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Explainer: पायलट नशे में या नहीं, एयरलाइन-DGCA ने कैसे की पहचान; क्या है नियम तोड़ने पर सजा का प्रावधान?
Tue, 11 Aug 2026 08:05 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 11 Aug 2026 08:05 PM IST
सार
एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में टर्बुलेंस की घटना से यात्रियों के घायल होने और मामले में पायलट की डोप टेस्ट रिपोर्ट कथित तौर पर पॉजिटिव आने के बाद अब इस मुद्दे पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खासकर पायलटों के डोप और अल्कोहल टेस्ट पर बड़े सवाल उठे हैं। आइये जानते हैं आईसीएओ और डीजीसीए के शराब, ड्रग्स व दवाओं के सेवन से जुड़े कड़े नियम और उल्लंघन पर सजा का पूरा प्रावधान...
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एअर इंडिया विमान में टर्बुलेंस।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीते हफ्ते एअर इंडिया की थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में भीषण टर्बुलेंस की वजह से कई यात्री घायल हो गए थे। इस घटना की तब डीजीसीए ने जांच शुरू कर दी थी। कुछ रिपोर्ट्स में फ्लाइट के पायलट के डोप टेस्ट के पॉजिटिव आने के भी कई दावे किए गए। हालांकि, अब सवालों के घेरे में आए पायलट के गांजे के नशे में फ्लाइट उड़ाने की पुष्टि हो गई। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले उस पुनर्परीक्षण की पुष्टि की है, जिसमें पायलट के डोपिंग की बात कही गई। यह टेस्ट दिल्ली में फ्लाइट की लैंडिंग के बाद किया गया था। इस घटना को लेकर एअर इंडिया की तरफ से आधिकारिक तौर पर बयान जारी नहीं किया गया गया है।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जिस एअर इंडिया फ्लाइट के पायलट की रिपोर्ट सवालों के घेरे में है, उसके साथ कब-कैसे और क्या-क्या हुआ था? फ्लाइट में किसी पायलट की जांच से जुड़े अंतरराष्ट्रीय और घरेलू नियम क्या हैं? एयरलाइन इन नियमों का कैसे पालन करती हैं? इसके अलावा अगर जांच में पायलट की गलती साबित हो जाए तो इसमें सजा का क्या प्रावधान है? आइये जानते हैं...
कब और किस विमान के साथ हुई घटना?
यह घटना 4 अगस्त (मंगलवार) की सुबह एअर इंडिया की उड़ान एआई 2379 के साथ हुई, जो थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही थी। इस उड़ान में एयरबस A320नियो विमान का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसमें 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य सवार थे।
ये भी पढ़ें: Aviation: एअर इंडिया फ्लाइट में टर्बुलेंस के बाद पायलट के डोप टेस्ट से उठे सवाल, एयरलाइन कंपनी ने दिया ये जवाब
पहले जानें- कब-कैसे हुई एअर इंडिया विमान की घटना, हुआ क्या?
कब और किस विमान के साथ हुई घटना?
यह घटना 4 अगस्त (मंगलवार) की सुबह एअर इंडिया की उड़ान एआई 2379 के साथ हुई, जो थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही थी। इस उड़ान में एयरबस A320नियो विमान का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसमें 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य सवार थे।
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एअर इंडिया विमान में टर्बुलेंस की घटना।
- फोटो : अमर उजाला
कितने घायल, कितना नुकसान?
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- विमान के अचानक इतनी ऊंचाई खोने और लगने वाले भीषण झटके के कारण विमान में सवार कम से कम 17 लोग घायल हो गए, जिनमें 13 यात्री और 4 केबिन क्रू सदस्य शामिल थे।
- केबिन क्रू के दो सदस्यों को रीढ़ की हड्डी और गर्दन के पास गंभीर चोटें आईं। घायल होने के बावजूद क्रू के सदस्यों ने बहादुरी दिखाई और सुरक्षित लैंडिंग तक यात्रियों की मदद की।
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फ्लाइट में किसी पायलट की जांच से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियम क्या हैं?
1. आईसीएओदुनिया में विमानों की सुरक्षा और जांच से जुड़े मानक तैयार करने वाली इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (आईसीएओ) की तरफ से फ्लाइट उड़ाने वाले पायलटों के लिए कई नियम तय किए गए हैं। आईसीएओ के एनेक्स 1 के अध्याय 6 (पैरा 1.2.7.1) के तहत यह स्पष्ट निर्देश है कि लाइसेंसधारक पायलट किसी भी साइकोएक्टिव पदार्थ (ऐसे पदार्थ जो नशा पैदा करते हों) के प्रभाव में फ्लाइट उड़ाने का जोखिम नहीं ले सकते। खासकर उन पदार्थों से जिससे वे सुरक्षित रूप से अपनी उड़ान जिम्मेदारियों को निभाने में असमर्थ हो जाएं या दिक्कत का सामना करें।
इसके अलावा सुरक्षित उड़ान के लिए शरीर में ब्लड अल्कोहल (शराब की मात्रा) का स्तर बिल्कुल 'शून्य' होना चाहिए, जिसकी सिफारिश आईसीएओ भी करता है। दरअसल, शराब का थोड़ा सा स्तर भी शरीर के सेंसर-मोटर प्रतिक्रिया तंत्र को बिगाड़ देता है और ज्यादा ऊंचाई वाले क्षेत्र, जहां ऑक्सीजन की मात्रा आमतौर पर कम होती है, वहां पायलट पर हाइपोक्सिया का खतरा बढ़ जाता है।
2. अमेरिका-यूरोप की विमानन एजेंसी
अमेरिका के संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) और यूरोप के यूरोपीयन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (ईएसए) जैसी प्रमुख विमानन संस्थाएं भी पायलट और क्रू के आकस्मिक (रैंडम) शराब और नशीले पदार्शों के परीक्षण के कड़े नियम लागू करती हैं। अमेरिका के परिवहन विभाग के नियमों के तहत सुरक्षा-संवेदनशील कार्यों में लगे विमानन कर्मियों के लिए आकस्मिक परीक्षण अनिवार्य है।
अमेरिकी एजेंसी की तरफ से इससे जुड़ा एक कार्यक्रम भी चलाया जाता है, जो गोपनीय और सहकर्मियों की मदद पर आधारित रेफरल प्रणाली है। इसका मकसद उन पायलटों की पहचान और इलाज करना है जो नशे की लत से जूझ रहे हैं। इससे पायलट करियर खोने या लाइसेंस रद्द होने के डर के बिना खुद से अपनी समस्या घोषित कर पाते हैं और इलाज के बाद सुरक्षित रूप से काम पर वापस लौट सकते हैं।
अमेरिका के संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) और यूरोप के यूरोपीयन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (ईएसए) जैसी प्रमुख विमानन संस्थाएं भी पायलट और क्रू के आकस्मिक (रैंडम) शराब और नशीले पदार्शों के परीक्षण के कड़े नियम लागू करती हैं। अमेरिका के परिवहन विभाग के नियमों के तहत सुरक्षा-संवेदनशील कार्यों में लगे विमानन कर्मियों के लिए आकस्मिक परीक्षण अनिवार्य है।
अमेरिकी एजेंसी की तरफ से इससे जुड़ा एक कार्यक्रम भी चलाया जाता है, जो गोपनीय और सहकर्मियों की मदद पर आधारित रेफरल प्रणाली है। इसका मकसद उन पायलटों की पहचान और इलाज करना है जो नशे की लत से जूझ रहे हैं। इससे पायलट करियर खोने या लाइसेंस रद्द होने के डर के बिना खुद से अपनी समस्या घोषित कर पाते हैं और इलाज के बाद सुरक्षित रूप से काम पर वापस लौट सकते हैं।
भारतीय नियामकों ने पायलटों के लिए क्या नियम तय किए?
भारत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के विमानन नियमों के तहत पायलटों और क्रू सदस्यों के लिए अत्यंत कड़े सुरक्षा और स्वास्थ्य नियम लागू किए गए हैं, जो विमान और यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं। यह नियम आईसीएओ की गाइंडलाइंस के तहत हैं और इन्हें तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है।
पायलटों के अल्कोहल के इस्तेमाल से जुड़े नियम?
2. साइकोएक्टिव पदार्थों (अन्य डोप) के लिए नियम
सीएआर सेक्शन 5, सीरीज एफ, पार्ट V के तहत सुरक्षा-संवेदनशील विमानन कर्मियों की मानसिक और शारीरिक स्थिति की जांच के लिए ड्रग परीक्षण नियम लागू किए गए हैं। इस जांच में मुख्य रूप से छह नशीले पदार्थों की जांच की जाती है- एम्फैटेमिन, ओपिएट्स, गांजा, कोकीन, बार्बिटुरेट्स और बेंजोडायजेपाइन। आमतौर पर यह जांचें नौकरी शुरू करने से पहले, विमानन प्रशिक्षण संस्थान (एफटीओ) में प्रवेश के समय, दुर्घटना के बाद या औचक आधार पर की जाती है।
कब-कैसे की जा सकती है पायलट-क्रू के नशे से जुड़ी जांचें?
शराब के लिए अनिवार्य परीक्षण जरूरी
प्री-फ्लाइट: भारत से उड़ान भरने वाली सभी शेड्यूल्ड उड़ानों के पायलटों का हवाई अड्डे पर प्री-फ्लाइट ब्रेथ-एनालाइजर टेस्ट अनिवार्य है।पोस्ट-फ्लाइट: भारत के बाहर से आने वाली उड़ानों के लिए, भारत में पहले लैंडिंग पोर्ट पर पायलटों का पोस्ट-फ्लाइट ब्रेथ-एनालाइजर टेस्ट लिया जाता है।
नशीले पदार्थों के लिए रैंडम परीक्षण
- विमानन कंपनियों को हर साल अपने कम से कम 10% उड़ान क्रू और हवाई यातायात नियंत्रकों (एटीसीओ) की औचक ड्रग जांच एक वैज्ञानिक रूप से मान्य औचक तरीके से करनी होती है। यह जांच पायलट की छुट्टी या आराम की अवधि के दौरान नहीं की जा सकती।
- नशीले पदार्थों की जांच के लिए नमूना लेने (मूत्र का नमूना, न्यूनतम 45 मिलीलीटर) और ऑन-साइट स्क्रीनिंग की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से की जाती है और इसे छह महीने तक सुरक्षित रखा जाता है।
विमान दुर्घटना की स्थिति में कौन-कैसे करता है जांच
अगर विमान दुर्घटना हवाई अड्डे के पास या उससे दूर होती है, तो इसके लिए आपातकालीन नियम तय हैं।- हवाई अड्डे या उसके आसपास दुर्घटना होने पर हवाई अड्डे का प्रभारी अधिकारी पायलट और क्रू का तुरंत मेडिकल चेक-अप सुनिश्चित करता है। यह जांच हवाई अड्डे के मेडिकल सेंटर या पास मौजूद अस्पताल के डॉक्टर करते हैं। यहां जांच के लिए रक्त और मूत्र के नमूने लिए जाते हैं।
- हवाई अड्डे से दूर किसी क्षेत्र में दुर्घटना होने पर अगर घटनास्थल पर पुलिस प्रशासन पहले पहुंचता है, तो जीवित बचे हुए क्रू सदस्यों के रक्त और मूत्र के नमूने स्थानीय पुलिस अधिकारी करीब के अस्पताल में डॉक्टरों के जरिए लेते हैं। इन नमूनों को स्थानीय फॉरेंसिक लैब भेजा जाता है।
- लैब से रिपोर्ट सीधे विमानन कंपनी के मेडिकल इन-चार्ज और डीजीसीए को एक साथ भेजी जाती है। अगर टेस्ट 'नॉन-नेगेटिव' है, तो एक मेडिकल रिव्यू ऑफिसर (एमआरओ) पायलट से संपर्क कर यह जांच करता है कि कहीं यह परिणाम किसी डॉक्टर की दवा प्रिस्क्रिप्शन के कारण तो नहीं आए।
पॉजिटिव आने या टेस्ट से इनकार करने पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
पहली बार पॉजिटिव आने पर: पायलट को तुरंत पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है और वे केवल एक नेगेटिव डोप रिपोर्ट और मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही ड्यूटी पर वापस लौट सकते हैं।पहली बार जांच से इनकार करना: इसे सकारात्मक परीक्षण की तरह ही गंभीर माना जाता है और पायलट का लाइसेंस 1 साल के लिए निलंबित कर दिया जाता है।
दूसरी बार उल्लंघन/इनकार: लाइसेंस को 3 साल के लिए निलंबित कर दिया जाता है।
तीसरी बार उल्लंघन: लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है।
बीमारी में दवा लेने से जुड़े क्या हैं नियम?
डीजीसीए के मेडिकल सर्कुलर नं. 2 (2021) के मुताबिक, पायलटों की ओर से सामान्य सर्दी, दर्द या एलर्जी के लिए खुद से ली जाने वाली दवाएं उनके निर्णय लेने के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं। साल 2010 में हुए एअर इंडिया एक्सप्रेस वीटी-एएक्सवी हादसे के पीछे मुख्य कारण पायलट का पेट खराब और गले में खराश के लिए खुद से दवा लेना था, जिससे उड़ान के समय उन्हें सुस्ती आ गई थी।
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अगर किसी पायलट ने कोई ऐसी दवा ली है, जिसका संभावित असर हो सकता है, तो उसे अपनी अंतिम खुराक लेने के बाद कम से कम 5 डोज के अंतरालों तक खुद को ग्राउंड (उड़ान से दूर) रखना होगा। उदाहरण के लिए अगर कोई दवा दिन में तीन बार लेनी है (यानी हर 8 घंटे में), तो पायलट को अंतिम खुराक के बाद कम से कम 40 घंटे के लिए ग्राउंडेड रहना होगा। अगर दवा दिन में दो बार लेनी है (हर 12 घंटे पर), तो न्यूनतम ग्राउंड टाइम 60 घंटे होगा।
इसके अलावा पायलटों को स्व-चिकित्सा से पूरी तरह बचने और किसी भी मामूली बीमारी के लिए केवल विमानन क्षेत्र के डॉक्टर (एएमई या कंपनी डॉक्टर) से ही सलाह लेने के निर्देश दिए गए हैं।
भारत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के विमानन सुरक्षा नियमों के तहत, पायलटों की शारीरिक और मानसिक योग्यता सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रावधान तय हैं। शराब के नशे में और अन्य नशीले पदार्थों के इस्तेमाल करने वाले पायलटों के लिए सजा के अलग-अलग नियम हैं।
इसके अलावा पायलटों को स्व-चिकित्सा से पूरी तरह बचने और किसी भी मामूली बीमारी के लिए केवल विमानन क्षेत्र के डॉक्टर (एएमई या कंपनी डॉक्टर) से ही सलाह लेने के निर्देश दिए गए हैं।
अगर पायलटों ने नियम तोड़े तो क्या हो सकती है सजा?
भारत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के विमानन सुरक्षा नियमों के तहत, पायलटों की शारीरिक और मानसिक योग्यता सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रावधान तय हैं। शराब के नशे में और अन्य नशीले पदार्थों के इस्तेमाल करने वाले पायलटों के लिए सजा के अलग-अलग नियम हैं।
1. अल्कोहल परीक्षण नियमों के उल्लंघन पर सजा
उड़ान से पहले (प्री-फ्लाइट) या उड़ान के बाद (पोस्ट फ्लाइट) किए जाने वाले सांस के परीक्षण (ब्रेथ एनालाइजर) में पॉजिटिव पाए जाने या टेस्ट छोड़ने पर लाइसेंस निलंबन और सजा के अलग-अलग नियम हैं।
एअर इंडिया टर्बुलेंस।
- फोटो : अमर उजाला
2. साइकोएक्टिव पदार्थों (ड्रग/डोप टेस्ट) के नियमों के उल्लंघन पर सजा
विमान चालकों के नशीले पदार्थों के परीक्षण में पॉजिटिव होने या जांच से इनकार करने पर लाइसेंस रद्द करने से लेकर जेल तक की सजा का प्रावधान है।ड्रग टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो
पहली बार: पायलट को तुरंत सुरक्षा-संवेदनशील ड्यूटी से हटा दिया जाता है और विशेषज्ञ चिकित्सक या नशामुक्ति/पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है। ड्यूटी पर वापस लौटने की अनुमति केवल तभी मिलती है जब परीक्षण रिपोर्ट नकारात्मक आए और मेडिकल इन-चार्ज से फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त हो।
दूसरी बार: पायलट का लाइसेंस 3 साल के लिए निलंबित कर दिया जाता है।
तीसरी बार: पायलट का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया जाता है।
ड्रग टेस्ट देने से इनकार करने पर
पहली बार: पायलट को ड्यूटी से हटाकर टेस्ट क्लियर करने के लिए 48 घंटे का समय दिया जाता है। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उनका लाइसेंस 1 साल के लिए निलंबित कर दिया जाता है और उन्हें अनिवार्य पुनर्वास से गुजरना पड़ता है।
दूसरी बार: लाइसेंस 3 साल के लिए निलंबित।
तीसरी बार: लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द।