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MEA On USA: पीएम मोदी के रूस दौरे पर अमेरिका के बयान पर भारत की दो टूक, 'सभी देश विकल्पों के लिए स्वतंत्र'
Thu, 25 Jul 2024 09:02 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 25 Jul 2024 09:02 PM IST
सार
MEA On USA: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल ही में रूस के दौरे को लेकर अमेरिका की तरफ से आए बयान पर भारत ने दो टूक जवाब दिया है कि 'सभी देश विकल्पों के लिए स्वतंत्र' हैं। भारत ने पीएम की मॉस्को यात्रा पर वाशिंगटन की चिंताओं को खारिज कर दिया।
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पीएम मोदी के रूस दौरे पर अमेरिका के बयान पर भारत की दो टूक
- फोटो : ANI
विस्तार
पीएम मोदी के हालिया रूस दौरे को लेकर अमेरिका की तरफ से की गई टिप्पणी के बाद भारत ने जोर देकर कहा कि बहुध्रुवीय दुनिया में सभी देशों को 'पसंद करने की स्वतंत्रता' है और सभी को ऐसी वास्तविकताओं के प्रति सचेत रहना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का रूस के साथ बहुत पुराने संबंध है जो हितों की 'पारस्परिकता' पर आधारित है।
अमेरिका की टिप्पणी पर भारत की दो टूक
दरअसल रणधीर जायसवाल ने दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू की इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा पर टिप्पणियों पर सवाल पूछे जाने पर प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दुनिया में सभी देशों के पास उनकी पसंद की स्वतंत्रता है और हर किसी को ऐसी वास्तविकताओं के प्रति सचेत रहना और उनकी सराहना करनी चाहिए।
डोनाल्ड लू ने पीएम की यात्रा पर जाहिर की थी निराशा
डोनाल्ड लू ने मंगलवार को कांग्रेस की सुनवाई में कहा कि अमेरिका प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा के प्रतीकात्मकता और समय से निराश है। जबकि बाइडन प्रशासन के अधिकारी ने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय प्रधानमंत्री ने मॉस्को का दौरा किया, जब वाशिंगटन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा था। रिपब्लिकन कांग्रेसी जो विल्सन की तरफ से पीएम मोदी की यात्रा के बारे में चिंता जताए जाने के बाद डोनाल्ड लू ने कहा, मैं इस यात्रा के बारे में आपकी चिंता को साझा करता हूं...और हम उन चिंताओं को सीधे भारतीयों तक पहुंचाने की बहुत कोशिश कर रहे हैं।
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अमेरिकी राजदूत ने भी जताई थी पीएम के यात्रा पर आपत्ति
वहीं इससे पहले 11 जुलाई को एक कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी भी पीएम मोदी की रूस यात्रा पर आपत्ति जताई थी। अमेरिकी दूत ने कहा कि संघर्ष के समय रणनीतिक स्वायत्तता लागू नहीं हो सकती और भारत और अमेरिका को नियम-आधारित व्यवस्था का उल्लंघन या संप्रभु सीमाओं का उल्लंघन होने पर सिद्धांतों को बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।
मॉस्को दौरे पर पीएम मोदी ने दिया था स्पष्ट संदेश
बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी शिखर वार्ता में, पीएम मोदी ने एक स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में संभव नहीं है और बम, बंदूक और गोलियों के बीच शांति वार्ता सफल नहीं होती है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा पर अमेरिका, यूरोप, चीन और मध्य पूर्व के देशों की नजर थी।
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अमेरिका की टिप्पणी पर भारत की दो टूक
दरअसल रणधीर जायसवाल ने दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू की इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा पर टिप्पणियों पर सवाल पूछे जाने पर प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दुनिया में सभी देशों के पास उनकी पसंद की स्वतंत्रता है और हर किसी को ऐसी वास्तविकताओं के प्रति सचेत रहना और उनकी सराहना करनी चाहिए।
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डोनाल्ड लू ने पीएम की यात्रा पर जाहिर की थी निराशा
डोनाल्ड लू ने मंगलवार को कांग्रेस की सुनवाई में कहा कि अमेरिका प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा के प्रतीकात्मकता और समय से निराश है। जबकि बाइडन प्रशासन के अधिकारी ने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय प्रधानमंत्री ने मॉस्को का दौरा किया, जब वाशिंगटन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा था। रिपब्लिकन कांग्रेसी जो विल्सन की तरफ से पीएम मोदी की यात्रा के बारे में चिंता जताए जाने के बाद डोनाल्ड लू ने कहा, मैं इस यात्रा के बारे में आपकी चिंता को साझा करता हूं...और हम उन चिंताओं को सीधे भारतीयों तक पहुंचाने की बहुत कोशिश कर रहे हैं।
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अमेरिकी राजदूत ने भी जताई थी पीएम के यात्रा पर आपत्ति
वहीं इससे पहले 11 जुलाई को एक कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी भी पीएम मोदी की रूस यात्रा पर आपत्ति जताई थी। अमेरिकी दूत ने कहा कि संघर्ष के समय रणनीतिक स्वायत्तता लागू नहीं हो सकती और भारत और अमेरिका को नियम-आधारित व्यवस्था का उल्लंघन या संप्रभु सीमाओं का उल्लंघन होने पर सिद्धांतों को बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।
मॉस्को दौरे पर पीएम मोदी ने दिया था स्पष्ट संदेश
बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी शिखर वार्ता में, पीएम मोदी ने एक स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में संभव नहीं है और बम, बंदूक और गोलियों के बीच शांति वार्ता सफल नहीं होती है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा पर अमेरिका, यूरोप, चीन और मध्य पूर्व के देशों की नजर थी।