ऐलान हो चुका है। इस चुनाव के लिए एनडीए गठबंधन और विपक्ष ने तैयारियां भी पूरी कर ली हैं। 20 जुलाई को देश को एक नया राष्ट्रपति मिल जाएगा। भारत के राष्ट्रपति को 5 साल के लिए चुना जाता है और वो विधायी शक्तियों का प्रमुख होता है, ऐसे में उनकी शक्तियां भी बेहद खास होती हैं।
भारत का राष्ट्रपति देश का पहला नागरिक होता है। पिछले साल राष्ट्रपति की सेलरी में तीन गुना इजाफा करने का ऐलान किया गया था। राष्ट्रपति को हर माह 1.5 लाख रूपये सैलरी मिलती है जिसे 5 लाख रूपये किए जाने का ऐलान किया जा चुका है।
सन 2008 में भी राष्ट्रपति की सैलरी बढ़ाई गई थी, उस वक्त राष्ट्रपति को हर महीने तनख्वाह के तौर पर 50 हजार रूपये मिलते थे।
भारत के राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया आयरलैंड से ली गई थी, और इसे एकल संक्रमणीय पद्धति के जरिए चुना जाता है। भारत के राष्ट्रपति को रहने के लिए जो राष्ट्रपति भवन है उसमें 350 से ज्यादा कमरे हैं।
इसके अलावा राष्ट्रपति के पास 750 कर्मचारियों का स्टाफ है। उसे पर्सनल सेक्रेटरी रखने के लिए भत्ता भी मिलता है, राष्ट्रपति के लिए एक अलग सचिवालय है। अन्य सुविधाओं की बात की जाए तो भारत के राष्ट्रपति को देश के भीतर यात्रा करने के लिए मिलिट्री का एक हेलीकॉप्टर मिलता है।
वहीं दूसरी ओर देश से बाहर जाने के लिए एक सरकारी विमान भी राष्ट्रपति को मुहैया कराया जाता है जो कि सभी आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस होता है।
भव्य है पूरा का पूरा राष्ट्रपति भवन
भारत का राष्ट्रपति का भवन विश्व का सबसे बड़ा सरकारी आवास है। भव्य और बेहद बड़ा ये भवन ब्रिटिश वायसराय के लिए बनाया गया था। राष्ट्रपति भवन 4 मंजिला है और इसमें 350 से ज्यादा कमरे मौजूद हैं। इस भवन के निर्माण में 70 करोड़ ईंटों का इस्तेमाल हुआ था।
राष्ट्रपति भवन में एक दरबार हॉल, मार्बल हॉल, म्यूजियम, नॉर्थ ड्रॉइंग रूम, अशोका हॉल, बैंक्वेट हॉल और येलो ड्रॉइंग रूम, एक टेनिस कोर्ट, एक पोलो ग्राउंड, एक क्रिकेट का मैदान और एक संग्रहालय मौजूद है।राष्ट्रपति भवन में लोहे का इस्तेमाल न के बराबर हुआ है।
राष्ट्रपति भवन में बच्चों के लिए दो गैलरीज का भी निर्माण किया गया है। राष्ट्रपति भवन के पीछे एक मुगल गार्डन भी है, जो कि ब्रिटिश और मुगल काल की शैली में बनाया गया है। 13 एकड़ में फैले इस गार्डन में फूलों की देसी-विदेशी ज्यादातर किस्म मौजूद हैं। इसे फरवरी मार्च में आम नागरिकों के लिए खोला जाता है।
ये है राष्ट्रपति के अंगरक्षक, ऐसे
राष्ट्रपति के लिए इस वक्त जो अंगरक्षक रेजीमेंट है वो 1773 में गठित की गई थी। भारतीय सेना की सबसे बेहतरीन और वरिष्ठ ये रेजीमेंट एक घुड़सवार यूनिट है। ये अंगरक्षक यूनिट राष्ट्रपति के लिए होने वाले समारोह में हिस्सा लेते हैं। इस रेजीमेंट के अधिकारी और जवान बेहतरीन घुड़सवार, सक्षम टैंककर्मी और छाताधारी सैनिक होते हैं।
राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की एक टुकड़ी सबसे ठंडे ग्लेशियर सियाचिन में भी सेवा करती है। राष्ट्रपति की रेजीमेंट में भर्ती के लिए बेहद कठिन नियम होते हैं। इसमें भर्ती के लिए जवानों की न्यूनतम हाइट 6 फुट होनी चाहिए, साथ ही घोड़े भी 15.2 फुट की ऊंचाई से ज्यादा के होने चाहिए।
इस रेजीमेंट के सैनिक लाल और सफेद अश्वारोही पताका लेकर चलते हैं, जिनके हाथों में तलवार और भाला होते हैं।
यहां छुट्टियां मनाते हैं राष्ट्रपति
मशोबरा की पहाड़ी की चोटी पर राष्ट्रपति के भ्रमण के लिए एक रिट्रीट भवन बनाया गया है। इसे 1895 में वायसराय के लिए बनाया गया था। साल में एक बार राष्ट्रपति इस भवन में जरूर जाते हैं। जिस वक्त राष्ट्रपति यहां जाते हैं उस वक्त उनका कार्यालय भी यहां स्थानांतरित हो जाता है।
ये रिट्रीट भवन शिमला के रिज टॉप से एक हजार वर्गफुट ऊंची जगह पर बना हुआ है। इस जगह पर प्राकृतिक सौंदर्य समेत पर्यटन के नजरिए से बेहद खूबसूरत है। इस भवन का जर्रा जर्रा खूबसूरत है। दाज्जी दीवार से इस भवन का निर्माण में लकड़ी के ढांचे का इस्तेमाल हुआ है। ये 10628 वर्ग फुट में बनाया गया है।
इस भवन के अलावा राष्ट्रपति के प्रवास के लिए हैदराबाद में मौजूद एक भवन भी राष्ट्रपति के लिए आवंटित किया गया है। राष्ट्रपति निलयम को हैदराबाद के निजाम से अधिग्रहित किया गया था। इस एक मंजिला इमारत में 11 कमरे हैं जिसमें एक डायनिंग हॉल, एक सिनेमा हॉल, एक दरबार हॉल, मॉर्निंग रूम है। राष्ट्रपति इस भवन में भी कम से कम एक बार आते हैं। इस निलयम से ही उनके प्रवास के वक्त सारा सरकारी कामकाज यहां से होता है।