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जयललिता के बाद कौन होगा पार्टी का मुखिया, इसका फैसला जल्द
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 10 Dec 2016 04:31 PM IST
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एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता सी. पोन्नैयन
- फोटो : ANI
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एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता सी. पोन्नैयन ने शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी का नया महासचिव जल्द ही सर्वसम्मति से चुना जाएगा। इससे पहले जयललिता पार्टी के महासचिव के पद पर थीं, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री का 5 दिसंबर को निधन हो गया।
अफवाहें जोरों पर हैं कि अगर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, तो लंबे समय से जयललिता की सहयोगी रहीं शशिकला पार्टी की नई प्रमुख हो सकती हैं, जबकि ओ. पन्नीरसेल्वम ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली है, शशिकला के समर्थकों का कहना है कि वह पार्टी प्रमुख के लिए स्वाभाविक पसंद हैं।
दूसरे दावेदारों में लोकसभा के डिप्टी स्पीकर एम. थम्बीदुरई और वरिष्ठ नेता के.ए. सेनगोट्टैयन हैं। हालांकि पोन्नैयन ने संकेत दिया है कि पार्टी प्रमुख पद के चुनाव के लिए कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होगी।
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पोन्नैयन ने कहा, 'अम्मा के नेतृत्व में पार्टी एकजुट थी और आने वाले दिनों में भी एकजुट रहेगी। हम सर्वसम्मति से पार्टी के नए प्रमुख का चुनाव करेंगे।'
जयललिता ने पार्टी पर मजबूत पकड़ रखते हुए शासन किया। अपने नेतृत्व में उन्होंने दूसरी पंक्ति के नेताओं को पनपने का मौका नहीं दिया, जबकि पन्नीरसेल्वम उनकी कैबिनेट में वित्तमंत्री थे और दो बार मुख्यमंत्री भी रहे, जब जयललिता करप्शन के आरोप में जेल गईं।
जहां तक शशिकला की बात है, तो पिछले दो दशक से वह जयललिता के साथ थीं। हालांकि दोनों के बीच मतभेद भी रहे। जयललिता की मृत्यु के बाद शशिकला पोयस गॉर्डेन में ही रह रहीं हैं।
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अफवाहें जोरों पर हैं कि अगर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, तो लंबे समय से जयललिता की सहयोगी रहीं शशिकला पार्टी की नई प्रमुख हो सकती हैं, जबकि ओ. पन्नीरसेल्वम ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल ली है, शशिकला के समर्थकों का कहना है कि वह पार्टी प्रमुख के लिए स्वाभाविक पसंद हैं।
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दूसरे दावेदारों में लोकसभा के डिप्टी स्पीकर एम. थम्बीदुरई और वरिष्ठ नेता के.ए. सेनगोट्टैयन हैं। हालांकि पोन्नैयन ने संकेत दिया है कि पार्टी प्रमुख पद के चुनाव के लिए कोई प्रतिस्पर्धा नहीं होगी।
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पोन्नैयन ने कहा, 'अम्मा के नेतृत्व में पार्टी एकजुट थी और आने वाले दिनों में भी एकजुट रहेगी। हम सर्वसम्मति से पार्टी के नए प्रमुख का चुनाव करेंगे।'
जयललिता ने पार्टी पर मजबूत पकड़ रखते हुए शासन किया। अपने नेतृत्व में उन्होंने दूसरी पंक्ति के नेताओं को पनपने का मौका नहीं दिया, जबकि पन्नीरसेल्वम उनकी कैबिनेट में वित्तमंत्री थे और दो बार मुख्यमंत्री भी रहे, जब जयललिता करप्शन के आरोप में जेल गईं।
जहां तक शशिकला की बात है, तो पिछले दो दशक से वह जयललिता के साथ थीं। हालांकि दोनों के बीच मतभेद भी रहे। जयललिता की मृत्यु के बाद शशिकला पोयस गॉर्डेन में ही रह रहीं हैं।