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चिंताजनक: जेलों में धड़ल्ले से पहुंच रहे प्रतिबंधित सामान, जैमर-CCTV बेअसर; संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा
सार
केंद्रीय गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश की जेलों में मोबाइल फोन समेत प्रतिबंधित सामान धड़ल्ले से पहुंच रहा है। इसमें जेल स्टाफ और अस्पताल कर्मियों की मिलीभगत सामने आई है। समिति ने नियमित तबादले, बेहतर निगरानी और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों के लिए पर्याप्त फंड देने की सिफारिश की है।
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जेलों में धड़ल्ले से पहुंच रहे प्रतिबंधित सामान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
देश भर की जेलों में भले ही संचार नेटवर्क को जाम करने के उपकरण लगे हैं, लेकिन भितरघात नेटवर्क मोबाइल फोन और दूसरी प्रतिबंधित वस्तुएं धड़ल्ले से पहुंच रही हैं। केंद्रीय गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की 242 वीं रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, जेलों में प्रतिबंधित सामान पहुंचाने में जेल स्टाफ के अलावा वहां के अस्पताल कर्मी भी शामिल हैं।
यह भी पढ़ें- West Bengal: टीएमसी के 15 साल के शासन पर भाजपा सरकार लाएगी श्वेत पत्र, मंत्रियों के समूह ने शुरू किया काम
संसदीय समिति के मुताबिक, कैदियों के लिए मोबाइल फोन और दूसरी प्रतिबंधित वस्तुओं का इंतजाम करना इसलिए भी मुमकिन हो पाता है, क्योंकि जेल में तैनात स्टाफ लंबे वक्त पर वहीं तैनात रहता है। इसके चलते कैदियों और जेल स्टाफ के बीच सांठ- गांठ हो जाती है। समिति ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से सभी राज्यों को जेलों में तैनात स्टाफ का तबादला एक नियमित अंतराल पर करने के लिए सलाह जारी करने को कहा था। वहीं, जेलों में जैमर लगवाने, डोर फ्रेम, हैंड हैल्ड मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्केनर, बॉडी वॉर्न कैमरा, सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम और कंप्यूटर आदि खरीदने के लिए पर्याप्त फंड मुहैया कराने को भी कहा था। इसके साथ ही जेल के भीतर से ही वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के जरिये अपराधी की पेशी कराने की सलाह भी दी थी।
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अमेरिकी न्याय विभाग ने खोली पोल
हालिया ही अमेरिकी न्याय विभाग के ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल से मोबाइल फोन और व्हाट्सएप जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट चलाने के आरोप ने इस बात को पुख्ता किया है। इससे पहले एनआईए ने भी गैंगस्टर बिश्नोई और उसके साथियों के जेलों से आपराधिक वारदातों को अंजाम देने की बात कही थी। एनआईए के मुताबिक, जेलों के भीतर से टारगेट किलिंग और फंड जुटाने का काम होता रहा है। ड्रग तस्करी, हवाला व उगाही जैसे धंधे भी जेलों से ही अंजाम दिए जाते रहे हैं।
प्रभावशाली लोगों की शह से जेल कर्मचारी करते हैं भितरघात
दिल्ली की तिहाड़ जेल में लंबे वक्त तक डीजी रहे एजीएमयूटी कैडर के आईपीएस अधिकारी बताते हैं कि जेलों में अब माफिया या गैंगस्टर का बोलबाला हो चला है। पहले भी मोबाइल फोन या दूसरे प्रतिबंधित सामान जेलों में मिलते रहे, लेकिन अब ऐसे मामलों में तेजी देखने को मिली है। वहीं, जेल मैनुअल में भी खामियां रही हैं। अब कुछ सुधार हो रहा है, लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाकी है। वह कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि जेलों का स्टाफ अपराध रोकना नहीं चाहता वह कोशिश तो करता है, लेकिन कई बार उन्हें निराशा हाथ लगती है, क्योंकि इसके पीछे कोई प्रभावशाली शख्स होता है।
यह भी पढ़ें- Artificial Intelligence: मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन बोले- AI नौकरी नहीं छीनता, योग्यता की अहमियत बढ़ाता है
अपराध की एक बड़ी वजह जेल में अधिकांश कर्मचारियों का भर्ती के बाद से सेवानिवृत्ति तक वहीं तैनात रहना है। जब -तक बड़े ओहदे वाले का हाथ सिर पर न हो, निचला स्टाफ गलत काम करने के हिम्मत नहीं कर सकता, क्योंकि उन्हें यह भरोसा होता है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगड़ेगा और वे बेलगाम हो भितरघात करते हैं।
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