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तलाक के समान आधार की मांग वाली याचिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा एआईएमपीएलबी  

Sat, 13 Feb 2021 09:10 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sat, 13 Feb 2021 09:10 PM IST
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AIMPLB reaches Supreme Court against plea seeking equal grounds for divorce
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : सोशल मीडिया

देश के सभी नागरिकों के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने संविधान और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की भावना को ध्यान में रखते हुए, “तलाक के समान आधार” की मांग वाली याचिका के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 

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बोर्ड ने भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका का विरोध किया है। बता दें, अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने अपनी अर्जी में तलाक के लिए समान आधार तय करने का अनुरोध किया था।

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इसके लिए उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 44 पर पर्सनल लॉ खरा नहीं उतरता है। अपनी अर्जी में किए गए अनुरोध को लागू करने की मांग करते हुए उपाध्याय ने कहा, ‘‘आवेदक यह निवेदन करना चाहता है कि संविधान के अनुच्छेद 13 की भावना और ‘परंपरा और उपयोग’ धार्मिक भावना के आधार पर पर्सनल लॉ को शामिल नहीं करता है।’’
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याचिका में कहा गया है, ‘‘संविधान सभा को पर्सनल लॉ और परंपरा व उपयोग के बीच का फर्क पता था और उन्होंने सोच-समझ कर संविधान के अनुच्छेद-13 से पर्सनल लॉ को बाहर रखने और उसमें परंपरा और उपयोग को शामिल करने का निर्णय लिया।’’ 

बोर्ड ने अपनी अर्जी में कहा है कि हिंदुओं में भी विवाह और तलाक से जुड़े कानून समान नहीं हैं और ऐसे में वैधानिक रूप से परंपराओं की रक्षा की गई है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 16 दिसंबर को उपाध्याय की अर्जी पर केंद्र को नोटिस जारी किया था।

अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने याचिका में केंद्र से तलाक के कानूनों में विसंगतियों को दूर करने और धर्म, जाति, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी पक्षपात के बिना सभी नागरिकों के लिए समान बनाने के लिए कदम उठाने की मांग की है।


उन्होंने आदलत से कहा, “अदालत यह घोषणा कर सकती है कि तलाक का भेदभावपूर्ण आधार अनुच्छेद 14, 15, 21 का उल्लंघन है और सभी नागरिकों के लिए कोर्ट ‘यूनिफॉर्म ग्राउंड ऑफ तलाक’ के लिए दिशानिर्देश दे सकती है जबकि संविधान का अनुच्छेद 13 उन कानूनों से संबंधित है जो मौलिक अधिकारों के साथ असंगत या अपमानजनक हैं।वहीं, अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है। इसके अलावा अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है जबकि अनुच्छेद 44 नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता के बारे में बात करता है।”

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