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आरिफ मोहम्मद खान बोले: मैं अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक की अवधारणा के खिलाफ, भारत में हर धर्म को मिला आश्रय

Sat, 20 Nov 2021 09:33 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, हैदराबाद
पीटीआई, हैदराबाद Published by: Amit Mandal Updated Sat, 20 Nov 2021 09:33 PM IST
सार

आरिफ मोहम्मद खान ने कार्यक्रम में उर्दू में बोलते हुए कहा कि औपनिवेशिक सरकार की विरासत को देखते हुए अल्पसंख्यक का इस्तेमाल किया गया है।

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 Against the binary of minority-majority as all citizens enjoy equal rights in the country: Kerala Guv Arif Mohammed Khan
आरिफ मोहम्मद खान (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शनिवार को कहा कि वह अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक की अवधारणा के खिलाफ हैं। देश के सभी नागरिकों को संविधान के तहत समान अधिकार प्राप्त हैं और इसलिए भी कि भारतीय सभ्यता ने विभिन्न धर्मों के लोगों को आत्मसात किया है। उन्होंने सवाल उठा, क्या मैं अपने देश में अल्पसंख्यक के रूप में रहूंगा जहां मैं पैदा हुआ था। अल्पसंख्यक का क्या अर्थ है? मैं बराबर से कम हूं? क्या यह मुझे शर्मिंदा नहीं रखता? क्या मैं इसे एक इंसान के रूप में अपनी गरिमा के लिए अपमानजनक नहीं मानता?

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संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का दिया हवाला
उन्होंने 'ज्यूडिशियल क्वेस्ट' पत्रिका द्वारा आयोजित 'सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार - भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 और 30' पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने उर्दू में बोलते हुए कहा कि औपनिवेशिक सरकार की विरासत को देखते हुए अल्पसंख्यक का इस्तेमाल किया गया है।
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उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और 15 (धर्म और नस्ल के आधार पर भेदभाव का निषेध) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मैं तो बुनियादी तौर पर इस अकलियत और अक्सरियत के तसब्बुर के खिलाफ हूं (मैं अल्पसंख्यक और बहुमत के इस विचार के खिलाफ हूं)। हम इंसानी बिरादरी हैं।
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भारत ने यहूदियों, पारसियों, ईसाइयों को दिया आश्रय
उन्होंने कहा कि भारत ने यहूदियों, पारसियों, ईसाइयों सहित विभिन्न धर्मों के लोगों को आश्रय दिया है। खान ने 9 अक्टूबर को दिल्ली में एक सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के संदर्भ में एक बातचीत में भी यही विचार व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि जब भारत की बात आती है तो वह 'बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक' की अवधारणा को अस्वीकार करते हैं क्योंकि इसके सभी नागरिकों के पास समान अधिकार हैं। लेकिन पाकिस्तान में इसके विपरीत है, वहां जो मुसलमान नहीं हैं, उन पर पाबंदियां हैं।  

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