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'अलग ड्रोन फोर्स नहीं बनाएंगे': वायुसेना प्रमुख ने बताया भविष्य का प्लान; कैप्टन स्मित की बहादुरी पर भी बोले

Sat, 03 Oct 2026 02:03 PM IST
शिवम गर्ग एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 03 Oct 2026 02:03 PM IST
सार

वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने ड्रोन को लेकर वायुसेना की रणनीति स्पष्ट करते हुए अलग ड्रोन फोर्स बनाने से इनकार किया। उन्होंने ड्रोन को अन्य हथियार प्रणालियों के साथ एकीकृत करने पर जोर दिया। साथ ही लड़ाकू विमानों की घटती संख्या और AMCA में देरी पर भी बात की। आखिर वायुसेना के भविष्य की रणनीति क्या है? आइए, जानते हैं...

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Air Chief Marshal AP Singh says Drones Are Evolutionary, Rules Out Separate Drone Force, News in Hindi
वायुसेना प्रमुख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारतीय वायुसेना की वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ड्रोन को लेकर वायुसेना की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई नई या क्रांतिकारी क्षमता नहीं हैं, बल्कि यह लंबे समय से मौजूद क्षमताओं के विस्तार का हिस्सा हैं।

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उन्होंने कहा कि वायुसेना में ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की संख्या, प्रकार और क्षमताएं लगातार बढ़ाई जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने अलग से ड्रोन फोर्स बनाए जाने की संभावना से इनकार किया।
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अलग ड्रोन फोर्स क्यों नहीं?
एपी सिंह ने कहा कि ड्रोन और अन्य हथियार प्रणालियों को अलग-अलग काम करने के बजाय एक साथ इस्तेमाल करना ज्यादा प्रभावी होगा। उनके मुताबिक, युद्ध के मैदान में अलग-अलग हथियारों को एक-दूसरे से अलग रखकर संचालन करने के बजाय उनके बीच तालमेल जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि ड्रोन को मौजूदा व्यवस्था का हिस्सा बनाकर दूसरे हथियारों और प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। वायुसेना में पहले से ऐसी क्षमताओं के लिए विशेष इकाइयां मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।

'लोइटरिंग म्यूनिशन ने मचाया था असर'
वायुसेना प्रमुख ने लोइटरिंग म्यूनिशन की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन हथियारों ने अराजकता पैदा करने और कुछ एयर डिफेंस संपत्तियों को निशाना बनाने में मदद की थी। उन्होंने दोहराया कि ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन भारतीय वायुसेना की क्षमताओं का हिस्सा कई दशकों से रहे हैं। अब इनकी संख्या के साथ-साथ इनके प्रकार और क्षमताओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को सराहा
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि स्मित ने जिस तरह की हिम्मत दिखाई, वह बेहद खास है और हर भारतीय को उन पर गर्व है। एपी सिंह ने कहा कि कैप्टन मच्छार ने मुश्किल हालात में शारीरिक और मानसिक मजबूती का शानदार परिचय दिया। उन्होंने जिस साहस के साथ स्थिति का सामना किया, वह दूसरों के लिए भी सीख है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि संकट के समय धैर्य बनाए रखना और सही फैसला लेना बेहद जरूरी होता है। कैप्टन मच्छार ने अपने साहस और दृढ़ता से यह साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में हिम्मत और सूझबूझ कितनी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि कैप्टन मच्छार की कार्रवाई से देश के लोगों को प्रेरणा मिलती है।

लड़ाकू विमानों की घटती संख्या पर भी बोले
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की संख्या को लेकर भी स्थिति बताई। उन्होंने स्वीकार किया कि वायुसेना के विमानों की संख्या घट रही है और जिन विमानों के समय पर शामिल होने की उम्मीद थी, उनकी डिलीवरी में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि वायुसेना इस अंतर को पाटने के लिए तेजस मार्क-1A, मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) और भविष्य के मार्क-2 लड़ाकू विमान जैसे प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है।

AMCA में देरी हुई तो दूसरे विकल्प भी देखे जा सकते हैं
वायुसेना प्रमुख ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA कार्यक्रम को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर इस कार्यक्रम में और देरी होती है तो वायुसेना को दूसरे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि रूस की ओर से Su-57 की पेशकश की गई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।


'पूरे देश का प्रयास जरूरी'
एपी सिंह ने कहा कि बड़े विमानन कार्यक्रमों को समय पर पूरा करने और उनकी परिचालन क्षमता सुनिश्चित करने के लिए ‘पूरे देश के प्रयास’ वाला दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रमुख विमान कार्यक्रमों में समय पर डिलीवरी और परिचालन क्षमता हासिल करना महत्वपूर्ण है, ताकि वायुसेना की मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

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