सिंहस्थ कुंभ में दान हो या प्रसाद, सब कुछ कैशलेस
- कई बैंकों ने लगाए अपने एटीएम, डेबिट कार्ड के जरिये ऑनलाइन कीजिए दान
- पहली बार पहुंचा किन्नरों का अखाड़ा, हाईप्रोफाइल अंदाज में निकाली पेशवाई
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मध्य प्रदेश के उज्जैन में शुक्रवार को सिंहस्थ महाकुंभ की शुरुआत हो गई। महाकाल की नगरी में लग रहे इस मेले में इस बार काफी कुछ नया है। पहली बार इस मेले में किन्नरों का अखाड़ा शामिल हुआ है। मान्यता प्राप्त 13 अखाड़ों से इतर उनकी पेशवाई और फिर शाही स्नान भी कुंभ के इतिहास में पहली बार हो रहा है। यही नहीं, पहली बार महाकुंभ कैशलेस हो गया है। यानी अब आपको ज्यादा कैश साथ में रखने की जरूरत नहीं है। यहां दान से लेकर प्रसाद, सब कुछ कैशलेस हो गया है।
जानकारी के मुताबिक मेला प्रांगण में दर्जनों बैंकों को स्टॉल आवंटित किए गए हैं। इन स्टॉलों पर एटीएम सुविधा प्रदान की जा रही है। कुछ बैंकों के मोबाइल एटीएम भी काम कर रहे हैं। भोपाल की सीमा दिव्य बताती हैं, ‘पिछली बार परिवार के साथ सिंहस्थ में गए थे, तो एक चिंता यही थी कि नकदी कौन संभालेगा। स्टेट बैंक की तरफ से यहां काम देख रहे एमडी झंवर ने बताया कि दान के लिए सिंहस्थ की एक साइट है, जिस पर कभी भी डेबिट कार्ड के जरिये दान किया जा सकता है। जहां तक प्रसाद का सवाल है, तो इसके लिए भी कैशलेस व्यवस्था शुरू होगी।
दूसरी तरफ इस बार सिंहस्थ महाकुंभ में किन्नर भी शामिल हो रहे हैं। देशभर के किन्नरों ने अपना एक अलग अखाड़ा बना लिया है। इन्होंने शैव और वैष्णव अखाड़ों की तरह ही अपने अखाड़े के कुछ नियम तय किए हैं और 10 मठ बना लिए हैं। नियमों को मानने वाला ही इस अखाड़े की सदस्यता ले पाएगा। मठों में पीठाधीश्वरों की नियुक्ति भी हो चुकी है। भले ही अखाड़ा परिषद ने इसे मान्यता नहीं दी है, लेकिन इस बार सिंहस्थ में आकर्षण का यह एक प्रमुख केंद्र है। बृहस्पतिवार को किन्नर अखाड़े ने जिस हाईप्रोफाइल अंदाज में अपनी पेशवाई निकाली, लोग उसे देखते ही रह गए। ‘बिग बॉस’ फेम लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ऊंट पर सवार होकर सबसे आगे चल रही थीं। किन्नरों ने इसे देवत्व यात्रा का नाम दिया था। शाम को अखाड़े ने शाही स्नान भी किया।
नागा साधुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू
देश के चारों प्रमुख पीठों के शंकराचार्यों में से कोई भी पहले शाही स्नान में शामिल नहीं हो रहे हैं। इनका आगमन सिंहस्थ में मई में होगा।
इस बीच ब्रह्म मुहूर्त में शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती और नागा साधुओं ने शाही स्नान किया।
क्षिप्रा नदी के तट पर महाकाल की नगरी उज्जैन में सुबह पांच बजे से दत्त अखाड़ा क्षेत्र में शैव संप्रदाय के नागा साधुओं के एकत्रित होने का क्रम शुरू हो गया। शुक्रवार को स्वामी अवधेशानंद, पायलट बाबा, महामंडलेश्वर शिवांगीनद और पंडित जसराज ने भी स्नान किया।
आम की तरह ही डुबकी लगाएंगे वीआईपी, दिग्विजय ने की शुरुआत
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी कहा कि शाही स्नान के दिन अगर कोई वीआईपी पहुंचता है, तो उसे साधारण नागरिक की तरह ही स्नान करना होगा। मैं भी यदि जाऊंगा तो ऐसा ही करूंगा।
मुख्यमंत्री की अपील पर सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अमल किया। दिग्विजय आम नागरिक की तरह सुबह क्षिप्रा के गौ घाट पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई।