{"_id":"5a6ff1be4f1c1b8d268b71dd","slug":"after-republic-day-row-rahul-gandhi-sat-on-front-row-in-joint-session-of-parliament","type":"story","status":"publish","title_hn":"गणतंत्र दिवस के बाद संसद में पहली सीट पर बैठे दिखे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
गणतंत्र दिवस के बाद संसद में पहली सीट पर बैठे दिखे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 30 Jan 2018 02:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को संसद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के दौरान पहली लाइन में बैठे दिखे। इससे पहले उन्हें गणतंत्र दिवस के जश्न में परेड के वक्त छठी लाइन में सीट दी गई थी। राहुल गांधी के साथ अपनाए गए इस व्यवहार पर कांग्रेस ने तीखा विरोध जाहिर किया था।
विज्ञापन
इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर भी राहुल की तस्वीर वायरल हुई। दरअसल, बजट सत्र की शुरुआत सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ हुई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यहां संसद के दोनों सदनों की संयुक्त सभा को संबोधित किया।
विज्ञापन
कांग्रेस के विरोध के बाद भारतीय जनता पार्टी की ने उसकी आपत्ति को खारिज कर दिया। पार्टी ने कहा, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल खुद को सुपर वीवीआईपी मानते हैं और सबसे आगे रखना चाहते हैं। जबकि राहुल को प्रोटोकॉल के तहत सीट दी गई थी।
विज्ञापन
भाजपा ने हैरानी जताई कि कांग्रेस इसे लेकर विवाद खड़ा कर रही है। कांग्रेस के शासनकाल में भाजपा नेताओं के साथ ऐसा ही बर्ताव किया जाता था, लेकिन उन्होंने कभी इसे मुद्दा नहीं बनाया। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा परंपरा को परे रखकर ओछी राजनीति कर रही है।
भाजपा के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा, यह उस पार्टी का व्यवहार नहीं हो सकता, जो 133 साल का शानदार इतिहास होने का दावा करती है। जब कांग्रेस सत्ता में थी तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं के साथ इसी तरह का व्यवहार किया गया। हमने कभी इसे मुद्दा नहीं बनाया। हमने लोकतंत्र की भावना के तरह लिया।
जीवीएल ने कहा, देश में कांग्रेस का शासन नहीं है लेकिन राहुल गांधी को लगता है कि वह ‘सुपर वीवीआईपी’ हैं। नए भारत के लोग अपने नेताओं से यह उम्मीद नहीं रखते कि वह अपने कंधे पर वीवीआईपी का तमगा पहनें। समारोह में सीटों का आवंटन नियम और परंपरा के आधार पर होती है।