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एम्स की चौंकाने वाली स्टडी: मोबाइल की लत, जंक फूड से स्कूली बच्चियों में तेजी से बढ़ रही पीसीओएस की दिक्कत
Tue, 22 Sep 2026 08:49 PM IST
राहुल कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 22 Sep 2026 08:49 PM IST
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मोबाइल से सेहत को नुकसान।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मोबाइल पर घंटों बिताना, जंक फूड की बढ़ती आदत और शारीरिक गतिविधि कम होना किशोरियों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। इसका असर हार्मोन पर भी दिख रहा है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) इसी से जुड़ी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रहा है। एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों ने 4000 स्कूली बच्चियों पर एक बड़ा अध्ययन शुरू किया है। इसकी शुरुआती रिपोर्ट चौंकाने वाली है।
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इसमें मालूम चला है कि हर 100 में से करीब 3 से 8 किशोरियों में पीसीओएस की समस्या है। वयस्क महिलाओं में यह आंकड़ा करीब 5 से 18 फीसदी तक मिला। एम्स नई दिल्ली की पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. रजनी शर्मा के मुताबिक, बदलती जीवनशैली से किशोरियों में हार्मोन से जुड़ी समस्याएं बढ़ रहीं हैं। ज्यादा कैलोरी वाला भोजन, मीठे और प्रॉसेस्ड फूड, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद की गड़बड़ी आने वाले दिनों में इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।
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अचानक वजन बढ़ना भी संकेत
एम्स की पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. वंदना जैन ने बताया कि पीसीओएस को लेकर बच्चे के जन्म से ही ध्यान देना होगा। जन्म के समय अगर वजन कम है और फिर बाद में अचानक बढ़ने लगता है तो इसका मतलब ये नहीं कि बच्चा स्वस्थ्य है। उन्होंने ये भी कहा कि केवल वजन बढ़ना ही समस्या नहीं है। कई किशोरियों में पेट के आसपास चर्बी बढ़ सकती है। सामान्य वजन होने पर भी पेट की चर्बी ज्यादा हो सकती है। शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता कम हो सकती है। आगे चलकर शुगर, रक्तचाप और वसा से जुड़ी दिक्कतों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा माहवारी में गड़बड़ी, चेहरे पर मुंहासे, शरीर और चेहरे पर जरूरत से ज्यादा बाल आना और सिर के बाल पतले होना भी इसके संकेत हो सकते हैं। कुछ किशोरियों में आगे चलकर गर्भधारण में दिक्कत भी हो सकती है।
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मोबाइल और जंक फूड के साथ कम हो रही शारीरिक गतिविधि
एम्स की एनाटॉमी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. रीमा दादा ने बताया कि पीसीओएस समस्या को केवल किसी एक कारण से नहीं जोड़ा जा सकता। आनुवंशिक कारणों के साथ बचपन की परिस्थितियां, हार्मोन, खानपान और जीवनशैली भी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बचाव का सबसे अच्छा तरीका अनियंत्रित स्क्रीन टाइम पर रोक लगाना, हेल्दी भोजन लेना और नियमित योग करना है। डॉ. रीमा के अनुसार, योग से अनियमित माहवारी जैसी समस्या को भी रोका जा सकता है। इसके अलावा शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाई जा सकती है। योग से नींद अच्छी आएगी और शरीर में होने वाली कई बीमारियां भी खुद ब खुद ठीक हो जाएंगी।
माहवारी को लेकर रखें ध्यान
डॉ. रजनी ने बताया कि सिर्फ माहवारी अनियमित होने से पीसीओएस नहीं माना जा सकता। पुरुष हार्मोन यानी एंड्रोजन की अधिकता के संकेत भी देखने होंगे। पहली माहवारी के बाद पहले साल में अनियमित चक्र सामान्य हो सकता है। इसके बाद नियम बदल जाते हैं। पहली माहवारी के 1 से 3 साल के बीच 21 दिन से कम या 45 दिन से ज्यादा का चक्र अनियमित माना जाता है। तीन साल बाद 21 दिन से कम या 35 दिन से ज्यादा का चक्र अनियमित माना जाता है। साल में आठ से कम बार माहवारी आना भी संकेत है। किसी एक चक्र में 90 दिन से ज्यादा का अंतर भी जांच की वजह है।
ये लक्षण दिखे तो तुरंत हो जाएं सावधान
- चेहरे पर लगातार या गंभीर मुंहासे
- चेहरे, छाती, पेट या पीठ पर जरूरत से ज्यादा बाल आना
- सिर के बीच से बाल पतले होने या झड़ने की समस्या