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एएमयू के मुद्दे को गर्माने की तैयारी में भगवा परिवार
एम संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 22 Jun 2016 03:33 AM IST
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यूपी विधानसभा चुनाव के लिए महफूज मुद्दे की तलाश में जुटा भगवा परिवार अब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुद्दे को गर्माने की तैयारी में है। विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर सवाल उठाने के बाद अब इस मुद्दे को नए सिरे से धार देने की रणनीति है।
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आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय में दलितों और आदिवासियों को आरक्षण दिलाने के नाम पर भगवा नेता अलीगढ़ में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे। बौद्धिक रूप से भी सियासी जवाब देने के लिए ‘योद्धाओं’ की कमर कसी जा रही है। बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय के कुलपति ले. जनरल जमीरउद्दीन शाह भी भगवा नेताओं के निशाने पर आने वाले हैं।
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भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के पास एक दस्तावेज भेजा है। इसमें आरोप है कि वर्ष 2013 में हुए दंगों के बाद जमीरउद्दीन शाह ने विस्थापित परिवारों के लिए मुजफ्फरनगर में स्कूल खोलने के नाम पर अपनी संस्था के जरिए चंदा जुटाया था।
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आरोप है कि अब तक स्कूल नहीं खुला है। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान ने बीते दिनों इस मामले में स्थानीय प्रशासन से पड़ताल के बाद पूरी जानकारी से स्मृति ईरानी को अवगत कराया था।
दरअसल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मुद्दे को भगवा रणनीतिकार दोहरे फायदे का मुद्दा मान रहे हैं। एएमयू का मुद्दा सांप्रदायिक आधार पर उसके पक्ष में मतों के ध्रुवीकरण में लाभ पहुंचाएगा। तो एएमयू में आरक्षण से वंचित दलितों की आवाज बुलंद कर इस बिरादरी के वोट में सेंध मारी की जा सकेगी।
दलित मतों पर मायावती की पार्टी बसपा का प्रभाव माना जा रहा है। भगवा रणनीतिकारों को इस बात का भय सता रहा है कि यदि दलित मतों के साथ बसपा को मुस्लिम बिरादरी का जमकर साथ मिल गया तो चुनाव में हाथी को रोक पाना मुश्किल होगा।
खुद संघ के सहसरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मामले को उछालकर भगवा परिवार के दांव को आगे कर दिया है। अब भाजपा के नेता मामले को लेकर धरना-प्रदर्शन के जरिए आंदोलन की रणनीति को धार दे रहे हैं। जल्द ही पार्टी के वरिष्ठ नेता एएमयू मामले पर बयानबाजी करते नजर आएंगे।