भारत में चरम पर है लोन वुल्फ हमले की आशंका
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आतंकवाद के तेजी से बदल रहे तरीकों में लोन वुल्फ हमले ने वैश्विक (ग्लोबल) खतरे का शक्ल अख्तियार कर लिया है। फ्रांस के नीस में हुए बर्बर आतंकी वारदात के इस तरीके से दुनिया भर की सुरक्षा एजेसिंयां स्तब्ध है।
भारत की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यहां आतंकवाद के मौजूदा हालात को देखते हुए लोन वुल्फ हमले की आशंका चरम पर है। आतंकी हमले का यह तरीका इस्लामिक स्टेट (आईएस) की उस थ्यौरी से प्रेरित है जिसमें वेब साईट और मेल के जरिए जहां रहो वहीं से करो जेहादॅ का संदेश दिया जाता है।
मौजूदा दौर में लोन वुल्फ हमले का मतलब है बिना किसी नेतृत्व के अपने धार्मिक, सांप्रदायिक और कट्टर विचारधारा के नाम पर अकेले हथियार लेकर आम लोगों और सुरक्षाबल पर हिंसक हमले करना।
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह पूरी तरह कट्टर विचारधारा से प्रभावित युवकों की करतूत होती है। खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख संजीव त्रिपाठी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि इस मुसीबत को हथियार से नहीं विचारधारा के स्तर पर ही लड़ा जा सकता है।
आईएस के प्रभाव में पड़े भारतीय युवकों पर पैनी नजर रखी जाए
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद लोन वुल्फ की तर्ज पर हमले के लिए युवको को उकसा रहा है। हिजबुल मुजाहिद्दीन सरगना सैयद सलाउद्दीन के नेतृत्व वाला यूनाइटेड जेहाद काउंसिल (यूजेसी) भी लोन वुल्फ पर प्रयोग कर रहा है। लेकिन असल खतरा आईएस और उसके जेहाद की विचारधारा है।
संजीव त्रिपाठी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन आईएस को आतंकी संगठन के तौर पर नहीं बल्कि विचाधारा के तौर पर देखना होगा जिसके प्रभाव में भारतीय युवक गंभीर तौर पर भटक रहे हैं। लश्कर और जैश जैसे पाकिस्तानी संगठनों से तो निबटा जा सकता है। लेकिन आईएस के विचारधारा की काट निकालना बड़ी चुनौती है।
त्रिपाठी के मुताबिक इसके लिए मुसलिम समाज को ही तय करना होगा कि इस्लाम की सही व्याख्या क्या है। ताकि धर्म के नाम पर सीधा साधा पारिवारिक युवक बंदूक नहीं उठाए। आतंरिक सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ और रॉ के पूर्व चीफ होर्मिस थाराकन के मुताबिक यह समय है जब आईएस के प्रभाव में पड़े भारतीय युवकों पर पैनी नजर रखी जाए। इसके लिए खुफिया तंत्र में भी नए प्रयोग करने होंगे।
विश्व स्तर पर खुफिया मामले में लंबा तजुर्बा रखने वाले थाराकन ने बताया कि आतंकियों के पास औचक हमले (सर्पराइज एलिंमेंट) का लाभ हमेशा होता है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि फ्रांस में कोई सिरफिरा बड़ा ट्रक लेकर आम जनता की भीड़ में घुस जाएगा। थाराकन ने सुरक्षा एजेंसियों को आगाह किया है कि स्टंट फिल्मों में होने वाली काल्पनिक घटनाएं अब कभी भी सच साबित हो सकती हैं।