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अब वर्चुअल होगा सियासी संग्राम: लाखों व्हाट्सअप ग्रुप्स और डिजिटल माध्यमों पर ऐसे चल रही हैं चुनावी तैयारियां

Mon, 10 Jan 2022 05:12 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 10 Jan 2022 05:12 PM IST
सार

सोशल मीडिया के दिग्गजों का मानना है कि जिन लोगों ने 2019 में सबसे ज्यादा तैयारियां की होंगी, उन्हें ही सबसे ज्यादा इस चुनाव में फायदा मिलने वाला है। हालांकि सभी राजनीतिक दलों का अपना-अपना दावा है कि वह पूरी तरीके से डिजिटल वार रूम के माध्यम से चुनाव लड़ने को न सिर्फ तैयार हैं बल्कि बहुत तेजी से आगे भी बढ़ रहे हैं...

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all political parties Digital war rooms are ready for the assembly elections 2022, preparing for digital rally and virtual rally
वर्चुअल रैली - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान जब देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने आक्रामक रूप से पूरे देश के अलग-अलग राज्यों समेत जिलों में आईटी सेल का गठन करना शुरू किया था, तो उनको इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि 2022 के विधानसभा चुनाव की शुरुआत उस वक्त तैयार किए जाने वाले आईटी सेल के वार रूम से लड़े जाएंगे। अब जब सभी पार्टियां डिजिटल वार रूम से ही चुनाव लड़ने को मजबूर हैं, तो 2019 की तैयारियों का बनाया गया प्लेटफार्म सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हो रहा है। सोशल मीडिया के दिग्गजों का मानना है कि जिन लोगों ने 2019 में सबसे ज्यादा तैयारियां की होंगी, उन्हें ही सबसे ज्यादा इस चुनाव में फायदा मिलने वाला है। हालांकि सभी राजनीतिक दलों का अपना-अपना दावा है कि वह पूरी तरीके से डिजिटल वार रूम के माध्यम से चुनाव लड़ने को न सिर्फ तैयार हैं बल्कि बहुत तेजी से आगे भी बढ़ रहे हैं।

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भाजपा और आप के पास सबसे मजबूत डिजिटल टीम

पूरे देश में डिजिटल माध्यम से भाजपा और आम आदमी पार्टी ने अपने डिजिटल वॉरियर्स तैयार किए हैं। इन दोनों पार्टियों के पास न सिर्फ आईटी एक्सपर्ट्स हैं बल्कि उनकी अपनी बड़ी-बड़ी टीमें भी लगातार बीते कई सालों से चुनावी मैदान में लगी हुई हैं। भाजपा की यूपी डिजिटल टीम को लीड कर रहे कामेश्वर नाथ मिश्रा कहते हैं कि उनकी टीम डाटाबेस में बहुत मजबूत है। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक बूथ समिति का उनके पास डाटा है। वह कहते हैं कि अब से नहीं, बल्कि पिछले तीन सालों से लगातार काम करने के बाद यह डाटाबेस और मजबूत हुआ है। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक डिजिटल के माध्यम से पकड़ बनाने के लिए उनके प्रत्येक बूथ के कम से कम पांच सदस्यों के पास स्मार्टफोन हैं। जो किसी भी तरीके की पार्टी की गतिविधि को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए न सिर्फ सक्षम हैं बल्कि उन्हें जोड़ने के लिए भी एक मजबूत कड़ी हैं।

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कामेश्वर कहते हैं कि उनके पास 5,000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स की टीम है। जबकि 15 हजार से ज्यादा प्रशिक्षित डिजिटल भाजपा कार्यकर्ता भी हैं। इसके अलावा प्रदेश के सभी मंडलों में 27 हजार शक्ति केंद्रों तक उनकी अपनी टीम पहुंच बना चुकी है। जहां पर इस चुनाव से पहले ही वह लगातार सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता से संवाद करते रहे हैं। इसलिए डिजिटली चुनाव प्रचार के लिहाज से उनके लिए बहुत चेलैंज नहीं है। हां, यह जरूर है कि उनकी टीम इस बार ऐसा बहुत कुछ नया करने वाली है जो डिजिटल चुनाव प्रचार के माध्यम में सबसे अलग होगा।

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सपा की भी डिजिटल तैयारी किसी से कम नहीं

प्रदेश में डिजिटल वॉररूम सिर्फ भाजपा का ही नहीं तैयार है, बल्कि समाजवादी पार्टी भी अपना संदेश प्रदेश के हर विधानसभा तक डिजिटल माध्यम से जुड़ाव और जनता तक पहुंचा रही है। समाजवादी पार्टी की सोशल मीडिया विंग से जुड़े एक वरिष्ठ कार्यकर्ता का कहना है कि पार्टी ने विधानसभा वार रूम के लिए एक डिजिटल विंग तैयार की है। इसके लिए पार्टी की ओर से सभी सांसदों-विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों के अलावा कार्यकर्ताओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों को डिजिटली जोड़ने के लिए भी कहा भी गया है। वह कहते हैं कि जब भी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की रैली कार्यक्रम जनसभा या प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे बड़े आयोजन होते हैं तो उन्हें न सिर्फ लाइव लिंक के माध्यम से तैयार किए गए व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा जाता है। बल्कि हजारों और लाखों की संख्या में उसे देखा भी जा रहा है। वे कहते हैं कि इस व्यवस्था को और ज्यादा मजबूत किया गया है। चूंकि अब 15 जनवरी तक शुरुआती दौर में वर्चुअल माध्यम से ही चुनाव प्रचार किया जाएगा, इसलिए पार्टी डिजिटल संवाद करने की तैयारी कर रही है।

व्हाट्सएप पर ज्यादा सक्रिय है कांग्रेस

कांग्रेस की सोशल मीडिया विंग राष्ट्रीय स्तर पर और प्रदेश स्तर पर लगातार अपनी मजबूती दिखाती जा रही है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी कि मीडिया विंग से जुड़े एक कार्यकर्ता का कहना है कि उनके पास इस वक्त उत्तर प्रदेश की एक बड़ी आबादी व्हाट्सएप के माध्यम से जुड़ी हुई है। वह कहते हैं कि जितने भी प्रत्याशी चुनाव की दावेदारी कर रहे हैं उन सब लोगों को पचास-पचास व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का निर्देश दिया गया था। ज्यादातर लोगों ने ऐसे ग्रुप तैयार भी कर लिए हैं और उनमें लोगों को जोड़ लिया है। वह कहते हैं कि पार्टी नेतृत्व के किसी भी संदेश या किसी भी जानकारी और किसी भी लाइव लिंक को व्हाट्सएप पर तत्काल प्रभाव से सेंड किया जाता है ताकि जनता उस लिंक के माध्यम से सीधे जुड़ सके।

आप इसका कैसे आकलन करते हैं कि आपके भेजे गए लिंक से लोग जुड़े या नहीं, इस सवाल पर उक्त कार्यकर्ता का कहना है कि इसके लिए बाकायदा उनकी आईटी सेल में मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया गया है। जो जिलेवार और विधानसभा क्षेत्रवार तैयार किए गए कार्यकर्ताओं के डाटा बैंक को चेक करती है। भेजे गए लिंक पर दिए गए एक्सेस से भी ऑनलाइन हो जाता है। इसके अलावा केंद्रीय टीम लगातार प्रदेश की डिजिटल टीम को न सिर्फ मॉनिटर करती है, बल्कि उसे गाइड भी करती है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनके पास आईटी एक्सपर्ट की पूरी टीम है, जो ऐसे ही वर्चुअल कार्यक्रमों के लिए तैयार की गई है। वह कहते हैं कि पिछले कुछ चुनावों में उनकी टीम ने इसमें बहुत अच्छा काम किया है। इसलिए इस विधानसभा चुनावों में अगर पूरा चुनाव वर्चुअली होता है तो भी कांग्रेस कहीं कमजोर नहीं पड़ने वाली।

हम किसी से कम नहीं - बसपा

हालांकि वर्चुअल माध्यम से चुनाव प्रचार के लिए सबसे पीछे बहुजन समाज पार्टी पार्टी को ही कहा जा रहा है। लेकिन बहुजन समाज पार्टी के नेता इस बात को मानने से इनकार करते हैं। पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि बीते कुछ समय में उनकी पार्टी और उनके कार्यकर्ताओं ने तकनीकी तौर पर अपने नेताओं के भाषण और उनकी रैलियों को न सिर्फ देखा और सुना है बल्कि उसे आगे भी बढ़ाया है। इसलिए 2022 के विधानसभा चुनावों में वह सोशल मीडिया और तकनीकी का सहारा लेकर चुनाव मैदान में मजबूती के साथ खड़े हैं। बसपा के वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनकी पार्टी के चुनिंदा नेता और युवा चेहरे सोशल मीडिया पर न सिर्फ सक्रिय हैं बल्कि पार्टी के विचारों को भी आगे रख रहे हैं।

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