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Air India Tragedy: विमान हादसे के कुछ मिनट बाद ही आर्मी ने संभाली थी कमान, सेना ने कहा- हर चुनौती के लिए तैयार

Thu, 03 Jul 2025 11:01 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 03 Jul 2025 11:01 PM IST
सार

Air India Tragedy: अहमदाबाद में एयर इंडिया हादसे के तुरंत बाद भारतीय सेना ने 150 से ज्यादा जवानों को मौके पर भेज दिया। सेना के इंजीनियरों, मेडिकल और राहत दल ने तेजी से मोर्चा संभाला। दीवार तोड़कर कॉलेज में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। सेना ने बताया कि अब आपदा राहत सिर्फ इमरजेंसी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है।

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Ahemdabad Air India Tragedy Army took over command just minutes after plane crash said ready every challenge
एअर इंडिया विमान हादसे की तस्वीर - फोटो : PTI

विस्तार

भारतीय सेना ने बीते महीने अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे के तुरंत बाद बड़ी तेजी दिखाते हुए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया था। हादसे के कुछ ही मिनटों के अंदर सेना के 150 से ज्यादा जवान मौके पर पहुंच गए। इस दौरान इंजीनियरिंग, मेडिकल, फायर ब्रिगेड और क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) के जवानों ने मौके पर पहुंचकर हालात संभाले।
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पुणे में आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम में साउदर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने बताया कि अब आपदा प्रबंधन कोई एक-दो बार होने वाला काम नहीं रहा। यह हमारी ऑपरेशनल तैयारी का अहम हिस्सा बन चुका है, जिसकी हमें न सिर्फ योजना बनानी है, बल्कि ट्रेनिंग और बेहतरीन क्रियान्वयन भी करना है।
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अस्पताल की दीवार तोड़ बनाई राहत की राह
जनरल सेठ ने बताया कि अहमदाबाद में एयर इंडिया AI-171 की क्रैश लैंडिंग के कुछ ही मिनटों में सेना के जवानों ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत अभियान शुरू कर दिया। हादसे में बी.के. मेडिकल कॉलेज की दीवार पर विमान टकरा गया था। ऐसे में सेना ने तुरंत दीवार तोड़कर अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का रास्ता बनाया, जिससे कई जिंदगियां बचाई जा सकीं।
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बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं चिंता का कारण
सेना प्रमुख ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं की संख्या और गंभीरता तेजी से बढ़ी है। असम में बाढ़, हिमाचल और वायनाड में भूस्खलन, उत्तराखंड में बादल फटने और समुद्र किनारे आए तूफानों ने देश के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है। 2024 में भारत को प्राकृतिक आपदाओं से करीब 12 अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जो पिछले 10 वर्षों के औसत नुकसान से काफी ज्यादा है।

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हर चुनौती में निभाई अहम भूमिका
उन्होंने बताया कि सेना की इंजीनियर कोर ने देश में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाई है। वायनाड में बाढ़ के दौरान 200 जवानों की टीम ने 48 घंटों से भी कम समय में 130 फीट लंबा 'बेली ब्रिज' तैयार किया, जिससे दो गांवों के बीच टूटा संपर्क दोबारा जोड़ा जा सका। यह पुल आज भी वहां के लोगों की लाइफलाइन बना हुआ है।

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आपदा प्रबंधन सुरक्षा से भी जुड़ा मसला
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल मानवीय पहलू तक सीमित नहीं है। यह सीधा देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला बन चुका है। सेना की तैयारी और तत्परता न सिर्फ आपदा राहत में, बल्कि देश की सुरक्षा और जनता के विश्वास को मजबूत करने में भी बेहद जरूरी है।

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