फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ai summit india first space data center ready by year end private company unveils real model

AI Summit: वर्ष के अंत तक अंतरिक्ष में देश का पहला डाटा सेंटर होगा तैयार, निजी कंपनी ने दिखाया वास्तविक मॉडल

Thu, 19 Feb 2026 05:06 AM IST
निर्मल कांत यश, नई दिल्ली।
यश, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 19 Feb 2026 05:06 AM IST
सार

AI Summit: भारत इस साल के अंत तक नीवक्लाउड और अग्निकुल कॉसमॉस के माध्यम से अंतरिक्ष में पहला निजी ऑर्बिटल एआई डाटा सेंटर लॉन्च करने जा रहा है, जो लागत कम करेगा, डाटा प्रोसेसिंग तेज करेगा और प्राकृतिक आपदाओं में ज्यादा सुरक्षित रहेगा। पढ़ें रिपोर्ट-

विज्ञापन
ai summit india first space data center ready by year end private company unveils real model
इसी रॉकेट से भेजा जाएगा डाटा सेंटर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

भारत की स्पेस टेक्नोलॉजी और एआई की दुनिया में इस साल के अंत तक एक क्रांतिकारी अध्याय जुड़ सकता है। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के नक्शेकदम अब भारतीय स्टार्टअप नीवक्लाउड और चेन्नई स्थित अग्निकुल कॉसमॉस अंतरिक्ष में भारत का पहला निजी ऑर्बिटल एआई डाटा सेंटर लॉन्च करने के लिए तैयार हैं।
विज्ञापन


इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान नीवक्लाउड ने इसका वास्तविक वर्जन हॉल नंबर 4 में पेश किया है। कंपनी का कहना है कि इससे लागत बचेगी और डाटा प्रवाह तेजी होगा। इसके साथ ही यह प्राकृतिक आपदाओं के वक्त जमीन पर स्थापित डाटा सेंटर की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होगा।
विज्ञापन


जमीन की बाधाओं को पीछे छोड़ेगा अंतरिक्ष
नीवक्लाउड के सीईओ व संस्थापक नरेंद्र सेन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि पृथ्वी पर डाटा सेंटर बनाने में करीब 24 महीने का समय और भारी लागत लगती है। अंतरिक्ष में डाटा सेंटर होने से यह प्रक्रिया तेज और किफायती हो जाएगी। इसे पृथ्वी की निचली कक्षा (लोअर अर्थ ऑर्बिट) में 250 किमी की ऊंचाई पर तैनात किया जाएगा। यह पारंपरिक डाटा सेंटर्स की तुलना में डाटा प्रोसेसिंग को अधिक गति प्रदान करेगा। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि दिल्ली से मुंबई के बीच जमीन पर डाटा ट्रांसफर में 15-20 मिली सेकंड लगते हैं, वहीं अंतरिक्ष से यह काम मात्र 2.5 मिली सेकंड में संभव होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: गूगल डीपमाइंड के सीईओ हसाबिस बोले- विज्ञान-चिकित्सा में आएगी क्रांति, 5-8 साल में एजीआई बनेगा हकीकत

स्वदेशी तकनीक और साझा हार्डवेयर
इस मिशन की सबसे खास बात aकि इसमें अलग से सैटेलाइट भेजने के बजाय रॉकेट के ऊपरी हिस्से का ही डाटा सेंटर प्लेटफॉर्म के रूप में उपयोग किया जाएगा। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि अंतरिक्ष में कचरा भी नहीं बढ़ेगा। मिशन के लिए 3डी-प्रिंटेड रॉकेट का इस्तेमाल होगा और पहला पायलट प्रोजेक्ट 2026 के अंत तक लॉन्च करने की योजना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed