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Rahul Gandhi: न्यायपालिका को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर AIBA सख्त, कहा- इससे घटती है संस्थानों की गरिमा
Sun, 07 Jun 2026 01:15 AM IST
शिवम गर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sun, 07 Jun 2026 01:15 AM IST
सार
ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने राहुल गांधी के न्यायपालिका पर दिए गए बयान की कड़ी निंदा की है। AIBA ने इसे जिम्मेदारीहीन और नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इससे न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित होती है।
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राहुल गांधी
- फोटो : ANI
विस्तार
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणी पर देश की कानूनी बिरादरी में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। ऑल इंडिया बार एसोसिएशन (एआईबीए) ने उनके बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे जिम्मेदारीहीन, भ्रामक और संस्थागत गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।
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क्या कहा था AIBA ने?
एआईबीए के अध्यक्ष अदिश सी अग्रवाल ने एक बयान जारी कर कहा कि राहुल गांधी का बयान देश की न्यायपालिका की साख और विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, जो अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका संविधान के तहत एक महत्वपूर्ण और पवित्र संस्थान है, जो कानून के शासन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है। ऐसे में किसी भी तरह के सामान्यीकृत आरोप न्याय व्यवस्था पर जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं।
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न्यायपालिका की भूमिका पर जोर
अग्रवाल ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने अपनी स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण दुनिया भर में सम्मान अर्जित किया है। ऐसे में किसी भी प्रकार की टिप्पणी जो न्यायाधीशों की निष्पक्षता पर संदेह पैदा करे, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए हानिकारक है।
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क्या था राहुल गांधी का बयान?
राहुल गांधी ने हाल ही में कांग्रेस के एक कार्यक्रम में दावा किया था कि उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त, खुफिया तंत्र के प्रमुख और वरिष्ठ न्यायपालिका के सदस्यों से संबंधित संदेश मिल रहे हैं और सिस्टम के भीतर संस्थागत विद्रोह जैसी स्थिति बन रही है। इसी बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, जिस पर अब कानूनी और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में बहस तेज
इस पूरे मामले ने एक बार फिर राजनीति और न्यायपालिका के संबंधों को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं पर सार्वजनिक बयान देते समय नेताओं को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि जनता का विश्वास किसी भी स्थिति में कमजोर न हो।