Ahmed Patel: राजीव के विश्वासपात्र, सोनिया के संकटमोचक 'एपी' तीन बार लोकसभा, पांच बार राज्यसभा चुनाव जीते, जानें कैसा रहा उनका सियासी सफर

anwar ansari न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 25 Nov 2020 10:06 AM IST
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संसद परिसर में अहमद पटेल (फाइल फोटो)
संसद परिसर में अहमद पटेल (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का बुधवार सुबह 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अक्तूबर में पटेल वायरस की चपेट में आए थे और उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राजनीतिक गलियारों में उन्हें 'एपी' और 'अहमद भाई' के रूप में जाना जाता था। 
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वह राजीव गांधी के विश्वासपात्र तो सोनिया गांधी के संकटमोचक रहे। कांग्रेस को कई सियासी संकटों से उबारने में उनकी अहम भूमिका रही। 

अहमद पटेल को सोनिया गांधी के करीबी नेताओं के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कई वर्षों तक सोनिया के राजनीतिक सचिव के रूप में कार्य किया। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन के 10 सालों के शासन के दौरान वह प्रमुख रणनीतिकार थे। पटेल कभी भी मनमोहन सिंह कैबिनेट के सदस्य नहीं रहे, लेकिन कहा जाता था कि उनके पास किसी कैबिनेट मंत्री से अधिक शक्तियां थीं।  


26 साल की उम्र में ही बन गए सांसद
गुजरात के भरूच जिले की अंकलेश्वर तहसील के पिरामण गांव में 21 अगस्त, 1949 को अहमद पटेल का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम मोहम्मद इशाक पटेल और माता का नाम हवाबेन पटेल था। अहमद पटेल को सियासी बिसात का होनहार खिलाड़ी माना जाता था। अहमद पटेल तीन बार लोकसभा सांसद और पांच बार राज्यसभा सांसद रहे। 80 के दशक में भरूच को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। अहमद पटेल को यहां से तीन बार जीत मिली। 

हर बार ज्यादा वोटों से जीता भरुच
पटेल ने अपना पहला चुनाव साल 1977 में भरूच लोकसभा सीट से लड़ा था। इस चुनावी मुकाबले में अहमद पटेल 62 हजार 879 मतों से जीते थे। अहमद पटेल 1977 में चुनाव जीतकर सबसे युवा सांसद बने थे। उस दौरान उनकी उम्र महज 26 साल थी।  इसके बाद के चुनावों में उनकी जीत का अंतर बढ़ता गया। 1980 में एक बार फिर वह भरूच से मैदान में उतरे, इस बार उन्होंने 82 हजार से अधिक मतों से अपने प्रतिद्वंद्वी को हराया। 1984 में अहमद पटेल ने एक लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी। बात की जाए 1980 और 1984 की तो जनता पार्टी के चंदूभाई देशमुख दूसरे नंबर पर रहे थे। 
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