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Alexandre Fasel: 'भारत के साथ गहरे और व्यापार हो रहे संबंध', स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय के राज्य सचिव बोले

Thu, 13 Feb 2025 08:02 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 13 Feb 2025 08:02 PM IST
सार

Alexandre Fasel: स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय के राज्य सचिव एलेक्जेंडर फासेल ने रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत-स्विट्जरलैंड के द्विपक्षीय संबंधों पर भी बात की। उन्होंने टीईपीए समझौते के तहत भारत में स्विट्जरलैंड और यूरोपीय देशों से निवेश के प्रवाह की संभावना पर जोर दिया।

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Alexandre Fasel State Secretary Swiss foreign ministry on Russia ukrine war india Switzerland relations
एलेक्जेंडर फासेल - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय के राज्य सचिव एलेक्जेंडर फासेल ने गुरुवार को रूस-यूक्रेन युद्ध, व्यापार युद्ध और भारत व स्विट्जरलैंड के द्विपक्षीय संबंधों पर बात की। रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर उन्होंने कहा, हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह संघर्ष समाप्त होगा। लंबे समय तक आप जंग के मैदान में नहीं जीत सकते। 

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एलेक्जेंडर फासले ने कहा, 'इस संघर्ष के कई पहलू हैं। पहला, दोनों पक्षों को युद्धविराम करने और द्विपक्षीय मुद्दों को हल करने की जरूरत है। दूसरा, यह एक व्यापक भू-राजनीतिक रणनीति का मुद्दा है, जिसमें  हथियारों पर नियंत्रण और निरस्त्रीकरण शामिल हैं और तीसरा, यूरोप के सुरक्षा ढांचे का सवाल है। इन सभी सवालों पर चर्चा करने की जरूरत है।' 
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भारत और स्विट्जरलैंड के द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों पर फासेल ने कहा, 'मैं भारत और स्विट्जरलैंड के द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को लेकर बहुत आश्वस्त हूं, क्योंकि हमारा एक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) है। व्यापार युद्ध से किसी का भी भला नहीं होने वाला है। इससे कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई बढ़ेगी और आखिर में उपभोक्ताओं की स्थिति खराब होगी। इसलिए व्यापार युद्ध का विचार कभी भी अच्छा नहीं होता।'
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उन्होंने आगे कहा, 'हमें देखना होगा कि स्थिति कैसी बनेगी, क्या टैरिफ की धमकी से बातचीत होगी या नई व्यवस्था होगी.. मुझे लगता है कि स्थिति बहुत अस्थिर है। हमें इसे ध्यान से देखना होगा, क्योंकि बहुत कुछ अभी तय नहीं है। हमें हमेशा खुले और स्वतंत्र व्यापार के पक्ष में रहना चाहिए, क्योंकि यह सभी देशों और भागीदारों के लिए फायदेमंद होता है।' 

दोनों देशों के संबंधों पर उन्होंने कहा, मैं इस बात से बहुत उत्साहित हूं कि हम ऐसे गहरे और व्यापक संबंधों की ओर बढ़ रहे हैं, जो टीईपीए पर आधारित होंगे। यह समझौता जल्द ही लागू होगा, जिससे स्विट्जरलैंड और अन्य यूरोपीय देशों से भारत में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) निवेश और भारत में नौकरियां पैदा करने में योगदान करेगा। 


उन्होंने आगे कहा, टीईपीए समझौता एक ऐसा उपकरण है, जिसके जरिए निवेश आ सकता है। लेकिन निवेश के लिए निवेश का माहौल, कानूनी ढांचा अच्छा और अनुकूल होना जरूरी है और इस पर भारतीय अधिकारी काम कर रहे हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में मेरे सहकर्मी (आर्थिक मामलों के सचिव) ने 100 संभावित निवेशकों के साथ भारत का दौरा किया है। 

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