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'अगर पूर्व सीजेआई...': अजमेर दरगाह विवाद पर फिर फूटा ओवैसी का गुस्सा, कहा- PM मोदी भी हर साल चढ़ाते हैं चादर
Mon, 02 Dec 2024 12:53 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Mon, 02 Dec 2024 12:53 PM IST
सार
राजस्थान की एक अदालत ने हाल ही में अजमेर शरीफ दरगाह को शिव मंदिर बताने वाली याचिका को स्वीकार कर उस पर सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है। इसी को लेकर लगातार विवाद बढ़ता जा रहा है।
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एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी
- फोटो : ANI
विस्तार
अजमेर शरीफ दरगाह के शिव मंदिर होने के दावे पर विवाद गहराता जा रहा है। एआईएमआईएम नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी इस मुद्दे को लेकर लगातार भड़के हुए हैं। उनका कहना है कि दरगाह 800 साल पुरानी है।
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यह है मामला
गौरतलब है, बुधवार को राजस्थान की एक अदालत ने अजमेर शरीफ दरगाह को शिव मंदिर बताने वाली याचिका को स्वीकार कर उस पर सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया था। सुनवाई के लिए 20 दिसंबर का दिन तय किया है। यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के हाल ही में अदालत के आदेश पर सर्वे कराए जाने के बाद हुआ है। इस सर्वे के कारण यहां विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे और कथित तौर पर पुलिस की गोलीबारी में एक नाबालिग सहित पांच मुसलमानों की मौत हो गई थी।
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राजस्थान में यह याचिका हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता ने दायर की है। इसके बाद अजमेर की एक निचली अदालत ने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को समर्पित दरगाह के परिसर में शिव मंदिर होने के दावों के संबंध में तीन संस्थाओं को नोटिस जारी किए हैं।
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पिछले 800 साल से दरगाह....
उन्होंने कहा, 'दरगाह पिछले 800 साल से है। अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल के दौरान यह मौजूद है। इसका उल्लेख 13वीं शताब्दी में अमीर खुसरो की पुस्तक में किया गया है और 800 साल बाद आप कह रहे हैं कि यह दरगाह नहीं है। अब क्या बचेगा?दरगाह शरीफ में तो हर साल नरेंद्र मोदी चादर चढ़ाते हैं, भिजवाते हैं। कई प्रधानमंत्रियों ने चादर भिजवाई हैं। हमारे दो पड़ोसी देशों का एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल हर साल दरगाह आता है। यह सब कहां रुकेगा? अगर कल को जैन और बौद्ध समुदायों के लोग अदालत में जाकर दावा करते हैं कि कुछ स्थान उनके धार्मिक स्थल हैं, तो क्या होगा?
भाजपा पर साधा निशाना
उन्होंने आगे कहा, 'नरेंद्र मोदी सरकार क्या जवाब देगी, वे भी चादर भेजते हैं। नरेंद्र मोदी ने 10 साल में 10 चादर भेजी हैं। वह कैसे उत्तर देंगे? भाजपा-आरएसएस को इसे रोकना चाहिए। यह देश के हित में नहीं है।'
क्या पीएम के घर की खुदाई कर डालेंगे?
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, मैं कल जाकर अर्जी डाल दूं कि प्रधानमंत्री के घर के नीचे मस्जिद थी तो क्या खुदाई का आदेश दे देंगे? कल को बोल दूंगा संसद के नीचे कुछ और है तो क्या खुदाई का आदेश मिल जाएगा? आप देश को कहां लेकर जाना चाहते हैं? इस तरह से कोई भी गलत बातें लिख देगा?
एआई नहीं एएसआई करते रहना है...
एआईएमआईएम नेता ने मजाकिया लहजे में कहा कि हमें एआई के बारे में भूल जाना चाहिए और केवल एएसआई के बारे में बात करनी चाहिए। कृत्रिम बुद्धि के बारे में बात मत करो; बस एएसआई, एएसआई करते रहो और बस खुदाई करते रहो। दिल्ली में भाजपा के एक नेता के घर के नीचे सैकड़ों साल पुराने ढांचे भी पाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा, 'इसी तरह एक सभ्यता आगे बढ़ती है, यह भारत को कमजोर कर रही है। अन्य मुद्दे भी हैं, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की मौत और चीन मजबूत हो रहा है। लेकिन आप इन सबमें फंस गए हैं।'
पूर्व सीजेआई पर लगाया आरोप
एआईएमआईएम नेता ने कहा कि उन्होंने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि फैसले के बाद चेतावनी दी थी कि इस तरह के मुद्दे सामने आएंगे। अगर डीवाई चंद्रचूड़ ने इसे रोक दिया होता, तो यह अध्याय खत्म हो जाता। उन्होंने गलत मौखिक टिप्पणियां कीं। इसलिए अब 15 जगहों पर इस तरह की कोशिश हो रही है।
क्या बोला था चंद्रचूड़ ने?
एआईएमआईएम नेता ज्ञानवापी मामले की सुनवाई के दौरान भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों का जिक्र कर रहे थे। तब जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि 1991 का पूजा स्थल अधिनियम किसी स्थान के धार्मिक चरित्र का पता लगाने पर रोक नहीं लगाता है। उन्होंने कहा था कि अधिनियम कहता है कि आप स्थान की प्रकृति को बदल या परिवर्तित नहीं कर सकते। वे स्थान के रूपांतरण की मांग नहीं कर रहे हैं। सवाल यह है कि 15 अगस्त, 1947 तक उस स्थान की स्थिति क्या थी। 1991 में लागू किया गया यह प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता।
ओवैसी ने कहा, 'लोग कहते हैं कि पता लगाने में क्या समस्या है। क्या यह एक अकादमिक अभ्यास है? आप इसे बदलना चाहते हैं।'
अजमेर शरीफ दरगाह को लेकर किताब में कही गई ये बात
दरअसल, सिविल कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी एएसआई को नोटिस भेजा है। इस याचिका में रिटायर्ड जज हरबिलास सारदा की 1911 में लिखी किताब अजमेर: हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव का हवाला देते हुए दरगाह के निर्माण में मंदिर का मलबा होने का दावा किया गया है। साथ ही गर्भगृह और परिसर में एक जैन मंदिर होने की बात भी कही जा रही है। अब हिंदू संगठनों के दावे के बाद से इस पर सियासत तेज हो गई है।
याचिकाकर्ता के वकील रामस्वरूप बिश्नोई ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश हरविलास शारदा की पुस्तक का हवाला दिया, जिसमें बताया गया है कि दरगाह के निर्माण में हिंदू मंदिर के मलबे का इस्तेमाल किया गया था। पुस्तक में दरगाह के भीतर एक तहखाने का विवरण दिया गया है, जिसमें कथित तौर पर एक शिव लिंग होने का दावा है। पुस्तक में दरगाह की संरचना में जैन मंदिर के अवशेषों का भी उल्लेख किया गया है और इसके 75 फीट ऊंचे बुलंद दरवाजे के निर्माण में मंदिर के मलबे के तत्वों का भी इसमें वर्णन है।
कहा गया है कि इस शिवलिंग की पारंपरिक रूप से एक ब्राह्मण परिवार पूजा करता है, और दरगाह के 75 फीट ऊंचे बुलंद दरवाजे की संरचना में जैन मंदिर के अवशेषों की उपस्थिति का संकेत देता है। याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से दरगाह का सर्वेक्षण करने का भी अनुरोध किया गया है, जिसमें उस क्षेत्र में फिर से पूजा-अर्चना की जा सके जहां शिवलिंग बताया जाता है।
अजमेर के बारे में रोचक तथ्य यह भी है कि यहां पृथ्वीराज चौहान ने भी शासन किया था। जज हरविलास ने बताया कि अजमेर महायोद्धा पृथ्वीराज चौहान के वंशजो ने ही यह मंदिर बनाया था।
क्या है याचिकाकर्ता का दावा?
वादी विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता योगेश सिरोजा ने बताया कि वाद पर दीवानी मामलों के न्यायाधीश मनमोहन चंदेल की अदालत में सुनवाई हुई। सिरोजा ने कहा, 'दरगाह में एक शिव मंदिर होना बताया जा रहा है। उसमें पहले पूजा पाठ होता था… पूजा पाठ दोबारा शुरू करवाने के लिये वाद सितंबर 2024 में दायर किया गया। अदालत ने वाद स्वीकार करते हुए नोटिस जारी किए हैं।'
उन्होंने बताया कि इस संबंध में अजमेर दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) कार्यालय-नयी दिल्ली को समन जारी हुए हैं। वादी विष्णु गुप्ता ने कहा, ''हमारी मांग थी कि अजमेर दरगाह को संकट मोचन महादेव मंदिर घोषित किया जाये और दरगाह का किसी प्रकार का पंजीकरण है तो उसको रद्द किया जाए। उसका सर्वेक्षण एएसआई के माध्यम से किया जाए और वहां पर हिंदुओं को पूजा पाठ करने का अधिकार दिया जाए।''