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CAA का विरोध जारी: अब ओवैसी बोले- इसके जरिए अपने ही देश में अल्पसंख्यकों और एससी -एसटी को किया जा रहा परेशान

Wed, 20 Mar 2024 11:19 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 20 Mar 2024 11:19 PM IST
सार

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ एक बार फिर बयानबाजी की है। उन्होंने कहा है कि अपने ही देश में अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और दलितों को परेशान करने के लिए सीएए, एनआरसी और एनपीआर लाया जा रहा है।
 

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AIMIM chief Asaduddin Owaisi Says CAA, NRC and NPR being brought to trouble minorities, tribals, and Dalits
एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संसद से पारित होने के चार साल से अधिक समय बाद आखिरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम से जुड़े नियम लागू हो गए हैं।वहीं, विपक्ष लगातार इसके विरोध में बयानबाजी कर रहा है। इसी क्रम में एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर को दलित विरोधी करार दिया है। उन्होंने कहा कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर केवल अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और दलितों को परेशान करने के लिए और उन्हें दबाने के लिए लाए जा रहे हैं। 

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छत्रपति संभाजीनगर में अपनी पार्टी के नेताओं के साथ एक बैठक के बाद ओवैसी ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और एनआरसी को सीएए के आलोक में देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कदम अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों को उनके अपने देश में परेशान करने के एकमात्र मकसद से लाए जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी के एक मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि देश में एनआरसी और एनपीआर लागू किया जाएगा।
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इस दौरान हिमंता बिस्वा सरमा पर आरोप लगाते हुए ओवैसी ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री कहते हैं कि सीएए के माध्यम से हिंदुओं को नागरिकता दी जाएगी। लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय के 1.5 लाख लोगों को केस लड़ना होगा। भारत में केवल 5 प्रतिशत लोग पासपोर्ट धारक हैं। यह अल्पसंख्यकों, एससी और एसटी को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने अपना रुख स्पष्ट करते हुए केंद्र से सवाल भी किया। ओवैसी ने कहा कि वह प्रताड़ित हिंदुओं और सिखों को भारत में नागरिकता मिलने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बतियों का क्या होगा? सरकार को यह साफ करना चाहिए कि क्या 2014 की सीएए कट-ऑफ तारीख के बाद भारत में आने वाले लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा। 
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क्यों हो रहा है सीएए का विरोध
नागरिकता संशोधन कानून 2019 के तहत सरकार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वाले शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इस कानून के तहत हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है, लेकिन इस कानून से मुस्लिम वर्ग को बाहर रखा गया है। इसी वजह से इस कानून का विरोध हो रहा है। कानून का विरोध करने वाले लोगों का आरोप है कि इसमें धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, जो कि भारतीय संविधान के खिलाफ है। हालांकि सरकार का तर्क है कि सीएए में किसी की नागरिकता छीनने का प्रावधान नहीं है और सरकार ने साफ कहा है कि सीएए कानून वापस नहीं होगा। 

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