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करतारपुर कॉरिडोर के बाद कश्मीरियों ने उठाई शारदा पीठ खोलने की मांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कश्मीर
Updated Fri, 30 Nov 2018 03:07 PM IST
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शारदा पीठ
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करतारपुर कॉरिडोर का बुधवार को पाकिस्तान में शिलान्यास किया गया था। इस कॉरिडोर के खुलने से सिख समुदाय के लोग अब पवित्र गुरुद्वारे ननकाना साहिब के दर्शन कर सकेंगे। अब कश्मीरी पंडितों का एक समूह शारदा पीठ को खोलने की मांग कर रहा है। यह एक महत्वपूर्ण मंदिर है जो लाइन ऑफ कंट्रोल में आता है। केवल इतना ही नहीं मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां जैसे कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने भी इसे लेकर अपनी आवाज उठाई है।
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अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को यह कहते हुए सुना गया है कि उनकी सरकार दूसरे प्रस्तावों पर भी विचार कर सकती है जिसमें कश्मीर के शारदा पीठ की यात्रा भी शामिल है। यह एक प्राचीन शारदा मंदिर है। जिसे सारदा और सरादा भी कहा जाता है। नीलम घाटी में स्थित शारदा विश्वविद्यालय में आज भी पुरातन मंदिर के अवशेष मिलते हैं। यह स्थान मुजफ्फराबाद से 160 किलोमीटर की दूरी पर लाइन ऑफ कंट्रोल के छोटे से गांव शारदी या सारदी में स्थित है। यहां नीलम नदी मधुमति और सरगुन की धारा में मिलती है।
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द सेव शारदा कमेटी जो कश्मीरी पंडितों के तीर्थयात्रियों को शारदा मंदिर जाने की इजाजत देने के अभियान को चला रहा है, उसका कहना है कि उसके सदस्य दोनों तरफ के लोग हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को एक याचिका दी है और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है। कमेटी के अध्यक्ष रविंदर पंडित ने कहा, 'अब मैंने सुना है कि उन्होंने (इमरान) इसके बारे में बात की है। इससे हमें काफी उम्मीद मिली है। 2007 से हमारे पास क्रॉस एलओसी परमिट है लेकिन यह केवल जम्मू और कश्मीर के नागरिकों के अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए है। हम एक संशोधन चाहते हैं। हम धार्मिक तीर्थयात्रा चाहते हैं ताकि हम शारदा जा सकें।'
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पंडित ने शारदा को अपनी कुलदेवी के तौर पर उल्लिखित करते हुए उन्हें कश्मीरी पंडितों की प्रमुख देवी बताया। उन्होंने कहा कि जहां मंदिर जाने के तीन और चार पारंपरिक रास्ते हैं। रविंदर ने कहा, 'हम केवल यह कह रहे हैं कि हमें वर्तमान परमिट प्रणाली का उपयोग करने दिया जाए। हम मुजफ्फराबाद से होकर जाना चाहते हैं।' मंदिर के अलावा वहां भारत की सबसे पुरानी विश्वविद्यालय के अवशेष हैं। एक समय जब हिंदुत्व घट रहा था और बौद्ध धर्म बढ़ रहा था तब आदि शंकराचार्य ने विश्विद्यालय का दौरा किया और हिंदुत्व का पुन: जागरण शुरू हुआ।